चंडीगढ़, 8 सितम्बर- हरियाणा के मुख्य सचिव श्री दीपेन्द्र सिंह ढेसी ने कहा है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग देश की अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।  आयोग ने  उद्योग, रियल एस्टेटस से जुडे़ कई मामलों में ऐतिहासिक निर्णय देकर न केवल उपभोक्ता कल्याण कार्य किया है बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित किया है।

 मुख्य सचिव श्री ढेसी आज यहां सेक्टर-3 स्थित हरियाणा निवास में हरियाणा आपूर्ति एवं निपटान विभाग द्वारा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के तत्वाधान में नीति निर्धारण एवं प्रशासन में प्रतिस्पर्धा संस्कृति की भावना सृजित करना विषय पर आयोजित प्रशासनिक सचिवों के विशेष सत्र को सम्बोधित कर रहे थे।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के चैयरमेन देवेन्द्र कुमार सिकरी, सदस्य सुधीर मित्तल व विपुल पुरी तथा सलाहकार सुश्री सिबानी स्वैन ने भी सत्र को सम्बोधित किया और आयोग के लक्ष्य एवं कार्यों पर प्रकाश डाला। श्री सिकरी ने कहा कि भारत में यह आयोग नया है। वर्ष 2002 में यह अधिनियम बना तथा उसके तुरन्त बाद  इसमें संशोधन किया गया और वर्ष 2009 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  का गठन किया गया। अमेरिका, कनाडा जैसे देशों में तो 100 वर्ष पहले ही ऐसे कानून बना दिए गए थे। उन्होंने कहा कि आयोग के पास कानूनी शक्तियां है। बाजार में कुछ कम्पनियों व उद्योगों का एकाधिकार न हो इसके लिए निविदा प्रणाली  से प्रतिस्पर्धा बनाए रखना अति आवश्यक है। 

उन्होंने बताया कि आयोग ने हरियाणा सीमेंट आपूर्ति करने वाली कम्पनियों पर सीमेंट के  मूल्य में एकाधिकार स्थापित करने वाली कम्पनियों पर 206 करोड़ रुपये का जुर्माना  लगाया गया है। उन्होंने बताया कि रक्षा, परमाणु ऊर्जा, मुद्रा तथा अन्तरिक्ष विभागों को छोड़कर सभी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के क्षेत्र में आते है। उन्होंने बताया कि हर सरकारी विभाग एक उद्यम है और उसके विरूद्घ शिकायत मिलने पर आयोग कार्यवाही कर सकता है।  हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं व लोक निर्माण विभाग के बारे भी शिकायत प्राप्त हुई है जिन की जांच की जा रही है।

हरियाणा आपूर्ति एवं निपटान विभाग के प्रधान सचिव श्री सुधीर राजपाल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और विभाग द्वारा निविदा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी  और  प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए अपनाई जा रही प्रणाली की जानकारी दी।

समारोह में बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री पी के दास, लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम, उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ महावीर सिंह के अलावा अन्य विभागों के प्रशासनिक सचिव व विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

बाद में आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल से मुलाकात भी की।