Chandigarh,18.08.19-प्राचीन कला केन्द्र आज देश की उन महान संस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है जो संगीत एवं कला जगत में निस्वार्थ भाव से अपना योगदान देकर नित नए आयाम स्थापित करने में प्रयासरत है । केन्द्र की सह निर्माता एवं रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर के 75वें जन्मदिन के अवसर पर प्राचीन कला केन्द्र द्वारा एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन किया गया जिसमें ैछ। अवार्डी डाॅ.शोभा कौसर की कुछ शिष्याओं ने अपनी प्यारी गुरू को जन्मदिन के अवसर पर नृत्य पेश करके तोहफे के रूप में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्र के चैयरमैन श्री एस.के.मोंगा एवं सचिव श्री सजल कौसर उपस्थित थे ।
पारम्परिक दीप प्रज्वलन के पश्चात डाॅ.शोभा कौसर की पोती एवं शिष्या शुभ्रा कौसर ने खूबसूरत शुरूआत की । उन्होंने सबसे पहले शिव स्तुति जिसके बोल थे ‘‘पूजन चली महादेव’’ प्रस्तुत करके भक्तिमयी शुरूआत की । उपरांत जयपुर घराने की कुछ खास बंदिशे पेश करके खूब वाहवाही लूटी । इसके पश्चात चारू हांडा ने वात्सल्य रस से परिपूर्ण प्रस्तुति राम भजन ‘‘ठुमक चलत रामचंद्र’’ पेश करके सराहना प्राप्त की ।
इस कार्यक्रम के अगले भाग में डाॅ.शोभा कौसर की सुपुत्री एवं शिष्या पूर्वा द्वारा अपने समूह के साथ कत्थक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां पेश की गई । सबसे पहले पारम्परिक कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया गया । जिसमें उठान,तोड़े,चक्रदार तिहाई एवं पैरों की चालें प्रस्तुत की गई । इसके पश्चात बंदिश ‘‘घिर आई’’ इसके उपरांत मांड प्रस्तुत की गई तथा ‘‘अलबेला सजन आयो रे’’ में सुंदर प्रस्तुति देकर पूर्वा एवं उनके समूह ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । पूर्वा के साथ 10 लड़कियों ने प्रस्तुतियां दी । इनके साथ संगतकारों में जयंत पटनायक तबले पर,मोहन साहिल गायन पर,ऋषभ पखावज पर,पंकज डफ एवं शिवम ने कीबोर्ड पर बखूबी संगत की ।
इस ज़ोरदार प्रस्तुति के पश्चात जसविंदर ने मंच संभाला । अपनी प्यारी गुरू मां के लिए इन्होंने एक गज़ल ‘‘आज जाने की जिद्द न करो’’में भावपूर्ण प्रस्तुति देकर प्रशंसा प्राप्त की ।
इसके पश्चात कौसर पीढ़ी की नई पीढ़ी को प्रदर्शित करती डाॅ.समीरा कौसर ने अपने समूह के साथ जबरदस्त प्रस्तुतियां पेश की । सबसे पहले इन्होंने त्रिवट ‘‘करत धा धा धा’’ पेश किया । उपरांत सावन पर आधारित भाव पक्ष पर नृत्य प्रस्तुत किया गया । जिसमें सावन के महीने में कृष्ण की याद में तड़पती राधा के मन की व्यथा पेश की गई । इसके उपरांत शुद्ध कत्थक नृत्य तोड़े,टुकड़े,परन,गत इत्यादि की ज़ोरदार प्रस्तुति दी गई ।
कार्यक्रम के अंतिम भाग में ैछ।अवार्डी डाॅ.शोभा कौसर ने ‘‘जानकी नाथ सहाए’’ बोलों से निबद्ध भजन पर भावपूर्ण प्रस्तुति पेश की । इनके साथ मंच पर तबले पर फतेह सिंह गंगानी,गायन पर रमेश परिहार एवं शुभ्रा तलेगांवकर,तबले पर महमूद खां एवं प्रमोद गंगानी,सितार पर बंासुरी पर बखूबी संगत की ।
कार्यक्रम के पहले चैयरमैन श्री एस.के.मोंगा,रूपन देओल बजाज,शबनम नाथ,प्रो.सौभाग्य वर्धन निदेशक nzंcc्री ती डेज़ी वालिया ने इस खास अवसर पर डाॅ.शोभा कौसर के लिए खूबसूरत शब्दों से गुथे कुछ अवस्मरणीय पल दर्शकों से सांझा किए ।