गुरुग्राम 10 अगस्त। संबंध हेल्थ फाउंडेशन( एसएचएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने कहा है कि वर्तमान में बदलती जीवनशैली से हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिस कारण डिप्रेशन सहित कई तरह की बीमारियेां से हम ग्रसित होते जा रहे है। इसका खुलासा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ‘निमहांस’ द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण 2017 में हुआ है। अकेले गुरुग्राम में 50, 000 लोग गंभीर मानसिक रोग से पीडि़त है। जो कि हमारे लिए चिंताजनक है। अग्रवाल यंहा संबध हेल्थ फाउंडेशन (एस.एच.एफ.) और सिविल अस्पताल द्वारा गंभीर मानसिक रोग पर आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित प्रशिक्षण को संबोधित कर रहे थे।

उन्होने बताया कि वर्तमान में डिप्रेशन के प्रभाव में 40 पार आयु वर्ग आ रहा है। खासतौर पर महिलाअेंा में यह समस्या अधिक सामने आई है जो कि चिंता का विषय है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वे 2015- 16 के एक अनुमान के मुताबिक गुरुग्राम में 50,000 लोग मानसिक रोग से पीडि़त हैं। इसी तरह एक दशक पुराने एक अध्ययन में पाया गया था कि भारत  में 10 करोड़ लोगों के व्यवस्थित देखभाल की जरूरत है। इस अध्ययन में बताई गई संख्या को आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की मदद और उनके  सामयिक हस्तक्षेप से कम किया जा सकता है। इनकी पहुंच गांव -ढ़ाणी तक होती है इसलिए इनका आमजनता के घरों तक सीधी पहुचं हेाती है इसलिए गंभीर मानसिक रोग को कम करने में आशा और एएनएम की भूमिका अह्म हो सकती है। 

उन्हेाने कहा कि मानसिक रोग और विसंगतियां किसी भी उम्र में हो सकती है और इसका असर अलग-अलग होता है। रोग लगने की बदनामी और समझदारी की कमी के कारण लोग स्वास्थ्य पेशेवरों की मदद नहीं ले पाते। इस तरह, रोग के उपचार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो जाता है। आशा और एएनएम कार्यकर्ता इस दिशा में समय पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकती दे सकती हैं।

सिविल अस्पताल के सीएमओ बी.के.राजौरा ने बताया कि बर्गर, पिज्जा, चॉकलेट, ठंडा, नुडूल्स आदि के खाने- पीने की समाज में स्वीकार्यता भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इसके साथ ही हमारी जीवन शैली के कारण हम व्यायाम पर ध्यान नहीं देते जिससे शहरी आबादी का एक बड़ा हिस्सा मोटापे का शिकार हो रही है। जोकि चिंताजनक है।

डा.राजौरा ने कहा कि हरियाणा सरकार ने जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम सिविल अस्पताल और एसएचएफ मिलकर समुदाय आधारित केंद्र चला रहे है। जिसमें विभिन्न तरह के मानसिक रोगो से स्वास्थ्य लाभ और जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जा रहे है। सरकार की इस पहल के कारण रोगियों को उपचार समय रहते मदद और आसानी से उपचार उपलब्ध हो रहा है। जिससे जरूरतमंद लोगों के जीवन में काफी परिवर्तन आया है। इस केन्द्र में रह रहे कई मानसिक रोगियों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर  अपना आत्मविश्वास दुबारा से प्राप्त किया है।

आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को दिए गए प्रशक्षण में उन्हें रोग के लक्षण को पहचानने और मानसिक रोगियों को समाधान और विशेषज्ञों के माध्यम से सलाह उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर मानसिक रोग की स्थिति को भी बताया। जिसमें बताया गया कि दुनियाभर में 3 प्रतिशत लोग गंभीर मानसिक रोगों से पीडि़त हैं। ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में कुल विकलांगता में 13 प्रतिशत लेाग मानसिक विसंगति के शिकार हैं। विकलांगता और अवसाद के साथ समझौता कर जीवन-यापन करना, मानसिक विसंगतियों का मुख्य कारण है। किसी एक व्यक्ति के पीडि़त होने से पूरा परिवार उसे जीवन बोझ समझने लगता है। इस दौरान यहां रहने वाली सृष्टि (बदला हुआ नाम) ने बताया कि संबंध समुदाय आधारित घर के बाहर एक घर है और इसने मेरी पूरी व्यक्तित्व को ही बदल दिया है। इससे जीवन स्तर में बदलाव आया और आज मैं पूरी तरह से ठीक होकर अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हूं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित आशा व एएनएम ने विश्वास दिलाया कि वे अधिकाधिक लोगों तक इस संदेश को पहुंचाएंगी और मानसिक विसंगतियों से पीडि़त लोगों के परिवारों के बीच आशा की किरण को जगा पाएंगी।

प्रशिक्षण में गुरुग्राम की आशा व एएनएम कार्यकर्ता, संबध की कार्यक्रम अधिकारी स्मिति गहरोत्रा इत्यादि भी उपस्थित थे।