चंडीगढ़, (सुनीता शास्त्री)20.07.19- पाककला के इतिहास को लेखिका, लिली स्वर्ण ने अपनी पसन्द के व्यंजनों की खेाजबीन कर अपनी नई किताब ‘हिस्ट्री ऑन माई प्लेट’ में स्वाद और सलीके से पेश किया है।विभिन्न तरह के भोजनगाथा को समेटे हुए इस किताब को आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मनोज परिदा, एडवाइजर, यूटी और विवेक अत्रे, लेखक, पूर्व आईएएस और मोटिवेशनल स्पीकर की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।‘हिस्ट्री ऑन माई प्लेट’ में लिली की भोजन प्रियता को दर्शाया गया है, जिसके तहत उन्होंने ये जानने का प्रयास किया है कि हमारा भोजन ‘कैसे’,’क्यों’ और ‘कहां’’ से आया है और इसकी शुरुआत कहां से हुई और इसका आज का स्वरूप कैसे सामने आया। विभिन्न तरह के व्यंजनों के सामने आने की अलग अलग और दिलचस्पी कहानियां हैं। यह न केवल भोजन, बल्कि इसके इतिहास के स्वाद में मदद करने का एक अद्भुत प्रयास है। खानपान से संबंधित विभिन्न विषयों की उनकी पसंद कॉस्मोपॉलिटन और उदार है जो उनकी स्वयं की जीवनशैली को दर्शाती है। इसके साथ ही किताब के माध्यम से उनके लिखने केअनोखा अंदाज है। कई भाषाओं में कविता, लेखन और कॉलम लिखने वाली लिली ने बताया कि ‘‘यह मेरी जन्मजात जिज्ञासा का परिणाम है जो नोसी पार्कर होने से बहुत दूर नहीं है। प्राचीन गलियों के माध्यम से व्यापक शोध और असंख्य जगहों की पैदल यात्रा ने मुझे इतिहास के लिए इन अध्यायों को लिखने के लिए प्रेरित किया है और काफी अच्छे परिणाम भी मिले हैं।लिली ने बताया कि मैं अपनी मां को भी धन्यवाद करना चाहूंगी, जो हमेशा मेरे जीवन में प्रकाश की किरण रही हैं। मेरी बेटी, आयशा सलूजा, जिसने मेरे साथ काफी दूर तक की यात्राएं की हैं और उस दौरान मैं लगातार भोजन की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए अपने मिशन पर निकली हुई थीं। वहीं, मेरे कर्नल, मेरे पति जो मुझे भारत के विभिन्न हिस्सों के सफर पर लेकर गए और, मेरे दिवंगत बेटे, गोबिंद शाहबाज़ सिंह, जिनकी यादों को संजोए हुए मैंने कुछ चैप्टर इस किताब में शामिल किए हैं। उनहोंने बताया कि उनकी चार किताबे आ चुकी हैं पहली किताब कविता की, द ट्रेल जिप्सी उपन्यास है चौथी यह हिस्ट्री ऑन माई प्लेट में है इसे बाद मै गुरूनानक की शिक्षा पर किताव लिखूंगी व एक मैअपने बेटे की याद में संस्मरणात्मक बुक लिखने की सोच रही हूं। यह बात चीत आज लेखिका लिली से ‘हिस्ट्री ऑन माई प्लेट’ को रिलीज के बाद हुई ।इस अवसर पर मनोज परिदा, यूटी एडवाइजर, ने लिली स्वर्ण को अपनी किताब ‘हिस्ट्री ऑन माई प्लेट’ को रिलीज करने के लिए बधाई दी और कहा कि यह एक सराहनीय प्रयास है कि लिली ने इस किताब में भोजन के इतिहास को इतनी खूबसूरती से चित्रित किया है, जो आसान काम नहीं है।उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें समय मिलता है, उन्हें प्रेरक किताबें पढऩा पसंद है। उन्होंने कहा कि मुझे कई राज्यों में पोस्टिंग मिली है और सभी प्रकार के खानपान से प्यार है। मुझे विशेष रूप से बट्टर चिकन, नान और भिंडी मसाला सबसे ज्यादा पसंद हैं।इस अवसर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, विवेक अत्रे ने युवाओं को अपनी दिनचर्या में अधिक से अधिक पढऩे-लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नई पीढ़ी से अपने विचारों को कलमबद्ध करने का आग्रह किया और कहा कि लेखन अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा तरीका है।लिली अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और उर्दू में एक मार्मिक स्पर्श के साथ लिखती हैं। उनकी पुस्तक, ए ट्रेलिस ऑफ एक्स्टसी, को पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके उपन्यास, द जिप्सी ट्रेल को पंजाब के राज्यपाल द्वारा मीडिया में सराहा गया। उनकी किताब, लिली ऑफ द वैली को समीक्षकों द्वारा काफी सराहा गया है। लिली के नाम कई सारे पुरस्कार और अवॉर्ड्स की एक पूरी सीरीज दर्ज है, जिनमें रीयूएल इंटरनेशनल प्राइज फॉर पोएट्री 2016, ग्लोबल पोएट एनकोमियम ऑफ पीस और यूनिवर्सल लव, ग्लोबल आइकन ऑफ पीस, वर्चुअसो अवॉर्ड और एलिजाबेथ बैरेट ब्राउन इंटरनेशनल अवार्ड शामिल हैं। लिली की कविताओं का 14 यूरोपीय और एशियाई भाषाओं में अनुवाद किया गया है। वह अमेरिका में एक रेडियो शो होस्ट रह चुकी हैं और कई स्टेज शो होस्ट कर चुकी हैं। उनके साप्ताहिक कॉलम ‘कंटोनमेंट कॉलिंग’ और ‘हिस्ट्री मिस्ट्री ऑफ फूड’ को भी काफी सराहा और पसंद किया गया है।