रोहतक,19.05.17- हरियाणवीं संस्कृति से प्रेम रखने वालों के लिए अच्छी खबर है कि प्रदेश में हरियाणवीं परिधानों व आभूषणों के प्रति तेजी से क्रेज बढ़ रहा है। अकेले रोहतक, हिसार व फतेहाबाद जिले की बात करे तो यहां औसतन जिलावार हर रोज सात से दस युवा हरियाणवीं परिधान सिलवा रहे हैं या फिर खरीद रहे हैं। जानकारों की माने तो वालीवुड फिल्मों में हरियाणवीं बोली के बढ़ते चलन, हरियाणवीं फैशन शो कार्यक्रमों व हरियाणवीं फिल्म फेस्टीवल व प्रदेश सरकार के प्रयासों के चलते लोगों का संस्कृति के प्रति तेजी से रुझान तेजी से बढ़ा है। इसी कारण हरियाणवीं परिधानों व आभूषणों की मांग तेजी से बढ़ी है। लंबे समय से हिसार-दिल्ली बाईपास स्थित शास्त्री नगर में हरियाणवीं परिधान सिलने का कार्य करने वाले कृष्ण कुमार के अनुसार पहले जहां केवल 26 जनवरी या 15 अगस्त के आस-पास महज सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हरियाणवीं परिधान सिलने के लिए आते थे, मगर पिछले कई दिनों से औसतन हर दूसरे दिन एक हरियाणवीं परिधान सिलाई के लिए आ रहा है। इसी प्रकार शौरी मार्केट में हरियाणवीं धोती, कुर्ता-पगड़ी व कॉटन कपड़े के थोक के व्यापारी अश्वनी कुमार का कहना है कि इस बार उनका कारोबार पहले की तुलना में कई गुणा बढ़ा है। विगत वर्ष में तुलना में जनवरी से लेकर 19 मई तक की ही बात की जाए तो हरियाणवीं परिधानों के कारोबार में पहले की तुलना में तीन से चार गुणा बढ़ौत्तरी हुई है। उनके अनुसार जहां पहले हरियाणवीं धोती, पाजामा, पगड़ी व अन्य परिधानों के खरीददार गांव के बुर्जुग लोग ही होते थे, मगर इस बार अधिकांश शहरी वर्ग के लोगों ने यह खरीददारी की है। उनमें से भी अधिकाश्ंा युवा हैं, और उनमें से भी अधिकतर शिक्षित व संपंन परिवारों से संबंध रखने वाले हैं।
महम की खादी का डंका:-
हरियाणवीं परिधानों के उपयोग होने वाली खादी में महम की खादी का जादू लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। दामन का ऊपरी रुप-प्रारुप भले ही अलग हो, मगर अधिकांश परिधानों में महम की खादी का उपयोग हो रहा है। इस कारण बंद होने के कगार पर पहुंच चुके इस कारोबार को भी हरियाणवीं ड्रेस के बढ़ावे से नया जीवन मिला है। अधिकांश कारिगरों का मानना है कि दामन की सुन्दरता व मजबुती के लिए महम की खादी का कपड़ा सबसे अच्छा माना जाता है। 
कपड़ा नया, लुक पुरानी:-
हरियाणवीं ड्रेस तैयार करने वाले कारिगरों के अनुसार अधिकतर ग्राहक पुराने भारी दामनों की तुलना में हल्के दामन तैयार करवा रहे हैं। जिससे इनका रख-रखाव आसानी से हो सके। साथ ही इसे स्त्री भी किया जा सके, जबकि पुराने परिधानों में यह सुविधा नहीं होती थी। वैसे कपड़ा भले ही आधुनिक हो, मगर लुक के मामले में पुराना दामन अधिकांश लोगों की पहली पंसद है। पहले जहां पहले 52 कली के दामन होते थे, अब यहीं दामन 42, 46 व 52 कली के बन रहे हैं। 
सामान ब्रिकी में भी इजाफा:-
शहर की शौरी क्लॉथ मार्केट में लैस इम्पोरियम का कारोबार करने वाले दुकानदारों के अनुसार इन दिनों हरियाणवीं परिधान बनाने के लिए उपयोग होने वाले घोटे, झालर व सितारों की बिक्री में तेजी से बढ़ रही है। इसी प्रकार प्रदेश का सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र कहलाने वाले शौरी मार्केट में हरियाणवीं परिधानों के सजावट के सामान की बिक्री तेजी से बढ़ी है। यहां के दुकानदार इस बदलाव से बेहद खुश हैं। उनका मानना है कि आर्थिक मंदी के दिनों में हरियाणवीं परिधान उनका सहारा बन रहा है।  
हिसार, गुडग़ांव-फरीदाबाद में भी डिमांंड:-
हरियाणवीं परिधानों के प्रति बढ़ते रुझान के चलते हिसार, गुडग़ांव-फरीदाबाद में हरियाणवीं परिधानों की बहुत मांग बढ़ी है। आधुनिक शहरों में दर्जियों की संख्या कम होने के कारण वहां पर इस परिधानों के दाम आसमान छू रहें हैं। वर्तमान में गुडग़ांव में एक हरियाणवीं ड्रेस (आभूषण सहित) की कीमत चार से पांच हजार रुपये आम बात है, उसके बावजूद भी उनकी डिमांड पुरी नहीं हो रही है। वैसे हिसार में एक औसतन एक अ‘छे परिधान की कीमत महज तीन से साढे तीन हजार (आभूषणों सहित) के मध्य है।