चंडीगढ, 9 जुलाई,2018- सामाजिक समरसता का प्रयास आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना खालसा साम्राज्य में था। उस समय खालसा साम्राज्य के संस्थापक बाबा बन्दा सिंह बहादुर ने जात-पात और धर्म की संकीर्णताओं को तोड़कर गुरू साहिबान की दी हुई सीख को कार्यान्वित किया था। नई पीढी को उनका अनुसरण कर नए भारत के निर्माण में कारगर भूमिका निभानी चाहिए। ये उद्गार हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने आज हरियाणा राजभवन में वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अमरजीत सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘बाबा बंदा सिंह बहादुर-भक्ति से शक्ति तक’ नाट्य रूपांतरण के विमोचन के अवसर पर कही।
राज्यपाल ने कहा कि बाबा बन्दा सिंह बहादुर ने निम्न वर्ग के लोगों को उच्च पद दिलाये तथा हलवाहक किसान-मजदूरों को जमीन का मालिक बनाया। इस प्रकार उन्होंने अति प्राचीन जमींदारी प्रथा का अन्त कर कृषकों को बड़े-बड़े जागीरदारों और जमींदारों की दासता से मुक्त किया था। वे साम्प्रदायिकता की संकीर्ण भावनाओं से भी परे थे। उन्होंने मुसलमानों को राज्य में पूर्ण धार्मिक स्वातन्त्रर्य दिया था और पाँच हजार मुसलमान भी उनकी सेना में थे।
लेखक को इस अवसर पर बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि बाबा बन्दा सिंह बहादुर के जीवन और कार्याें से नई पीढियों को प्रेरणा देने के लिए उनके महान कार्याें का प्रकाशन अत्यंत सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि लेखक ने उनकी जीवनी का नाट्य रूपान्तरण कर इसे अधिक प्रभावशाली और कालजयी बना दिया है क्योंकि इससे युवा पीढी बाबा बन्दा सिंह बहादुर के कार्याें को दीर्घकाल तक मंच पर सजीव रूप से देखेगी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक युवकों में देशसेवा की भावना जागृति की दृष्टि से भी अपना विशेष महत्व रखती है। यह बाबा बन्दा सिंह बहादुर के जीवन-मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से नई पीढियों को सीख लेने की प्रेरणा देती रहेगी।
इस अवसर पर उपस्थित डाॅ0 राजसिंह, आई0ए0एस0 ने राज्यपाल को बताया कि उन्होंने अपने गांव सेहरी खाण्डा, हरियाणा में 60 एकड़ जमीन दी है जिस पर आर्मी प्रीपेटरी स्कूल खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज महन्त किशनदास ने सेहरी खाण्डा में बाबा बन्दा सिंह बहादुर की सेना को जगह दी थी और वहीं पर खालसा साम्राज्य की नींव डाली गई थी।
लेखक अमरजीत सिंह ने पुस्तक के विमोचन के लिए राज्यपाल का धन्यवाद किया। उन्होंने इस पुस्तक को लिखने में सहयोग करने वाले महानुभावों का भी धन्यवाद किया।