चंडीगढ़,17.02.18-  केंद्रीय आर्य सभा के तत्वाधान में आर्य समाज सेक्टर ७ बी में महर्षि दयानंद सरस्वती जी का जन्मोत्सव धूमधाम से सम्पन हो गया है।  कार्यक्रम के दौरान वैदिक विद्वान आरसी जीवन ने कहा कि महर्षि दयानंद  सरस्वती ने ईश्वर के सत्य स्वरूप को स्थापित किया।  उन्होंने जड़ पूजा का विरोध किया क्योंकि जड़ता के कारण ही आज महापुरुषों को भी बांध दिया गया है।  ईश्वर का सही स्वरूप ना समझ पाने के कारण समाज में कई तरह की बुराइयां पनप रही है।  गीता में कर्म  की बात कही गई है ऐसे में गंगा में नहा कर  या अन्य धार्मिक स्थानों में भ्रमण करके पाप कम होने की बात करना कितनी बड़ी विडंबना है।  दया धर्म का मूल है। मनुष्य इसे भूल कर पशुओं की बलि दे रहा है। विक्रम विवेकी ने कहा कि ईश्वर का चिंतन करना चाहिए। इसमें का चिंतन करने से आनंद की अनुभूति  होती हैं क्योंकि आत्मा का संबंध परमात्मा से होता है। आनंद की प्राप्ति के लिए ईश्वर से  जुड़ना अति आवश्यक है। 
स्वामी विदेह योगी ने कहा कि लोगों ने महर्षि दयानंद को अलग - अलग दृष्टि से देखा है। उन्हें पूर्णतया  जानने और समझने का प्रयास नहीं किया।  महर्षि दयानंद मूलतः वैज्ञानिक हैं वह आध्यात्मिक और भौतिक वैज्ञानिक हैं।  महर्षि दयानंद ने 1976 में ऋग्वेदादिभाष्य में विमान बनाने की पूरी विधि लिखी थी।   यही नहीं यहां तक की उन्होंने सूचना तंत्र विद्या अर्थात मोबाइल आदि की चर्चा की है। उन्होंने सिर्फ विद्या का प्रतिपादन किया।  वेदों में विकासवाद की चर्चा हैै।  उन्होंने गंभीर विषयों पर सूत्र दिए परंतु उस पर अभी तक शोध नहीं किया जा सका।  अध्यात्म हमारे जीवन का आधार हैं।  वह शांति और समृद्धि का है।  आत्मा को लक्षित करके जो काम किया जाता है उसे अध्यात्म कहते हैं।  संकल्प से जुड़ने से ही  अध्यात्म हो सकते हैं।  महर्षि दयानंद सरस्वती मनोवैज्ञानिक विधि हैं।  क्योंकि उन्होंने  मन पर भी प्रभाव  डाला था।  वह हमेशा सत्य की पताका लेकर चले। 
संगीतज्ञ पंडित उपेंद्र आर्य  ने मधुर भजन पेश करके उपस्थित लोगों को आत्मविभोर कर दिया।  
बढिय़ा झांकिया प्रस्तुत करने वाले शिक्षण संस्थाओं को पुरस्कृत भी किया गया। सचिव प्रकाशचंद्र शर्मा ने  वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। कार्यक्रम के समापन पर प्रधान रविंदर तलवाड़  ने अतिथियों तथा उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया।
      इस मौके पर जस्टिस ए एल बाहरी, बी आर गुप्ता, धर्मवीर बत्रा,  डॉ0  विनोद कुमार, आनंदशील,जया भारद्वाज, रोजी शर्मा, विभा रे, आदि मौजूद थे।