सोलन-दिनांक 12.02.2018-मां का दूध शिश्ुा के लिए सर्वोत्तम आहार है तथा जन्म के एक घण्टे के भीतर ही शिश्ुा को स्तनपान करवाना आरम्भ किया जाना चाहिए। यह जानकारी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत चलाए जा रहे प्रचार अभियान के दौरान सोलन जिले के विभिन्न चिकित्सा खण्डों में सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा प्रदान की गई।

कलाकारों ने लोगों को बताया कि महत्वाकांक्षी ‘मां एक संकल्प’ कार्यक्रम के तहत प्रदेेश एवं जिले में लोगों को मां के दूध की उपयोगिता के विषय में समझाया जा रहा है।  मां का दूध शिश्ुा के लिए पूर्ण आहार है तथा जन्म के उपरान्त पहले 6 माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। 
लोगों को बताया गया कि पहले 6 माह में शिशु को पानी भी नहीं दिया जाना चाहिए।  जानकारी दी गई कि मां के दूध में शिशु के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं। 6 माह के उपरान्त शिशु को मां के दूध के साथ-साथ अन्य आहार भी दिया जा सकता है। लोगों को जानकारी दी गई कि शिशु को कम से कम दो वर्ष तक मां को दूध दिया जाना चाहिए।
कलाकारों ने लोगों को अवगत करवाया कि स्तनपान विकल्प नहीं अपितु संकल्प है।  मां का दूध  नवजात को अनेक रोगों से बचाकर मृत्यु दर में 20 प्रतिशत की कमी करने में सहायक सिद्ध हुआ है।  मां के दूध से पांच वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों की मृत्यु दर में 13 प्रतिशत की कमी आई है। लोगों को बताया गया कि स्तनपान करने वाले शिशुओं में अतिसार होने की सम्भावनाएं अन्य शिशुओं की अपेक्षा 11 गुणा कम होती हैं। मां के दूध का सेवन करने वाले शिशुओं को न्यूमोनिया होने की सम्भावनाएं 15 गुणा कम होती हैं। अतिसार तथा न्यूमोनिया शिशुओं की मृत्यु के सबसे बड़े कारक हैं। 
लोगों को बताया गया कि स्तनपान करवाने वाली माता को भी कैंसर से बचाव में सहायता मिलती है।
कलाकारों द्वारा लोगों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना जैसे कार्यक्रमों के साथ-साथ पीलिया, जलजनित रोगों तथा कैंसर से बचाव की जानकारी भी प्रदान की।
सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के अक्षिता कला नाट्य कला मंच कण्डाघाट द्वारा सायरी चिकित्सा खण्ड के विभिन्न गांवांे पूजा कला मंच बाड़ीधार, अर्की द्वारा नालागढ़ चिकित्सा खण्ड के तहत आने वाले क्षेत्रों, हिम सांस्कृतिक कला मंच टूटीकण्डी द्वारा चण्डी चिकित्सा खण्ड के ग्रामों एवं साधना कला मंच राजगढ़ द्वारा चिकित्सा खण्ड धर्मपुर के गांवों में लोगों को जानकारी प्रदान की गई।
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