धर्मशाला, 25 फरवरी, 2026-कृषि सचिव डॉ. सी. पॉलरसु ने कॉमन इंटरेस्ट ग्रुप (CIG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाने तथा उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के कृषि-व्यवसाय नेटवर्क से जोड़ने का आह्वान किया। वे यहां आयोजित जेआईसीए सहायतित कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान कल देर शाम ‘सतत मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण और समावेशी बाजार पहुंच’ विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे।
इस सत्र में डॉ. पॉलरसु की अध्यक्षता में सह्याद्री फार्म्स के विलास शिंदे ने बताया कि एफपीओ और सहकारी समितियों जैसे समेकन मॉडल किसानों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में कैसे सशक्त बनाते हैं। हार्वेस्टिंग फार्मर्स नेटवर्क के श्री रुचित जी. गर्ग ने संरचित कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं और क्लस्टर आधारित विपणन दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि एचएफएन ने एचपी जेआईसीए कृषि परियोजना को कांगड़ा जिले के चेतडू में एचपी फार्मर्स कंसोर्टियम के गठन में सहयोग प्रदान किया है।
अन्य चार तकनीकी सत्रों में संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियां एवं जलवायु अनुकूल खेती; जलवायु अनुकूल सतत कृषि में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार; सतत कृषि और कृषि-व्यवसाय में पीपीपी मॉडल तथा कृषि-व्यवसाय स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन जैसे विषय शामिल थे। इन सत्रों में एग्री-टेक उद्योग और कृषि-व्यवसाय संस्थानों के प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें एम2लाबो, ईकी फार्म्स, जाइडेक्स और मैनेज के प्रतिनिधि शामिल थे। सोमवार दोपहर और मंगलवार तक कार्यशाला में कुल पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान के अनुसार ‘सतत कृषि और कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला 24 से 26 फरवरी तक धर्मशाला में आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन एचपी जेआईसीए कृषि परियोजना द्वारा किया गया है। कार्यशाला का उद्घाटन सोमवार को कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने किया, जिसमें जायका -इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि श्री ताकेउची ताकुरो तथा हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक श्री केवल सिंह पठानिया भी उपस्थित रहे।
डॉ. चौहान ने बताया कि इस कार्यशाला में देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रतिभागियों में भारत सरकार एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिकारी, देशभर की विभिन्न जायका सहायता प्राप्त परियोजनाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सफल कृषि उद्यमी, एग्री-टेक नवप्रवर्तक, प्रगतिशील किसान एवं अन्य प्रमुख हितधारक शामिल रहे।