कुल्लू-08 फरवरी 2018 
भूकंप आते ही बचाव कार्यों में जुट गए अधिकारी
कुल्लू जिला मुख्यालय और सभी उपमंडलों में की गई मैगा माॅक ड्रिल
   राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष निर्देश पर वीरवार को प्रदेश भर में करवाई गई मैगा माॅक ड्रिल के तहत कुल्लू जिला में भी भूकंप से बचाव व राहत कार्यों का व्यापक अभ्यास किया गया। मैगा माॅक ड्रिल के दौरान जिला मुख्यालय के घनी आबादी वाले क्षेत्र सुल्तानपुर के अलावा भुंतर स्थित कुल्लू-मनाली हवाई अड्डे, उपमंडल मुख्यालय मनाली, बंजार और आनी के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी बचाव व राहत कार्यों को अंजाम दिया गया। जिला के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में भी माॅक ड्रिल की गई। मैगा माॅक ड्रिल में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, होमगार्ड, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सीमा सड़क संगठन, एयरपोर्ट अथाॅरिटी, विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र, स्थानीय निकायों, अन्य संस्थानों व संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। इस दौरान थल सेना के कर्नल प्रवीण कुमार, मेजर सतीश और आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट सुनील कुमार ने आॅब्जर्वर के रूप में तमाम गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी। 
   वीरवार सुबह करीब दस बजे भूकंप का सायरन बजने के बाद कुछ मिनटों में ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभी अधिकारी जिला इमरजेंसी आपरेशन सेंटर में एकत्रित हुए। प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं उपायुक्त यूनुस ने उक्त अधिकारियों के साथ संक्षिप्त बैठक की और जिला आपदा प्रबंधन योजना के अनुसार तुरंत बचाव व राहत कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए। इन कार्यों को सुनियोजित ढंग से पूरा करने के लिए ढालपुर मैदान में तुरंत मुख्य कैंप स्थापित किया गया और वहीं से बचाव दलों को भूकंप प्रभावित क्षेत्र सुल्तानपुर और भुंतर हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया। पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्हिोत्री, एडीएम अक्षय सूद, एएसपी निश्चिंत सिंह नेगी, सहायक आयुक्त सन्नी शर्मा, सीएमओ डा. सुशील चंद्र, अन्य विभागों के अधिकारियों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और होमगार्ड के अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी टीमों की कमान संभालते हुए बचाव कार्य आरंभ कर दिए। बचाव कार्यों के दौरान सुल्तानपुर और भुंतर हवाई अडडे से घायलों को निकालकर एंबुलेंस में ढालपुर मैदान स्थित अस्थायी अस्पताल व शिविर में लाया गया।
   इसी तरह मनाली, बंजार और आनी में भी एसडीएम के नेतृत्व में घायलों व शवों को मलबे से निकालने का अभ्यास किया गया। लगभग ढाई घंटे की मैगा माॅक ड्रिल के बाद उपायुक्त ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों व तीनों आॅब्जर्वरों के साथ बैठक करके फीडबैक लिया। इसके बाद उपायुक्त और आॅब्जर्वरों ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से मुख्य सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों को माॅक ड्रिल की रिपोर्ट दी। 
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आपदा के कुशल प्रबंधन को संवेदनशीलता और सजगता जरूरी- जिलाधीश संदीप कुमार
जिला में विभिन्न जगहों पर किया गया मेगा मॉक अभ्यास

धर्मशाला, 8 फरवरी - जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिलाधीश कांगड़ा संदीप कुमार ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आपदा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहने का आग्रह करते हुए आम नागरिकों से भी आपदा प्रबंधन के महत्व को समझने और सुरक्षा को लेकर सजग रहने की अपील की है। उन्होंने आपदा से निपटने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समय समय पर मॉक ड्रिल कराने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
जिलाधीश ने मेगा मॉक अभ्यास पूर्ण होने के उपरांत यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि आज भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने की प्रशासनिक तैयारियों को परखने के लिए राज्य स्तरीय मैगा मॉक अभ्यास आयोजित किया गया और इसी क्रम में कागड़ा जिले में जिला मुख्यालय सहित अन्य जगहों पर यह अभ्यास किया गया। इस दौरान जिले में 10 जगहों पर भूकंप से प्रतीकात्मक नुकसान मानकर मॉक ड्रिल की गई।
 उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भूकंप जैसी किसी आपदा के समय बेहतर प्रबंधन के लिए प्रशासन की तैयारियों एवं क्षमता का आकलन करना और प्रबंधों एवं व्यवस्था में कमियों का पता लगाकर विश्लेषण एवं सुधार करना था। उन्होंने कहा कि प्रशासन अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों को ठीक करेगा, ताकि ऐसी किसी भी स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
संदीप कुमार ने कहा कि अभ्यास के दौरान आपदा से निपटने की तैयारी, चेतावनी, प्रतिक्रिया, बचाव और राहत जैसे आपदा प्रबंधन के सभी चरणों को गंभीरता से पूरा किया गया और इस दौरान सामने आई कमियों को भी नोट किया गया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय एवं सहयोग से आपदा का कुशल प्रबंधन, खोज, राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करने में सफलता मिली।
इसमें सेना की भी मदद ली गई तथा उनकी ओर से इस अभ्यास की निगरानी के लिए एक अधिकारी तैनात किया गया था। सेना के अधिकारी ने अभ्यास के दौरान गतिविधियों को लेकर अपनी आब्जर्वेशन बर्ताइं। 
इन पहलुओं को भी किया रेखांकित
संदीप कुमार ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि वर्तमान में संवेदनशील स्थलों को सुरक्षित बनाया जाए और नए असुरक्षित स्थल पनपने से रोके जाएं। उन्होंने कहा कि जिला में करीब 250 छोटे बड़े पुल हैं, जिनमें से कई संवेदनशील हैं । इन पुलों के सुधार के लिए शीघ्र कार्य किया जाएगा । इसके अलावा भूकंप आने पर पुलों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में मार्ग बहाल करने के लिए लोक निर्माण विभाग के पास 2-3 बैली ब्रिज होना जरूरी है। इसके लिए प्रदेश सरकार के लिए आग्रह किया गया है, ताकि आपदा में यातायात की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। 
इसके अलावा भूकंप के समय संचार व्यवस्था के ठप्प हो जाने के कारण बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।इस संदर्भ में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को यह भी सुझाव दिया गया है कि भूकंप रोधी क्षमता वाले मोबाइल टावर लगवाने के प्रयास किए जाएं जो आपदा में सुरक्षित रहें जिससे संचार व्यवस्था सुचारू रहे। धर्मशाला सहित अन्य बाजारों में दुकानों पर टंगे अव्यवस्थित होर्डिंग एवं छतों पर रखे पानी के टैंक भूकंप जैसी आपदा में और मुशिकल खड़ी कर सकते हैं। इन सभी दिशाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
सायरन बजते ही हरकत में आ गया प्रशासनिक अमला
जिलाधीश ने कहा कि यह अभ्यास एक काल्पनिक घटना को आधार बना कर किया गया। इस घटना के अनुरूप कांगड़ा जिले के विभिन्न भागों में प्रातः लगभग 9 बजे 8 रिक्टर तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केन्द्र मंडी जिले का सुंदरनगर था। जिसे लेकर डीसी ऑफिस से आपातकालीन हुटर बजाया गया। इसे सुनते ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य विभाग तुरंत हरकत में आ गये। स्वयं को सुरक्षित करने के उपरांत आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभी पदाधिकारी तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर जो स्टेजिंग क्षेत्र पुलिस मैदान में निर्धारित था, में एकत्रित हुए। यहां जिलाधीश ने अधिकारियों को घटना के बारे में जानकारी दी और सभी योजना के अनुरूप निर्धारित कार्यों में जुट गए। 
स्टेजिंग क्षेत्र में संबंधित एसडीएम एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी अपने-अपने विभाग से जुड़े संसाधनों सहित एकत्र हो चुके थे। भूकंप के कारण जिले में  करीब 10 स्थलों के प्रभावित होने की सूचना थी । जिनमें धर्मशाला स्थित उपायुक्त कार्यालय भवन, ब्यॉज स्कूल, डिग्री कॉलेज, धौलाधार होटल, चांदमारी गांव, शिक्षा बोर्ड का भवन, टेनिस कोर्ट के समीप के भवन, कांगड़ा मंे एसडीएम कार्यालय भवन और नगरोटा बगवां का पुराना बस अड्डा एवं डिग्री कॉलेज भवन शामिल शामिल थे। मौके पर पहुंच कर घटना स्थलों के लिए बचाव दलों का गठन किया गया और उन्हें वायरलेस सेट प्रदान कर स्थलों के लिए रवाना किया गया। 
इस दौरान प्रत्येक बचाव दल के साथ आपातकालीन वाहन, स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी घटना स्थलों के लिए रवाना की गई। इस दौरान 108 आपातकालीन सेवा का भी सहयोग लिया गया। पुलिस मैदान में चिकित्सा एवं राहत शिविरों की स्थापना की गई, जहां घायलों को लाया गया, वहीं लोगों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था के लिए भी आवश्यक कदम उठाए गए। इस प्रकार सभी विभागों के सहयोग के साथ इस अभ्यास को पूरा किया गया।
जिलाधीश ने कहा कि आगे भी विभिन्न कार्यक्रम आयेजित कर आपदा प्रबंधन को लेकर लोगों को जागरूक करने एवं प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा के प्रयास जारी रहेंगे।

अभ्यास के दौरान पुलिस अधीक्षक संतोष पटियाल, अतिरिक्त उपायुक्त केके सरोच, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी मस्त राम भारद्वाज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी एवं स्वयंसेवी उपस्थित थे। 
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हमीरपुर में  आपदा प्रबंधन पर  मैगा मॉक ड्रिल  सफलतापूर्वक आयोजित
ग्रामीण स्तर पर युवाओं को प्रशिक्षित कर खंड स्तर पर गठित की जाएगी आपदा प्रबंधन कमेटियां:- उपायुक्त 
पुलिस, होम गार्डज  तथा नेहरू युवा केन्द्र के युवाओं की मुस्तैदी से  गंभीर रूप से घायलों को मिला नव जीवन 
स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों तथा पैरा मैडीकल स्टाफ ने गंभीर रूप से घायलों को उपलब्ध करवाई स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं 
हमीरपुर 8 फरवरी। जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हमीरपुर द्वारा आज  स्थानीय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) के प्रांगण में आपदा प्रबंधन को लेकर मैगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया जिसमें जिला के समस्त विभागों ने भाग लिया। उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उददेश्य भविष्य में किसी भी प्रकार की आपदा के बेहतर प्रबंधन तथा उससे होने वाले नुक्सान को कम करना है। उन्होंने कहा कि जिला हमीरपुर भूकंप की दृष्टि से अति संवेदशील क्षेत्र में आता है इसलिए यहां पर आपदाओं के बेहतर प्रबंधन की और भी ज्यादा आवश्यकता है। मॉक ड्रिल का संचालन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के प्रांगण से किया गया।  ग्राउंड में  विभिन्न विभागों द्वारा ऑपरेशन सैक्शन, प्लानिंग सैक्शन, लॉगीस्टिक सैक्शन, स्टेजिंग क्षेत्र, फायनाईसिंग, राहत  व बचाव कैंप, आपातकालीन सेवाएं  , ट्रॉमा सैंटर इत्यादि स्थापित किए गए थे जिसमें गृह रक्षा, पुलिस के जवानों के अतिरिक्त नेहरू युवा केन्द्र के युवाओं  द्वारा  आपदा के दौरान घायल हुए लोगों को तुरंत ट्रॉमा सैंटर में पहुंचाया गया तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के  चिकित्सकों तथा पैरा मैडीकल स्टाफ द्वारा उनका तुरंत  मैडीकल उपचार  किया गया। मैडीकल उपचार के दौरान मामूली घायलों को फर्सट ऐड जबकि गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को ऑक्सीजन, इंजैक्शन , ग्लूकोज तथा अन्य जीवन रक्षक दवाईयां  के साथ अन्य मैडीकल सुविधाएं भी प्रदान की गईं।  
       मॉक ड्रिल के दौरान एचआरटीसी की बसें, आपातकालीन वाहन, टिप्पर, जेसीबी तथा फायर हाईड्रैंटस ने अपनी बेहतर सेवाएं प्रदान की। इस दौरान डीसी आफिस का भवन गिर गया जिसमें फसें लोगों का मुस्तैदी के साथ गृह रक्षा, पुलिस  के जवानों तथा नेहरू युवा केन्द्र के युवाओं  द्वारा ऐबुलैंस के माध्यम से ग्राउंड में स्थापित ट्रामा सैंटर में पहुंचाया गया जहां स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों तथा पैरा मैडीकल स्टाफ ने उन्हें ग्लूकोज ,आक्सीजन लगाकर व दवाईयां तथा तमाम तरह की मैडीकल सुविधाएं प्रदान कीं।   इसके अतिरिक्त वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के भवन , गांधी चौक , आयुर्वेदिक अस्पताल तथा बस स्टैंड में भी आपदा को लेकर लोक निर्माण विभाग तथा वन विभाग द्वारा मुस्तैदी के साथ अपनी जेसीबी तथा टिप्पर भेजे  जिन्होंने भवनों के मलवे तथा सडक़ो पर से मलवे को हटाया  तथा अवरूद्ध रास्तों व सडक़ों पर  गिरे पेड़ों को पेट्रौल से संचालित आरा मशीन  से तुरंत काटकर सडक़ों को एचआरटीसी की बसों तथा  घायलों के बचाव को लेकर  आपातकालीन सेवा में लगे वाहनों के लिए क्लीयर किया।   डीएफएससी विभाग ने रसद  तथा एमसी हमीरपुर ने भी आपदा के दौरान जगह -2 पर चूना डालने के साथ  कूड़ा-कचरा का निष्पादन किया ताकि किसी प्रकार की महामारी न फैले। पुलिस विभाग ने भी जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन को लेकर  गठित कमेटियों के साथ बेहतर तालमेल तथा समन्वय के साथ हर जगाह से सूचनाएं एकत्रित कर वहां पर पुलिस तथा होम गार्ड जवानों को तुरंत वचाव के लिए रवाना किया तथा समय पर मैडीकल स्टाफ तथा आपातकालीन सेवाएं स्टाफ के साथ बेहतर तालमेल से गंभीर रूप से घायलों को बचाने में अहम भूूमिका निभाई।  
      उपायुक्त ने बताया कि किसी भी प्रकार की आपदाओं से बचाव के लिए  जिला में आईआरएस को अपनाया गया है तथा एसओपी  यानी जो लोग  आपदा प्रबंधन   एवं राहत तथा बचाव कार्यों बारे पूर्णतया  प्रशिक्षित हैं उन्हें स्थाई रूप से आपदा प्रबंधन टीम में शामिल किया जाएगा ताकि वह किसी भी आपदा के दौरान आपदा प्रबंधन तथा राहत एवं बचाव कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर युवाओं को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा तथा खंड स्तर पर भी आपदा प्रबंधन कमेटियां बनाई जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की आपदा के दौरान जिला में शहर से लेकर गांव तक बेहतर ढंग से आपदा प्रबंधन को संचालित किया जा सके।  
      उपायुक्त ने कहा कि  लोगों को अपने मकान भूकंपरोधी बनाने चाहिए , ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए तथा भूकंप के दौरान बचाव के लिए कमरे में मजबूत चौकी  अथवा पलंग रखें व  कमरे के चारों कोनों को खाली रखना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त भूकंप आने पर बिजली  के मेन स्विच तथा एलपीजी के सिलैंडर का रेगुलेटर बंद कर देना चाहिए । यदि आप बहुमंजिला ईमारत में हैं तो नीचे उतरने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।  बिजली के सामान को नहीं छूना चाहिए, रोशनी के लिए माचिस की बजाय टॉर्च का प्रयोग करना चाहिए , अफवाहों में विश्वास नहीं करना चाहिए, अफरा-तफरी नहीं मचानी चाहिए , पुन: भूकंप के झटकों के प्रति सचेत रहना चाहिए  तथा सहायता के लिए टोल फ्री फोन नम्बर 1077, 1070,100, 101 एवं 108 नम्बर पर सम्पर्क करना चाहिए ।    
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सोलन में मॉकड्रिल आयोजित
 सोलन-दिनांक 08.02.2018-प्रदेश के सभी जिलों में आज प्रातः 08.50 बजे रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता के भूकम्प के समय पूरी तैयारी के साथ वृहद अभ्यास आयोजित किया गया। सोलन जिले मंे भी यह अभ्यास आयोजित किया गया। यह ‘मॉकड्रिल’ राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण तथा जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के आपसी समन्वय के साथ आयोजित की गई।
प्रातः 09.00 बजे सायरन बजते ही आपदा अभ्यास के लिए सभी दल सोलन के ठोडो मैदान में एकत्र हुए तथा अभ्यास के मुखिया सोलन के उपायुक्त हंसराज शर्मा से दिशा-निर्देश प्राप्त किए। अभ्यास के लिए सोलन शहर के पांच स्थान चिन्हित किए गए, जहां पूरी योजना एवं तैयारी के साथ राहत एवं बचाव कार्य किया गया। अभ्यास का उद्देश्य जहां एक ओर जिला स्तर पर आपदा प्रबन्धन की तैयारियों का जायजा लेना था वहीं कमियों का आकलन कर इन्हें दूर कर भविष्य में किसी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना भी था। 
अभ्यास के लिए ठोडो मैदान में आपदा राहत एवं बचाव केन्द्र स्थापित किया गया था। आयुर्वेदिक अस्पताल रबौन, सुगन्धा अपार्टमेंटस का व्यावसायिक क्षेत्र, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियन्ता का पुरानी कचहरी स्थित कार्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र सोलन तथा जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान सोलन में अभ्यास के तहत राहत एवं बचाव कार्य किया गया। अभ्यास में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी विवेक चन्देल सहित सभी प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी, पुलिस अधीक्षक मोहित चावला एवं अन्य पुलिस अधिकारी तथा कर्मचारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद सोलन, गृह रक्षक, सोलन स्थित डोगरा रैजीमैंट के अधिकारी एवं जवानों सहित विभिन्न विभागों ने अभ्यास में भाग लिया तथा वास्तविक आपदा के लिए तैयारियों को परखा। 
अभ्यास के समाप्त होने के उपरान्त हंसराज शर्मा ने कहा कि यह ‘मॉकड्रिल’ सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न प्राकृतिक तथा मानव निर्मित आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऐसे अभ्यास नियमित अन्तराल पर किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आपदा को रोकना सम्भव नहीं है किन्तु प्रभावी प्रबन्धन एवं नियमित तैयारी के साथ इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने सभी स्तरों पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर बल दिया। इस सम्बन्ध में राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के साथ मामला उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनसहयोग तथा सामुदायिक जागरूकता के साथ आपदा से होने वाले नुक्सान को कम किया जा सकता है।
डोगरा रैजीमैंट के मेजर राहुल ठाकुर ने पर्यवेक्षक के रूप में इस अवसर पर कहा कि अभ्यास के दौरान सभी दलों ने अपने उत्तरदायित्त्व का भलीभांति निर्वहन किया। उन्होंने आपदा के समय जिले की भोगौलिक परिस्थिति एवं क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप योजना बनाने पर बल दिया। उन्होेंने कहा कि आपदा के समय न्यून समय में आपदा प्रभावित क्षेत्र में पंहुचना आवश्यक है। ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक शीघ्र पंहुचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपदा के उपरान्त महामारी फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए यह जरूरी है कि प्रभावित क्षेत्रों में मृत व्यक्तियों का शीघ्र अन्तिम संस्कार सुनिश्चित बनाया जाए। उन्होेंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों इत्यादि में आपदा प्रबन्धन के नियमित प्रशिक्षण पर बल दिया। उन्होंने आवश्यक सेवाओं को शीघ्र सुचारू बनाने के लिए कार्ययोजना बनाने पर भी बल दिया। 
इस अवसर पर भूकम्प एवं अन्य आपदाओं से सम्बन्धित पठनीय सामग्री भी लोगों को उपलब्ध करवाई गई।