चंडीगढ, 15 नवम्बरः इनेलो ने पार्टी सुप्रीमो चैधरी ओमप्रकाष चैटाला के निर्देषों पर प्रष्नचिह्न और टीका-टिप्पणी करने वाले आलोचकों के किंतुओं-परंतुओं पर विराम लगाते हुए आज अजय चैटाला का निश्कासन पत्र जारी किया। पार्टी से निश्कासित कुछ लोगों ने प्रदेषाध्यक्ष अषोक अरोड़ा द्वारा अजय चैटाला के निश्कासन पर सवालिया निषान खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि निश्कासन पत्र पर चैधरी ओमप्रकाष चैटाला के हस्ताक्षर नहीं हैं।
पार्टी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में इनेलो सुप्रीमो के हस्ताक्षरयुक्त निश्कासन पत्र जारी किया है। यह भी कहा गया है कि उस पत्र को तिहाड़ जेल की सुपरिंटेंडेंट द्वारा सत्यापित किया गया है। निश्कासन पत्र में इनेलो सुप्रीमो ने दोहराया है कि उनके लिए पार्टी सर्वोपरि है और उससे कोई भी व्यक्ति बड़ा नहंीं है। चाहे वह उनके परिवार का सदस्य ही क्यों न हो? उन्होंने यह भी लिखा कि इनेलो की नींव इसी सिद्धांत और आदर्षों पर रखी गई थी और इसी का पालन करते हुए पार्टी सक्षम तरीके से प्रदेष के हितों की रक्षा करती आई है लेकिन कुछ समय से हरियाणा राज्य इकाई के प्रधान महासचिव अजय चैटाला की पार्टी विरोधी गतिविधियां पीड़ादायक और असहनीय हो गई हैं।
इनेलो सुप्रीमो ने उनकी गतिविधियों और भाशणों को पार्टी की एकता, अखण्डता और प्रतिश्ठा पर गहरा आघात बताया। उन्होंने पाया कि अजय चैटाला द्वारा अनधिकृत रूप से पार्टी के सभी पदाधिकारियों और नेताओं की असंवैधानिक बैठक बुलाकर एक समानांतर संगठन चलाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पार्टी को कमजोर किया जा सके।
उपरोक्त कारणों का हवाला देते हुए इनेलो सुप्रीमो ने अजय सिंह के खिलाफ अनुषासनात्मक कार्रवाई करते हुए राज्य इकाई के प्रधान महासचिव पद से मुक्त करने के साथ-साथ उनकी पार्टी प्राथमिक सदस्यता के निश्कासन पर भी मोहर लगाई है। इनेलो सुप्रीमो ने पत्र में पार्टी कार्यालय को उनके निर्देषों की पालना तुरंत प्रभाव से करने के आदेष दिए हैं।