चंडीगढ़, १७ नवम्बर..... नैशनल शेड्यूल्ड कास्ट एलाइंस (एनएससीए) ने श्री नरिन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली केन्द्र सरकार के पास मांंग की कि वह वर्तमान में एससी वर्ग की हालत को ध्यान में रखते फौरी तौर पर आमदन कर सलैब में बढोतरी करे।
नैशनल शेड्यूल्ड कास्ट एलाइंस के अध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने जारी किए ब्यान में केन्द्र सरकार से मांग की है कि एससी वर्ग के लिए इनकम टैक्स सलैब जो वर्तमान में २.५ लाख रूपए वार्षिक है उनसे बढ़ाकर ६ लाख रूपए वार्षिक की जाए। उन्होंने कहा कि सभी जरूरती वस्तुओं की कीमतें असमान छुह रही है एवं लोगों के लिए घर चलाना भी बहुत मुश्किल हो चुका है। पोस्टमैट्रिक स्कालरशिप के लाभ से लाखों विद्यार्थी वंचित रह जाते है ता जो उन विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सरकार द्वारा माली सहायता मिल सके।
इस संबंध में रणनीति तैयार करने संबंधी बातचीत करते हुए कैंथ ने आगे मांग की कि इस सलैबों की कीमत सूचक अंक के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि अनुसूचित जाति के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण अनुसूचित जाति के लोगों को गरीबी रेखा की ओर धकेला जा रहा है इस लिए केन्द्र सरकार का यह सिधांतक फर्ज है कि वह इनकम टैक्स सलैब में बढोतरी कर इन लोगों की मद्द करे।
कैंथ ने कहा सरकार ने हाल ही में अन्य पिछड़ी श्रेणीयों की क्रीमी लेयर को ६  लाख रूपए से 
८ लाख रूपए कर दिया है ता कि राखवेकरण का लाभ सब को एक समान रूप में दिया जाए। अनुसूचित जाति भाईचारा अपनी आमदन कर सलैब में बढोतरी का हक रखता है। नोटबंदी एवं इस लिए पैदा हुई आर्थिक समस्याओं के लगभग एक वर्ष वाद  सरकार को आमदन कर अदायगी बढाने के लिए राह स्तरीय करना चाहिए ता कि लोगों के हाथों में अधिक पैसा आए।
वस्तु एवं सेवाए कर (जीएसटी) कारपोरेट घराणों के लिए लाभकारी रहा जो इन स्यासी दलों को लाखों-करोड़ो रूपए फंड देते है। ऐसी हालत में आम आदमी को लाभ मिलने में अभी समय लगेगा  एवं अनुसूचित जाति भाईचारा बहुत घट आमदन से मुश्किल समय का सामना कर रहा है। उस के कांधों पर पहले ही बहुत बोझ है एवं उसने समााजिक तौर पर कई औकातों एवं गैर बरादरी का सामना करना पड़ रहा है।
कैंथ ने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति भाईचारे के प्रति अधिक हमदर्दी दिखाए। उन्होंने स्यासी ताकतों के बढ रहे दूरपयोग एवं अनुसूचित वर्ग विरूध स्यासीक्रित नौकरशाही प्रति सरकार को चेतावनी दी है। कानून व्यवस्था की माडी हालत से दुख प्रगट करते कैंथ ने वर्तमान हालत को भारत वर्ग विकासशील देश लिए माड़ा बताया है।
कैंथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरिन्द्र मोदी एवं नीति आयोग अनुसूचित वर्ग की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। हाल ही में अनुसूचित जाति के लिए बजट में कटौती दर्शाते है कि नीति आयोग की नजर में इनका महत्व कितना कम है।