लखनऊ: 21.01.26-19 से 21 जनवरी, 2026 तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के द्वारा लखनऊ स्थित विधान सभा मंडप में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह से पूर्व आज चर्चा के लिए चयनित विषय “जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही” पर अपना सम्बोधन देते हुए हि0प्र0 विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा कि लोकतत्र में जनता सर्वोच्च है तथा शासन करने की शक्तियां जनता से ही निकलती है। उन्होने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इनमें विधायिका का स्थान विशेष है, क्योंकि यही संस्था जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करती है और कानून निर्माण, नीति निर्धारण तथा सरकार पर नियन्त्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती है। इसलिए जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है। पठानियां ने कहा कि यदि विधायिका जनता की अपेक्षाओं, आवश्यकताओं और हितों के प्रति उत्तरदायी नहीं रहती है तो लोकतंत्र केवल नाम मात्र रह जाता है।

पठानियां ने कहा कि विधायिका वह संस्था है जो कानून बनाने, संशोधित करने और निरस्त करने का कार्य करती है। भारत में विधायिका को संसद और राज्य विधानमण्डलों के रूप में देखा जाता है। पठानियां ने कहा कि विधायिका की जवाबदेही का अर्थ है कि विधायिका जनता के हित में कार्य करे, जनता की समस्याओं को समझे, उनके समाधान के लिए कानून बनाए और यदि वह अपने कर्तव्य में असफल रहती है तो जनता उसे चुनाव के माध्यम से बदल सके।

हिमाचल प्रदेश विधान सभा का अपने सम्बोधन में जिक्र करते हुए पठानियां ने कहा कि उसकी अपनी एक उच्च परम्परा तथा गरिमा है। पठानियां ने कहा कि देश के सर्वप्रथम निर्वाचित पीठासीन अधिकारी विठ्ठलभाई पटेल का चुनाव उसी भवन में वर्ष 1925 में हुआ था। हालांकि फ्रेडरिक व्हाईट वर्ष 1919 में राष्ट्रीय असैम्बली के पहले नामांकित चेयरमैन बने थे। महिलाओं को मत देने तथा अंग्रेजो भारत छोड़ो का प्रस्ताव भी उसी ऐतिहासिक सदन में हुआ था। पठानियां ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का पहला सम्मेलन भी वर्ष 1921 में शिमला में हुआ था। उन्होने कहा कि आज यहाँ सदन की बैठकों को बढ़ाने की चर्चा चल रही है और हिमाचल इसमें भी उतम है। हमने वर्ष 1962 में 182 दिनों का सत्र किया था तथा पिछले कैलेण्डर वर्ष में हमने 35 बैठकें पूरी की है जिसकी कार्य उत्पादकता 100% से भी उपर रही है। पठानियां ने कहा कि आज विधान मण्डलों में भी आधारभूत संरचना को स्तरोन्नत करने की जरूरत है लेकिन उसके लिए सरकार के सहयोग की जरूरत रहती है। पठानियां ने कहा कि वह स्वयं उत्तर प्रदेश विधान सभा की आधारभूत संरचना से प्रभावित हुए हैं तथा वह शिमला व धर्मशाला में भी इसी तरह की संरचना करने का प्रयास करेंगे। पठानियां ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष, सरकार तथा अधिकारियों का अतिथ्य सत्कार के लिए हार्दिक धन्यवाद किया तथा 86वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के सफल आयोजन की बधाई दी।

गत रात्रि विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां पीठासीन अधिकारियों के सम्मान में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए। रात्रि भोज में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्या नाथ भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस दौरान कुलदीप सिंह पठानियां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्या नाथ के साथ आत्मीय भेंट कर उन्हें टोपी व शॉल पहनाकर सम्मानित किया तथा हिमाचल प्रदेश के पर्यटन बारे भी चर्चा की। इस अवसर पर पठानियां ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी हिमाचली अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया।

अपराह्न 12:15 बजे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह का आगाज हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ बतौर विशेष अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित हुए। समापन समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना राज्य सभा उप-सभापति डॉ0 हरिवंश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ तथा लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने-अपने सम्बोधन दिए जबकि उत्तर प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने सभी अतिथियों का सम्मेलन में भाग लेने तथा अपने उत्कृष्ट सम्बोधनों से उत्तर प्रदेश विधान सभा मंडप को सुशोभित एवं पवित्र करने के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर सभी राज्य विधान सभाओं के पीठासीन अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के काबिना मंत्री, विधायक, संसद सदस्य मौजूद थे।

कुलदीप सिंह पठानियां समेत सभी पीठासीन एवं उप-पीठासीन अधिकारी 22 जनवरी, 2026 को प्रात: 9:00 बजे अयोध्या के लिए रवाना होंगे तथा श्री राम मन्दिर में दर्शन पूजा अर्चना एवं प्रभु का आर्शीवाद प्राप्त करेंगे।