चंडीगढ़, 6 जुलाई- हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंन्दा ने महिला एवं बाल विकास विभाग को परामर्श देते हुए कहा कि वे जेल में रह रहे बच्चों के लिए समय-समय पर सीडीपीओ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की डियूटी लगाएं ताकि वे बच्चों को रहन-सहन, उठना-बैठना, बोलना इत्यादि का प्रशिक्षण दे सकें। इसके अलावा जिला बाल संरक्षण अधिकारियों व कारागार के प्रतिनिधियों को परामर्श देते हुए कहा कि जेलों में रह रही महिला कैदियों व उनके बच्चों की विस्तृत जानकारी एक महीने के अंदर भिजवाना सुनिश्चित करें।
यह निर्देश उन्होंने आज पंचकूला में हरियाणा आवास बोर्ड के सभागार में महिला कैदियों के बच्चे और उनकी परिस्थितियों के विषय पर आयोजित सेमीनार में दिए, जिसमें महिला कैदियों के साथ रह रहे बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सेमीनार मे हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैन्दा ने अपने जेल दौरों के अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि कैदियों के बच्चों को भी अन्य बच्चों की तरह समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने आरडी उपाध्याय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर जोर देते हुए कहा कि कैदियों के बच्चों के सामाजिक विकास के लिए विशिष्ट दिनों को जेल में मनाया जाना चाहिए। बच्चों और माता के लिए जेल में स्वास्थ्य अधिकारियों का होना जरूरी है। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विवेक गोयल से आग्रह करते हुए कहा कि वे जेलों में शिविर आयोजित कर पोस्को एक्ट व अन्य कानूनी सहायता के बारे मे जानकारी दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को जैसा वातावरण मिलेगा उनका वैसा ही विकास होगा। इसके अलावा बाहर शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को गुणवत्तापूर्वक शिक्षा दिलवाना सुनिश्चित करें और बच्चों के बायोडाटा की फाईल भी तैयार करें।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सचिव एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक हेमा शर्मा ने बताया कि जेलों में रह रहे बच्चों के संबंध में यह पहली आयोजित यह बैठक है। उन्होंने कहा कि हम सबका दायित्व बनता है कि ऐसे बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति सभी प्रकार की सुविधाएं प्राप्त हों। उन्होंने अपने विभाग के माध्यम से बच्चों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न स्कीमों की भी जानकारी दी।
महानिरीक्षक जेल जगजीत सिंह ने हरियाणा प्रदेश की जेलों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हए बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 19 जेलें हैं और 15 जेलों में महिला वार्ड हैं। जहां महिला कैदियों व उनके बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई बनने वाली जेलों में और भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा की कारागार में 732 महिला कैदी हैं और इनमें उनके साथ 45 बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें अच्छे भोजन के साथ-साथ शिक्षा, खेल, क्रेच व स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके साथ-साथ महिला कैदियों के 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के जेल से बाहर रह रहे बच्चो को भी विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से बेहतर शिक्षा सेवा उपलब्ध करवाई जा रही है।
बाल अधिकार सलाहकार नील राबर्ट ने प्रोजैक्टर के माध्यम से कैदी बच्चों व उनके पाल-पोषण विषय पर डाक्यूमेंटरी प्रस्तुत की। विभिन्न जिलों से आए जिला बाल संरक्षण अधिकारियों ने जेलों में महिला कैदियों के साथ रह रहे उनके बच्चों को दी जा रही सुविधा के बारे में अपने अनुभव सांझे किए और बताया कि बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें अभी ओर सुधार होना बाकी है। भिवानी, हिसार, रोहतक, जींद, कुरुक्षेत्र, भिवानी कारागार विभाग से आए अधिकारियों ने जेल में उपस्थित बच्चों व उनकी माताओं के आंकड़े प्रस्तुत किए। हरियाणा की जेलों में रह रहे बच्चों की पढाई-लिखाई के साथ-साथ खेलो के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए और कई कदम उठाए जा रहे हैं।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य दण्डाधिकारी विवेक गोयल, प्राधिकरण, कारागार विभाग से आए प्रतिनिधियों व जिला बाल संरक्षण अधिकारियों ने भाग लिया।