NEW DELHI,04.07.20-कोविड-19 के चलते सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा बैठकों की नई श्रृंखला शुरू की गई है जिसमें प्राचीन कला केन्द्र ने कलाकारों के लिए नए डिजीटल पलेटफार्म एवं मंच को प्रस्तुत किया है ।
आज की वैबबैठक का सीधा प्रसारण रात 8ण्00 बजे केन्द्र के अधिकृत कार्यकारी यूट्यूब चैनल एवं फेसबुक पेज पर किया जा रहा है । इस कार्यक्रम में मॅंझे हुए शास्त्रीय गायक गुरू बिश्नुमुरारी चट्टोपध्याय ने प्रस्तुति पेश की जो कि एक संगीतज्ञ परिवार से सम्बन्धित हैं । इन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपनी बड़ी बहन से ली । उपरांत संगीत की बारीकियां अपने गुरू पंडित सुभाष चकलादार से सीखीं । रबिन्द्रा भारती यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट गुरू बिश्नुमुरारी रामकृष्ण मिशन के समर्थक और अनुयायी हैं । इन्होंने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी संगीत की प्रस्तुतियों से वाहवाही प्राप्त की है।
इन्होंने आज के कार्यक्रम की शुरूआत राग रागेश्री से की । जिसमें इन्होंने पहले बड़े ख्याल की रचना जोकि विलम्बित एक ताल में निबद्ध थी से की । इस रचना के बोल थे ‘‘ ऐ पिया मोरा मानत नाहीं’’ इसके उपरांत इन्होंने छोटे ख्याल की बंदिश ‘‘श्याम बिना सखी जिया ना माने’’ प्रस्तुत की इस बंदिश को द्रुत तीन ताल से सजाया गया था। कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक स्वयं रचित भजन ‘‘मोहे लागी लगन हरि दर्शन की’’ से किया ।
इनके साथ तबले पर प्रसिद्ध तबला वादक पंडित अरूप मित्रा ने बखूबी संगत की ।