मानव संसाधन विकास केन्द्र के निदेशक प्रो. नीरज दिलबागी ने कहा कि शोधार्थी वैज्ञानिक लेखन कौशल में पारंगत हो तथा भारतीय शोध को सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित करें।

 हिसार-23 नवंबर, 2017-गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के मानव संसाधन विकास केन्द्र के निदेशक प्रो. नीरज दिलबागी ने कहा कि शोधार्थी वैज्ञानिक लेखन कौशल में पारंगत हो तथा भारतीय शोध को सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित करें। 

प्रो. नीरज दिलबागी मानव संसाधन विकास केन्द्र में ‘वैज्ञानिक लेखन कौशल’ विषय पर शुरू हुई लघु अवधि कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. वन्दना पूनिया ने की। प्रो. नीरज दिलबागी ने कहा कि लेखन कहा में पारंगत होना शिक्षकों के लिए अति आवश्यक है। नए ज्ञान का सृजन लेखन कला द्वारा ही हो सकता हे। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला मानव संसाधन विकास केन्द्र के तत्वाधान में राष्ट्रीय उच्चतर शिखा अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ: के रूप में बैंगलोर के डा. के.पी. मधु व डा. गीता मधु भाग ले रहे हैं। विषय विशेषज्ञ: करंट साईंस रिसर्च नाम पब्लिकेशन हाउस से जुड़े हुए है, जोकि विज्ञान शोध के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। मानव संसाधन विकास केन्द्र की प्रो. वन्दना पूनिया ने स्वागत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह तक चलने वाली लघु कार्यशाला में देश के विभिन्न भागों से आए 30 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों में लेखन कला कौशल का निर्माण करना है। इस प्रयास से शोधार्थियों को शोध क्षमता में वृद्धि होगी तथा श्रेष्ठ शोध का सृजन होगा। कार्यशाला के को-कोर्डिनेटर प्रो. भास्कर है। मानव संसाधन विकास केन्द्र के डा. अनुराग सांगवान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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आईआरडीई, देहरादून के निदेशक बेंजामिन लियोनेल ने कहा है कि ऑप्टिकल तकनीक के कारण दुनिया में बड़े तेजी से बदलाव हो रहे हैं। 

हिसार-23 नवंबर, 2017-आईआरडीई, देहरादून के निदेशक बेंजामिन लियोनेल ने कहा है कि ऑप्टिकल तकनीक के कारण दुनिया में बड़े तेजी से बदलाव हो रहे हैं।  खासकर युद्ध तकनीक कौशल विकसित करने में ऑप्टिकल तकनीक बड़ी भूमिका निभा रही है।  आप्टिकल तकनीक में शोध की अपार संभावनाएं हैं।  बेंजमिन लियोनेल गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के भौतिकी विभाग के सौजन्य से ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से ‘एडवांसिज इन ऑप्टिक्स एंड फोटोनिक्स’ विषय पर शुरू हुए चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्यातिथि सम्बोधित कर रहे थे।  एनआईटी कुरूक्षेत्र केडा. सतीश कुमार बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।  समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर भी उपस्थित रहे।  इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

 

आईआरडीई, देहरादून के निदेशक बेंजामिन लियोनेल ने कहा कि आप्टिकल तकनीक के कारण मानव जीवन में तेजी से बदलाव आ रहे हैं।  संभव है आने वाले समय में मनुष्य केवल अपने साथ एक चिप लेकर चले।  बाकी कुछ उसे लेकर चलने की जरूरत ही न हो।  उन्होंने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि किस प्रकार ऑप्टिल तकनीक का युद्ध के मैदान में प्रयोग हो रहा है।  उन्होंने युद्ध टैंकों मिजाइलों व सीमा सुरक्षाओं में प्रयोग हो रही आप्टिकल तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह तकनीक काफी उन्नत हो गई है, लेकिन इसको और अधिक उन्नत करने की जरूरत है।  उन्होंने उन क्षेत्रों का जिक्र भी किया जिन क्षेत्रों में इस तकनीक को उन्नत किया जा सकता है।  

 

कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि ऑप्टिकल तकनीक का प्रयोग मानव की भलाई में किया जाना चाहिए।  युद्ध अब इतिहास बन जाने चाहिए, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।  आदमी अब तेजी से चीजों को ग्रहण करना चाहता है।  आधुनिक तकनीक इस दिशा में कारगर सिद्ध हो सकती है।  वैज्ञानिकों को इस दिशा में भी काम करना चाहिए कि जानवरों को प्रकृति ने ऐसी कौन सी शक्ति प्रदान की जिसके कारण जानवर गंद से ही बहुत कुछ जान लेते हैं।  उपकरण बनाने में भी जानवरों की सूंघने की शक्ति का अध्ययन उपयोगी सिद्ध हो सकता है।  उन्होंने कहा कि ऑप्टिकल तकनीक को अन्य विज्ञानों की तकनीकों के साथ जोड़कर उपयोग में लाया जाना चाहिए।  इसके और बेहतर परिणाम होंगे।

 

कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि एनआईटी कुरूक्षेत्र केडा. सतीश कुमार ने कहा कि ऑप्टिकल तकनीक का प्रयोग स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रयोग होना चाहिए।  उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि अगर वे नेक इरादा रखते हैं तो शोध के लिए संसाधन समस्या नहीं हैं।  संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए देश व दुनिया में बहुत सारी संस्थाएं उपलब्ध हैं। ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डा. ए.के. गुप्ता ने ओएसआई की दृष्टि और गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उनको बढ़ावा देने की बात कही। सम्मेलन के संयोजक प्रो. देवेन्द्र मोहन ने स्वागत सम्बोधन किया।  सम्मेलन में इजराईल के जीव जलेवस्काई, यूएसए के ए. लखटकिया, यूकेके डेनियल फेसियो व स्पेन के पाबलो अरटल जैसे प्रसिद्ध शिक्षाविद विभिन्न तकनीकी सत्रों को सम्बोधित करेंगे।  यूएसए के प्रो. विरेन्द्रा महाजन व पदमश्री प्रो. आर.एस. सिरोही द्वारा दो विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि ओएसआई सम्मेलनों और संगोष्ठियों के बीच सम्मेलनों की श्रृंखला में यह 41वां सम्मेलन है।  सम्मेलन का उद्देश्य विद्यार्थियों व शोधार्थियों को ऑप्टिक्स व फोटोनिक्स के क्षेत्र में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों व शिक्षाविदों केसाथ बातचीत का अवसर प्रदान करना है।  सम्मेलन में भाग लेने केलिए विश्व के विभिन्न भागों से 400 से अधिक शोधपत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 270 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।  सम्मेलन केतकनीकी कार्यक्रम में दुनिया भर के प्रसिद्ध शोधकर्ताओं द्वारा विशेष एवं आमंत्रित व्याख्यान शामिल किए गए हैं।

 

प्रो. देवेंद्र मोहन बताया कि सम्मेलन के तकनीकी कार्यक्रम में 13 तकनीकी सत्रों तथा 4 व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन केतकनीकी अध्यक्ष प्रो. केहर सिंह के नेतृत्व में  कार्यक्रम को तैयार किया गया है।  सम्मेलन में चलने वाले 13 तकनीकी सत्र सेमिनार हॉल नंबर 1, 2 और 3 में तीन समानांतर चल रहे हैं।  इनमें 32 आमंत्रित व्याख्यान व 90 से ज्यादा मौखिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।  इनमें से 170 पोस्टर प्रस्तुतिओं के लिए तीन पोस्टर सत्र निर्धारित किए गए हैं।  धन्यवाद प्रस्ताव ओएसआई के सचिव प्रो. कलोल भट्टाचार्य ने प्रस्तुत किया।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर, प्रो. कुलदीप बंसल, प्रो. सुजाता सांघी सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे।

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कम्प्यूटर साईंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र पंकज अग्रवाल का विप्रो सॉफ्टवेयर कम्पनी में चयन हुआ है।

हिसार-23 नवम्बर, 2017 : गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कम्प्यूटर साईंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र पंकज अग्रवाल का विप्रो सॉफ्टवेयर कम्पनी में चयन हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व कुलसचिव डा. अनिल कुमार पुंडीर ने छात्र पंकज अग्रवाल को बधाई दी व उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

यह जानकारी देते हुए ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभाग के निदेशक प्रताप सिंह मलिक ने बताया कि विप्रो सॉफ्टवेयर कम्पनी द्वारा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र के यूआईईटी में पूल कैम्पस ड्राइव का आयोजन किया गया, जिसमें गुजविप्रौवि के कम्प्यूटर साईंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रथम श्रेणी के 69 विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि कम्पनी द्वारा तकनीकी एवं मानव संसाधन साक्षात्कार के बाद वर्बल, एनालिटिकल, कोडिंग, लिखित संचार कौशल के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन टेस्ट परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा उपरान्त कम्प्यूटर साईंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक चतुर्थ वर्ष के छात्र पंकज अग्रवाल को चुना गया। ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभाग के सहायक निदेशक आदित्यवीर सिंह ने बताया कि पंकज अग्रवाल जून 2018 में जीईटी (स्नातक अभियंता प्रशिक्षु) के पद पर 3.2 लाख प्रतिवर्ष पैकेज के साथ कम्पनी में शामिल होंगे। सैल के निदेशक ने सीईएसई, ईसीई और एमई विभागों के साथ छात्रों को ड्राइव में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डा. अंकुर व डा. मोहित का धन्यवाद किया।