रोहतक,17 अक्टूबर-मां मोक्षदायिनी गंगाधाम ट्रस्ट, ऋषिकेश हरिद्वार की ओर से 76वें जनकल्याणार्थ शिव शक्ति 21 कुण्डीय महायज्ञ एवं श्री राम कथा के छठे का शुभारम्भ राजीव गांधी स्पोर्स्ट्स काम्पलैक्स के पास, आजादगढ़ रोड़ पर महायज्ञ धर्म प्रचारकं श्री श्री 1008 हरिऔम महाराज, श्री श्री बाबा कालीदास कृष्णानन्द परमहंस महाराज, महामंलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरी महाराज, महामंडेलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी डॉ. परमानन्द जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल पुरी जी महाराज, महंत कर्णपुरी जी महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। 
धर्मप्रचारक श्री श्री 1008 हरिऔम महाराज हुए कहा कि यज्ञ एसा धर्मिक कर्म है जिसका शुभ प्रभाव न केवल व्यक्ति बल्कि प्रकृति को भी लाभ ही पहुंचाता है। ग्रंथों में अनेक तरह के यज्ञ और हवन बताए गए हैं। विज्ञान भी हवन और यज्ञ के दौरान बोले जाने वाले मंत्र, प्रज्जवलित होने वाली अग्रि और धुंए से होने वाले प्राकृतिक लाभ की पुष्टि करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से हवन से निकलने वाले अग्रि के ताप और उसमें आहुति के लिए उपयोग की जाने वाली हवन की प्राकृतिक सामग्री यानी समिधा वातावरण में फैले रोगाणु और विषाणुओं को नष्ट करती है, बल्कि प्रदूषण को भी मिटाने में सहायक होती है। साथ ही उनकी सुगंध व ऊष्मा मन व तन की अशांत व थकान को भी दूर करने वाली होती है। इस तरह हवन स्वस्थ और निरोगी जीवन का श्रेष्ठ धार्मिक और वैज्ञानिक उपाय है। खासतौर पर कुछ विशेष काल में किए गए हवन तो धार्मिक लाभ के साथ प्राकृतिक व भौतिक सुख भी देने वाले माने गए हैं।
इस अवसर पर मुख्यअतिथि हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन श्रीमती सुनीता दुग्गल रही, विशिष्ठ अतिथि डीएसपी रोहताश सिंह, भारती शर्मा सुपुत्री पं. भवगवत दयाल शर्मा रहीं
 सुनीता दुग्गल ने कहा  कि हरियाणा के रोहतक जैसी शैक्षणिक नगरी में 21 कुण्डीय महायज्ञ में उपस्थित होकर परम आनन्द की अनुभुति अनुभव हो रही है उन्होने कहा कि वायु की अनुकूल स्थिति बनाए रखना मानव का कर्तव्य है। अन्यथा इनकी प्रतिकूलता सबको नष्ट करने में सक्षम है प्रथम यज्ञ और द्वितीय औषधि वनस्पतियों का रोपण। वायुमण्डल में व्याप्त जहरीली गैसों के शुद्धीकरण हेतु यज्ञ का प्रावधान है जो वैदिक जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य कहा जाता है यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष से आज सम्पूर्ण विश्व को परिचित होना आवश्यक है। वायु की शुद्धता के लिए सुगन्धित द्रव्यों की हविषा से यज्ञ किया जाना चाहिए, जिससे वायु के शुद्ध स्वरूप की रक्षा की जा सके।ं यज्ञ को समस्त संसार की नाभि बताया है। जिस प्रकार शरीर में नाभि का महत्त्वपूर्ण स्थान है उसी प्रकार संसार में यज्ञ का स्थान है। विश्व में यज्ञीय हवि को फैलाने का कार्य वायु उसी प्रकार करता है जैसे-शरीर में धातुओं को फैलाने का कार्य नस-नाडियां तथा हृदय आदि करते हैं।
 मीडिया प्रभारी पं. लोकेश शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर यज्ञ के मुख्य यजमान पार्षद सूरजमल रोज, शमशेर नरवाल, राजेश लुम्बा (टीनू),  एडवोकेट नरेन्द्र कौशिक, बिजेन्द्र ब्रहमचारी, सतीश प्रकाश शर्मा पहरावर, रणधीर भारद्वाज, जेपी गौड़, डॉ कपिल कौशिक, मनोज वशिष्ठ कपिल दूहन, पं. विजय कुमार वृजवासी, नवनीत अत्री प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजयुमो हरियाणा पं. लोकेश शर्मा, रमेश वत्स, आचार्य दीनदयाल शर्मा,  आचार्य श्रीराम शर्मा, पं. ओमप्रकाश शर्मा वृन्दावन, पं. गौरव कुमार शर्मा, मोनिका भटनागर, प्रदीप भटनागर, नरेश गौड़,, आदि गणमान्य व्यक्तियों ने यज्ञ में सहयोग किया।