गठबंधन की सरकार द्वारा धान खरीद घोटाले बारे उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 19 दिसम्बर से फिर से दोबारा चावल मिलों के स्टॉक की जांच करवाई जाएगी क्योंकि अधिकारियों द्वारा चावल मिलों के स्टाक की जांच की रिपोर्ट के अनुसार धान व चावल के स्टाक में काफी अंतर पाया गया है जिसके बारे में इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने पहले ही विधानसभा के सत्र में भी इस घोटाले के बारे में सवाल उठाया था

चंडीगढ़, 11 दिसम्बर: गठबंधन की सरकार द्वारा धान खरीद घोटाले बारे उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 19 दिसम्बर से फिर से दोबारा चावल मिलों के स्टॉक की जांच करवाई जाएगी क्योंकि अधिकारियों द्वारा चावल मिलों के स्टाक की जांच की रिपोर्ट के अनुसार धान व चावल के स्टाक में काफी अंतर पाया गया है जिसके बारे में इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने पहले ही विधानसभा के सत्र में भी इस घोटाले के बारे में सवाल उठाया था और मुख्यमंत्री महोदय ने कहा था कि सरकार को विश्वास है कि प्रदेश में ऐसा कोई घोटाला नहीं हो रहा, अगर विपक्ष को संदेह है तो वह सबूत के साथ सरकार को रिपोर्ट भेज सकते हैं।
इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने बताया कि उन्होंने स्वयं अम्बाला व करनाल की मंडियों में किसानों से इसके बारे में बातचीत की और धान की खरीद में हो रही बेकायदगियों के बारे में मुख्यमंत्री महोदय को सबूतों के साथ पत्र लिखकर अवगत कराया था। इनेलो नेता ने कहा कि किसानों को अगर खरीद एजेंसियों व सरकारी दलालों से बचाना है तो इस घोटाले की जांच किसी ऐसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सके। परंतु सरकार ने तो उन्हीं अधिकारियों को धान व चावल के स्टाक की जांच के आदेश दिए जो स्वयं इस घोटाले में संलिप्त हैं और ऐसे हालात में उनसे घोटाले की तह तक जाने का किस हद तक विश्वास किया जा सकता है। सरकार ने खुद फिजिकल वैरिफिकेशन में गड़बड़ी मानी है जिससे साबित होता है कि चौधरी अभय सिंह चौटाला ने विधानसभा के पटल पर घोटाले के बारे में जो कहा था वह सत्य था।
गठबंधन की सरकार जानबूझकर धान घोटाले की तह तक नहीं जा रही और बेवजह व्यापारियों को तंग करने पर तुली है क्योंकि यह घोटाला सरकारी अधिकारियों, खरीद एजेंसियों व गठबंधन सरकार के बिचौलियों की मिलीभगत के कारण हुआ है जिन्होंने किसान के धान में नमी की मात्रा बताकर 150 से 200 रुपए तक प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसान को राशि की कम अदायगी की गई और बिलों में (जे-फार्म) जितनी राशि किसान को कम दी गई, उसको नगद अदायगी दिखाकर बिचौलियों ने चूना लगाया है।
इनेलो नेता ने बताया कि अधिकारियों ने मंडी में जितना धान आया था, उससे दुगुनी मात्रा का रिकार्ड में इंद्राज करवाकर खरीद एजेंसियों से उसी हिसाब से अग्रिम राशि की अदायगी लेकर सरकार के साथ धोखा किया है। जितना धान आया था और जो लिखवाया गया है उसका अंतर बाद में दूसरे प्रदेशों से चावल या धान लाकर पूरी करने की योजना है। इनेलो नेता ने बताया कि इस बार लगभग 15 हजार हेक्टेयर एरिया में धान की बुआई हुई है और लगभग 46 हजार टन धान की पैदावार हुई है। परंतु सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंडियों में 75 लाख मीट्रिक टन धान आया और तकरीबन 65 लाख मीट्रिक टन सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा गया। इससे जाहिर होता है कि जितना धान आया था उससे ज्यादा रिकार्ड में लिखवाया गया जिसकी पूर्ति के लिए दूसरे प्रदेशों से धान व चावल की खरीद करने की योजना थी। यह धान घोटाला इस बार नहीं हुआ, यह लगातार पिछले पांच सालों से इनेलो इस मुद्दे को ज्ञापन देकर सीबीआई से जांच करवाने का अनुरोध करती रही है परंतु सरकार अपने चहेते अधिकारियों व बिचौलियों को बचाने के लिए आननफानन में कागजात पूरे करवाकर बचाने का प्रयत्न करती रही है। इनेलो नेता ने मांग की है कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से करवाई जाए ताकि पता लग सके कि जितनी राशि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दी गई है, वह किसकी जेब में गई है और ऐसे सरकार के कौन से बिचौलिए हैं जो दूसरे प्रदेशों से धान व चावल सस्ते दरों पर लाकर हरियाणा की चावल मिलों का स्टाक पूरा करवाने का दम भरते हैं और सरकार की शह पर लगातार पांच वर्षों से धान घोटाला करते आ रहे हैं।
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पहले आम कहावत थी कि ‘प्याज रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ’ परंतु आजकल प्याज ने तो उपभोक्ताओं के आंसू निकाल दिए हैं। गठबंधन की सरकार मंत्रियों के लिए तो भत्तों में बढ़ौतरी पहली कलम से कर सकती है परंतु उसको आम आदमी की रसोई की जरूरी वस्तुओं की महंगाई के बारे में सोचने का समय नहीं है:अभय सिंह चौटाला

चंडीगढ़, 11 दिसम्बर: पहले आम कहावत थी कि ‘प्याज रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ’ परंतु आजकल प्याज ने तो उपभोक्ताओं के आंसू निकाल दिए हैं। गठबंधन की सरकार मंत्रियों के लिए तो भत्तों में बढ़ौतरी पहली कलम से कर सकती है परंतु उसको आम आदमी की रसोई की जरूरी वस्तुओं की महंगाई के बारे में सोचने का समय नहीं है। यह बात इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने देश व प्रदेश में बढ़ती महंगाई के बारे में कही। इनेलो नेता ने बताया कि लगभग 33 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं जिनके लिए प्याज व आलू सबसे सस्ती व जरूरी वस्तु है।
इनेलो नेता ने कहा कि सरकार प्याज की कीमतें 120 रुपए प्रति किलो होने के बावजूद भी आंखेें बंद किए बैठी है और सरकार ने मेवात से प्याज खरीदने की योजना बनाना इस समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे आदमी प्यासा हो और कुआं खोदकर पानी पीने के लिए सोचता हो। सरकार को यही नहीं पता कि उसके प्रदेश में किस जगह और किन जरूरी वस्तुओं की कितनी कमी है? बगैर सोचे-समझे आम आदमी को बेवकूफ बनाने के लिए अखबारों में बयान दे दिए कि सरकार मेवात क्षेत्र से तीन हजार मीट्रिक टन प्याज खरीदकर आम आदमी की जरूरतों को पूरा करेगी जबकि मेवात में भी प्याज कम से कम 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है।
इनेलो नेता ने बताया कि एक अमेरिकी ब्रोक्रेज फर्म ने कहा कि नीतिगत ब्याज दर में अगली कटौती में प्याज की महत्वपूर्ण भूमिका होगी क्योंकि इसके दाम कुछ समय से आसमान को छू रहे हैं और कई जगह तो यह 200 रुपए प्रति किलो से भी ऊपर चला गया है। प्याज व आलू ने राजनीतिक स्तर पर कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों को अपना शौर्य दिखाते हुए धूल चटाने का काम किया है। इनेलो नेता ने कहा कि प्याज के साथ-साथ आलू के दाम भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं और इसके दामों में 25 प्रतिशत की वृद्धि आई है जबकि एक वर्ष में प्याज की कीमतों में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इनेलो नेता ने कहा कि लहसुन की फसल के दाम भी इन दिनों आसमान को छू रहे हैं और 200 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। हरियाणा में सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रति माह एक लाख क्विंटल प्याज की खपत होती है परंतु सरकार की नीति व नीयत में खोट के कारण आम आदमी को इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। हर व्यक्ति इस महंगाई के दौर में अपनी जेब का बजट डगमगाते हुए देख सरकार को दोषी बता रहा है। ये सरकार की दूरअंदेशी होनी चाहिए कि आने वाले समय में कैसा मौसम होगा और उस मौसम का किन-किन फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा जिसकी वजह से बाजार में कमी के कारण महंगाई दर बढ़ेगी परंतु गठबंधन की सरकार तो अपने मंत्रियों व विधायकों को खुश करने में लगी है और मंत्री व उनके कार्यकर्ता सरकारी विश्रामगृह में राज व शराब के नशे में धुत होकर महिला के साथ रात्रि में अभद्र व्यवहार करने से भी नहीं चूकते।