कलाकारों ने गीतों व नाटकों से बताया शुद्ध जल का महत्च
              धर्मशाला, 12 फरवरी: जल ही जीवन है। जल क्योंकि हमारे अस्तित्व के लिए अत्यावश्यक है इसलिए इसका शुद्ध, साफ तथा स्वच्छ होना हमारी सेहत के लिए जरूरी है। यह जानकारी सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कला जत्थों ने आज कांगड़ा जिला के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में दी। 
गौरतलब है कि यह अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के संयुक्त तत्वाधान में चलाया जा रहा है।
कलाकारों ने गीतों और नाटकों के जरिये लोगों को जननी शिशु सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, परिवार नियोजन, मां एक संकल्प, व्यापक गर्भपात देखभाल, कॉल सेंटर 104 तथा दूषित से होने वाले पानी रोगों से सुरक्षा उपायों के बारे जानकारी दी। 
कलाकारों ने गीत-संगीत तथा नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से बताया कि रोगाणुओं, हानिकारक अशुद्धियों और अनावश्यक मात्रा में लवणों से युक्त दूषित जल अनेक बीमारियों को जन्म देता है। दूषित जल के सेवन से टाइफाईड, डायरिया, बुखार, हैजा, हैपेटाईटिस, पीलिया आदि बीमारियां होने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। 
 कलाकारों ने लोगों से जल स्त्रोतों को साफ-सुथरा रखने में सहयोग करने तथा अपने आस-पास के परिवेश में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से अपने घरों में पानी की टंकियों की समय-समय पर सफाई करने और अस्वच्छ पेयजल एवं खाद्य् पदार्थों के सेवन से बचने का आग्रह किया।
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108 ने पार किया एक मिलियन मेडिकल इमरजेंसी का मैजिक नम्बर
      लोगों के जीवन के लिए वरदान साबित हुई है 108 नेशनल एंबुलेंस सेवा
 
धर्मशाला, 12 फरवरी:, जीवीके आपातकालीन प्रबन्धन अनुसंधान संस्थान(ईएमआरआइ) के स्टेट हैड  मेहलू सुकुमारन ने जानकारी देते हुए बताया कि 108 नेशनल एंबुलेंस सर्विस ने एक मिलियन मेडिकल इमरजेंसी का मैजिक नम्बर हासिल कर लिया है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 108 एंबुलेंस यहां के लोगों के जीवन के लिए वरदान साबित हुई है। इस सर्विस ने हर घंटे एक जिन्दगी का बचाव किया है। 
    गौरतलब है कि प्रत्येक नागरिक को जीवन रक्षा का अधिकार प्रदान करने के व्यापक मिशन में शामिल होकर अग्रणी रहने वाली जीवीके ईएमआरआई ने हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी की शुरूआत हिमाचल प्रदेश में 25 दिसम्बर, 2010 को की थी। 
    उन्होंने बताया कि प्रदेश में 7 फरवरी, 2018 तक 108 ईआरसी(आपातकालीन प्रबंधन केन्द्र)में सफल 10 लाख ईमरजेंसी केस प्राप्त कर एक मील का पत्थर स्थापित किया है। प्रदेश में 198 एंबुलेंसों के साथ 108 नेशनल एंबुलेंस सर्विस ने गत 7 साल 1 महीने के दरमियान कुल 10,29,520 आपातकालीन मामलों को प्रतिसाद दिया है, जिनमें 10,00,031 चिकित्सा संबंधी मामले, 23,681 पुलिस सम्बन्धी मामले, एवं 5,808 अग्नि संबन्धित मामलों का सफलतापूर्वक निवारण कर प्रदेश की जनता को राहत पहुंचाई है। यह सेवा गर्भवती महिलाओं के लिए एक वरदान सिद्ध हुई है। 25 सिम्बर, 2010 से अब तक 2,03,958 गर्भ सम्बन्धी केस 108 ईआरसी में दर्ज हुए हैं। इस कार्यकाल के दौरान 108 में कार्यरत कुशल इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशयनों ने 8,919(जनवरी, 2018 तक) से अधिक सफल प्रसव करवाएं हैं और स्वास्थय संबन्धी मामलों में सैंकड़ो ऐसे केस थे, जिनमें जान बचने के कोई आसार नहीं थे, लेकिन समय पर एंबुलेंस सेवा व सहायता के लिए समर्पित दक्ष तथा निपुण कर्मचारियों द्वारा 77,357(जून, 2017तक)हिमाचलवासियांे को अनमोल जीवन का तोहफा दिया गया।
    उन्होंने बताया कि 108 पर की गई कोई भी कॉल जान बचाने जैसी आपातकालीन कॉल के रूप में ली जाती है। सोलन स्थित आपातकालीन प्रबंधन केन्द्र में प्रतिदिन औसतन 2573 कॉल्ज दर्ज की जाती हैं, जिनमें से 99.13 प्रतिशत कॉल का तत्क्षण उत्तर दिया जाता है। एंबुलेंस भेजने की इस प्रक्रिया में कोई त्रुटि न रह जाए यह सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन केन्द्र में कार्यरत आपातकालीन प्रतिक्रिया अधिकारी तथ्यों को एकत्रित करता है और उसे समझकर नजदीकी एंबुलेंस को घटनास्थल पर भेजता है। यह प्रक्रिया 89 सेंकड़ में पूर्ण कर ली जाती है। हर एंबुलेंस एक जीपीएस यंत्र से लैस होती है, जिसके परिणामस्वरूप ईआरओ नजदीकी वाहन को गूगलमैप में देखकर नजदीकी एंबुलेंस को जल्द से जल्द घटनास्थल पर भेजता है। दुर्गम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में ऐसी सेवाएं प्रदान करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है। यह सेवा शहरी इलाकों में औसतन 12 मिनट व 10 सेकंड और ग्राामीण इलाकों में 35 मिनट व 8 सेकंड के भीतर पहुंचकर जरूरी उपचार देकर विश्व में स्थापित गोल्डन अवर के कनसेपट को पूर्ण करने में सफल रही है।
     उन्होंने बताया कि नेशनल एंबुलेंस सेवा ने प्रदेश में एक मिलियन मेडिकल इमरजेसी का मैजिक नम्बर पार कर लिया है। हर 30 सेकंड में एक कॉल का जवाब, हर चौथे मिनट में एक एंबुलेंस डिस्पैच, हर चौथे मिनट में एक आपातकालीन मामला दर्ज व हर घंटे आपात में फंसी एक जिन्दगी का बचाव किया है।
     इस अवसर पर स्टेट हैड, जीवीके ईएमआरआइ हिमाचल प्रदेश मेहूल सुकुमारन ने समस्त जीवीके टीम को बधाई दी व हिमाचल प्रदेश सरकार एवं एनएचएम का निरंतर सहयोग प्रदान करने का आभार प्रकट किया। 
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