मोहाली, 03 फरवरी -कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बिमारी को डिटेक्ट करने और इसकी रोकथाम करने के अलावा इस घातक बिमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने हेतु हर वर्ष अंतराष्ट्रीय स्तर पर 4 फरवरी को वल्र्ड कैंसर- डे के रुप में मनाया जाता है। इस संबंधी कैंसर स्पेशलिस्ट एवं मैडिकल ऑकोलोजिस्ट डॉ. संदीप कुक्कड़ ने आज मोहाली प्रैस क्लब में की प्रैस कॉन्फ्रैंस के दौरान बताया कि वल्र्ड कैंसर-डे की स्थापना यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यू्.आई.सी.सी) के द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों को कैंसर के प्रति जागरुक करना है और इस बात से अवगत करवाना है कि इसका ईलाज कैसे संभव है। डॉ. संदीप ने बताया कि वर्ष 2010 में कैंसर से पीडि़त नए केसों की संख्या 9 लाख थी , उनके आधार से संभावना जताई जा रही है कि 2020 तक इनकी संख्या 17 लाख 30 हजार हो सकती है।
डॉ. संदीप ने बताया कि कैंसर की बीमारी महामारी के रुप में बढ़ रही है क्योंकि सिर्फ दस साल में कैंसर से पीडि़त नए कैंसर केसों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके पीछे जो कारण है वह हैं हमारी लाइफ स्टाइल से जुड़े महत्वपूर्ण कारण जैसे कि पीजा बर्गर की संस्कृति, बैठे-बैठे अपनी जगह पर काम करना , डायबिटीज, ओबेसिटी ऐसे कारण है जिनसे कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समाज या सोसायटी में तंबाकु, स्मोकिंग व अल्कोहल इत्यादि के सेवन से भी कैंसर के केसों की संख्या काफी बढ़ी है। इसके अलावा कुछेक ऐसे कारण जैसे कि एनवॉयरमेंट में पॉल्यूशन का होना , खाने –पीने में कैमिकल की मिलावट के कारण भी कैंसर के केसिस में काफी इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हमें कैंसर के लक्ष्णों के बारे में जानना बहुत जरुरी है जिस से कैंसर की बीमारी का शुरुआती स्टेज में पता चल सके जब इसका कंपलीट उपचार संभव हो। उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्तन में गांठ का होना, गले में गांठ का होना, लंबे समय से खांसी का होना जो ईलाज के बावजूद ठीक ना हो रही हो , 10 प्रतिशत से ज्यादा अगर 6 महीने में किसी का वजन घट गया ऐसे में हम अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसे व्यक्ति को कैंसर हो सकता है। उन्होंने बताया कि अगर कैंसर की बीमारी लंबे समय के बाद लेट स्टेज में पता चलती है तो उस समय ट्रीटमेंट का खर्चा डेढ से दो गुणा बढ़ जाता है और ठीक होने की संभावना भी घट जाती है। यहां यह बताना भी जरुरी है कि भारत में मात्र 12 प्रतिशत केस ही शुरुआती स्टेज में हॉस्पिटल में आते हैं।
कैंसर के स्क्रीनिंग टेस्ट के बारे में जानना जरुरी
डॉ. संदीप ने बताया कि स्क्रीनिंग टैस्ट का मतलब है कि कुछ ऐसे ब्लड टेस्ट या एक्स-रे करवाना जिससे कैंसर की बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता चल सके। उनमें सबसे प्रमुख है कि अगर कोई स्त्री 50 साल से ऊपर है उसके लिए मैमोग्रॉफी का टेस्ट करवाना अनिवार्य है। मैमोग्रॉफी के टेस्ट से अगर स्तन में कोई छोटी सी भी गांठ है तो उसे शुरुआती स्टेज में ही डॉयग्नोज किया जा सकता है जब इसका पूर्णत: उपचार संभव हो। इसके अलावा ब्लड संबंधी जो टैस्ट है जिन्हें हम अपनी भाषा में टूयूमर मार्कर्स कहते है जिसमें पुरुषों को पीएसए का टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर करवाना चाहिए। इस बीमारी के प्रति जागरुक रहें और अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट करवाए।
कैंसर शब्द में ही कैंसर की रोकथाम का छिपा हुआ है ईलाज-डॉ. संदीप
सी- कट डाउन कैलरीज
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