चंडीगढ़,04.11.17- :आयुर्वेद विश्व की सबसे पुरातन चिकित्सा पद्धति बहुत तेजी से और सफलतापूर्वक पश्चमी दुनिया में अपनी पहचान बना रही है । जहाँ पर लोग दूसरी प्रणालियों से निराश होकर शरीर, मन और आत्मा के एक सम्पूर्ण संतुलन के लिए और इस तरह के एक स्वस्थ, सुखी और शांतिपूर्ण जीवन के लिए इस प्रणाली को बड़े विश्वास के साथ अपना रहे हैं ।

इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे है । इस विषय में कई कदम भारत सरकार द्वारा भी उठाये जा रहे हैं । इनमें से एक गत दिवस 21 और 22  अक्टूबर को आयुर्वेद महाविद्यालय लंदन की तरफ से आयुर्वेद और एकीकृत चिकत्सा हेतु स्वस्थ्य अंतराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था । न केवल भारत के लिए बल्कि सम्पूर्ण आयुर्वेदिक बिरादरी के लिए गर्व और सम्मान की बात है की एन डी केयर निरोगम प्रा . लि. अमृतसर के विश्विख्यात आयुर्वेदिक डा. नवदीप शर्मा ने मिडलसेक्स यूनिवर्स्टी के निमंत्रण पर इस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया । इस सम्मेलन का मुख्य विषय आयुर्वेद के द्वारा मानसिक स्वस्थ्य और बुजुर्ग देखभाल था ।

 एन डी केयर निरोगम प्रा . लि. एक विश्व स्तर पर प्रशिद हेल्थकेयर सेंटर है, जो वर्षों से अधिक समय तक नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर समग्र पारम्परिक आयुर्वेद उपचार प्रदान क्र रहा है और विश्व स्तर पर इसके केंद्र सफलता से चल रहे है ।

पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए डा.नवदीप शर्मा ने बताया की इस सेमिनार में उन्होंने रोल ऑफ़ आयुर्वेदिक हर्ब्स इन साईक्लोजिकल बीमारी जो की डिप्रेसन का कारण है पर प्रस्तुति दी । उन्होंने वैकल्पिक चिकित्सा और स्वस्थ्य देखभाल में भारत की विशेषता के बारे में बात करते हुए कहा कि जीवन विज्ञानं और आयुर्वेद का एक समग्र है  । उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र में आने वाले वर्षों में बुजुर्गों में आम लोगों की अपेक्षा निराशा (डिप्रेससन) बीमारी बढ़ने कि सम्भावना है ।