रोहतक, 4 नवम्बर। एनसीआईएसएम बिल की वजह से आईएसएम डॉक्टरों में फैले डर को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ठोस कदम उठाये। दरअसल बीएएमएस कोर्स शुरू करने का उद्देश्य बड़ा ही साफ था कि आधुनिक और भारत की पांच हजार वर्ष पुरानी चिकितसा पद्धति को समायोजित करके ईलाज करना। लेकिन केंद्र सरकार आयुर्वेदिक डॉक्टरों पर पाबंदियां लगाकर बड़ा षड्यंत्र रच रही हैं। यह बात आज डॉ. संजय जाखड़ ने शहर के गणमान्य डॉक्टरों का दौरा करने के उपरांत कही। 

डॉ. संजय जाखड़ ने कहा कि जो मरीज एलोपैथी दवाईयों से ठीक नहीं होते उन्हें आयुर्वेदिक दवाइयों से ठीक करने की कोशिश की जाती है। इससे आयुर्वेद को तो बढ़ावा मिलता ही है साथ में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेद स्थापित होता है। इसी सोच के मद्देनजर रखते हुए ही इस कोर्स की शुरूआत की गई थी। आयुर्वेद के पतन का सबसे बड़ा कारण पिछली सरकारों द्वारा दोयम दर्जे का व्यवहार करना और एलोपैथी को बढ़ावा देना रहा है। सरकार ने आयुर्वेद के लिए बजट भी ना के बराबर ही दिया। जिसका नतीजा यह निकला कि आज आयुर्वेद का पतन हो गया। ना अच्छे संस्थान हैं तथा ना ही अच्छी फैकल्टी। जिसका नतीजा पढ़ाई जीरो हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इंटेग्रेटिेड प्रैक्टिस करने वालों को परेशान ना किया जाए अपितु आने वाले बिल के माध्मय से शैक्षणिक स्तर, रिसर्च वर्क को सुधारते हुए आयुर्वेद को फर्श से अर्श तक पहुंचाने की सार्थक पहल सरकार को करनी चाहिये। इसके अलावा आयुर्वेद और एलोपैथी को राजनीति की भेंट चढऩे से बचाया जाये।
डॉ. संजय जाखड़ ने कहा कि 6 नवम्बर को दिल्ली चलो अभियान में रोहतक से हजारों की संख्या में डॉक्टर दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले एनसीआईएसएम बिल का शांतिपूर्वक ढंग से विरोध प्रदर्शन करेंगे। अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो इस दिशा में एक बड़ा आंदोलन चलाया जायेगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।