ROHTAK,13 अक्टूबर, रोहतक-मां मोक्षदायिनी गंगाधाम ट्रस्ट हरिद्वार की ओर से 76वें जनकल्याणार्थ शिव शक्ति 21 कुण्डीय महायज्ञ एवं श्री राम कथा के पंचम का शुभारम्भ राजीव गांधी स्पोर्स्ट्स काम्पलैक्स के पास, आजादगढ़ रोड़ पर हवन-यज्ञ धर्म प्रचारकं श्री श्री 1008 हरिऔम महाराज, बाबा कृष्णानन्द कालीदास, महंत कर्णपुरी जी, याज्ञिक आचार्य धर्मवीर प्रसाद वेदपाठी, आचार्य देवकृष्ण शौनक जी के सान्निध्य में हुआ। 
धर्मप्रचारक श्री श्री 1008 हरिऔम महाराज ने यज्ञ की का महत्व बताते हुए कहा कि  त्याग, बलिदान, शुभ कर्म व अपने प्रिय खाद्य पदार्थों एवं मूल्यवान् सुगंधित पौष्टिक द्रव्यों को अग्नि एवं वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा वितरित किया जाता है। वायु शोधन से सबको आरोग्यवर्धक साँस लेने का अवसर मिलता है। यज्ञ काल में उच्चरित वेद मंत्रों की पुनीत शब्द ध्वनि आकाश में व्याप्त होकर लोगों के अंतःकरण को सात्विक एवं शुद्ध बनाती है। वैयक्तिक उन्नति और सामाजिक प्रगति का सारा आधार सहकारिता, त्याग, परोपकार आदि प्रवृत्तियों पर निर्भर है। गीताकार ने इसी तथ्य को इस प्रकार कहा है कि प्रजापति ने यज्ञ को मनुष्य के साथ जुड़वा भाई की तरह पैदा किया और यह व्यवस्था की, कि एक दूसरे का अभिवर्धन करते हुए दोनों फलें-फूलें।
रामकथा वाचक भागवत मर्मज्ञ पं. विजय दीक्षित शास्त्री इंदौर वाले ने कथा के पंचम दिवस राम जानकी विवाह अपने सुन्दर मुखार्विंद से श्रृवण कराते हुए कहा कि  त्रेता युग में पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर था। उस समय मुनि विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा करने के उद्देश्य से अयोध्या के महाराज दशरथ से उनके पुत्रों राम एवं लक्ष्मण जी को माँग कर ले गए। यज्ञ की समाप्ति के पश्चात विश्वामित्र जी जनक पुरी के रास्ते से वापसी आने के समय राजा जनक के सीता स्वयंवर की उद्घोषणा की जानकारी मिली। मुनि विश्वामित्र ने राम एवं लक्ष्मण जी को साथ लेकर सीता के स्वयंवर में पधारें। सीता स्वयंवर में राजा जनक जी ने उद्घोषणा की जो भी शिव जी के धनुष को भंग कर देगा उसके साथ सीता के विवाह का संकल्प कर लिया। स्वयंवर में बहुत राजा महाराजाओं ने अपने वीरता का परिचय दिया परन्तु विफल रहे। इधर जनक जी चिंतित होकर घोषणा की लगता है यह पृथ्वी वीरों से विहीन हो गयी है , तभी मुनि मुनि विश्वामित्र ने राम ने राम को शिव धनुष भंग करने का आदेश दिया। राम जी ने मुनि विश्वामित्र जी की आज्ञा मानकर शिव जी की मन ही मन स्तुति कर शिव धनुष को एक ही बार में भंग कर दिया। उसके उपरान्त राजा जनक ने सीता का विवाह बड़े उत्साह एवं धूम धाम के साथ राम जी से कर दिया। साथ ही दशरथ के तीन पुत्रों भरत के साथ माध्वी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला एवं शत्रुघ्न जी के साथ सुतकीर्ति का विवाह भी बड़े हर्ष एवं धूम धाम के साथ कर दिया।
मिडीया प्रभारी पं. लोकेश शर्मा ने बताया कि कल शनिवार को श्री राम कथा में व्यास जी महाराज श्री राम वन प्रस्थान, केवट संवाद, चित्रकुट में निवास, दशरथ जी परमधाम प्रस्थान की कथा कावर्णन कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करेंगें।  
 इस अवसर पर यज्ञ के मुख्य यजमान पार्षद सूरजमल रोज, शमशेर नरवाल, राजेश लुम्बा (टीनू),  एडवोकेट नरेन्द्र कौशिक, बिजेन्द्र ब्रहमचारी, सतीश प्रकाश शर्मा पहरावर, जेपी गौड़, पं. लोकमणी कौशिक, मूर्ती राम सैनी, सोमनाथ पाहवा, डॉ कपिल कौशिक, मनोज वशिष्ठ कपिल दूहन, पं. विजय कुमार वृजवासी, पं. लोकेश शर्मा,  मोनिका भटनागर, प्रदीप भटनागर, रमेश गौड़, नरेश गौड़, आचार्य दीनदयाल शर्मा,  आदि गणमान्य व्यक्तियों ने यज्ञ में सहयोग किया।