हिसार-13 अगस्त, 2017 : गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के खेल मैदान में सुबह 8.00 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर भी उपस्थित रहेंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं खेल गतिविधियों का आयोजन भी होगा।  

गुरू जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान, गुजविप्रौवि, हिसार द्वारा भगवान गुरू जम्भेश्वर जी महाराज के 567वें जन्मदिवस पर दिनांक 14 अगस्त को गुरू जम्भेश्वर जी महाराज की शिक्षाओं के विषय में चित्र प्रदर्शनी लगाई जायेगी तथा वन महोत्वस मनाया जाएगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार होंगे। 
यह जानकारी देते हुए गुरू जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष डा. किशन राम बिश्नोई ने बताया कि संस्थान द्वारा 15 अगस्त को संस्थान के पवित्र प्रांगण में जाम्भाणी परम्परा व हिन्दू वैदिक पद्धति के अनुसार प्रात: 08:00 बजे हवन किया जाएगा तथा वनमहोत्सव मनाया जाएगा। इस पुण्य अवसर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार कलश स्थापन्न करेंगे व कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर इस धार्मिक यज्ञ एवं अनुष्ठान की अध्यक्ष पद को गौरवान्वित करेंंगे। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर वनमहोत्वस पर भी विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से वृक्ष लगाने, उनकी देखभाल करने व पेड़-पौधों से होने वाले लाभों से अवगत करवाया जाएगा। डा. बिश्नोई ने गुरू जम्भेश्वर जी महाराज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिश्नोई धर्म संस्थापक और भगवान विष्णु के अवतार तथा मध्यकाल के महान पर्यावरणविद् श्री गुरू जम्भेश्वर जी महाराज  का जन्म वि.स. 1508 (सन् 1451) की भादो वदि अष्टमी सोमवार के दिन कृत्तिका नक्षत्र में राजस्थान प्रांत के नागौर जिले के पीपासर गांव में हुआ था। उन्होंने बताया कि गुरू जम्भेश्वर जी महाराज की समाधि बीकानेर जिले की नोखा तहसील के मुकाम गांव में बनी हुई है। मुकाम से 2 किलोमीटर दूरी पर समराथल धोरा है जहां गुरू जी ने बिश्नोई धर्म की स्थापना की तथा उनकी तपोभूमि है। इन्होंने 20 और 9 नियमों की आचार संहिता  बनाकर बिश्नोई पंथ की स्थापना की। उन्होंने बताया कि उनके भक्तों व अनुयायियों ने प्रकृति रक्षा तथा हरें वृक्षों को कटने से बचाने के लिए जीवन तक की आहुति दी।