DHARAMSHALA, 11.01.26-हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां सिंचाई की व्यवस्था विशेष चुनौतियों से जुड़ी है। प्रदेश में वर्षा पर आधारित खेती अधिक प्रचलित रही है, लेकिन बदलते समय के साथ हिमाचल सरकार द्वारा सिंचाई साधनों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। जल संरक्षण टैंक, लिफ्ट इरिगेशन, पारंपरिक कूहलें, स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई जैसे आधुनिक साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई योजनाओं से दूरदराज़ और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भी खेती को नई मजबूती मिली है। इन प्रयासों से सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई है और किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
कृषि क्षेत्र में सिंचाई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। फसलों की गुणवत्ता, उत्पादन और किसान की आय सीधे तौर पर सिंचाई सुविधाओं पर निर्भर करती है। उप निदेशक कृषि कुलदीप धीमान ने कहा
कि खेती में सिंचाई केवल एक साधन नहीं, बल्कि कृषि विकास की रीढ़ है। विशेष रूप से सब्जी उत्पादन में समय पर और पर्याप्त सिंचाई की उपलब्धता से किसान कम समय में बेहतर लाभ अर्जित कर सकता है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं आदि में अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन सब्जी वर्ग की फसलें अत्यधिक संवेदनशील होती हैं और इनमें नियमित सिंचाई अनिवार्य होती है। यदि समय पर पानी न मिले तो पूरी फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। इसी कारण सब्जी उत्पादन में सिंचाई की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है।
*सौर सिंचाई योजना बनी किसानों के लिए संजीवनी
उप निदेशक कृषि ने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कृषि विभाग द्वारा किसानों की सिंचाई समस्याओं के समाधान के लिए सौर सिंचाई योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा आधारित जल उठाऊ पंप संयंत्र स्थापित करने के लिए किसानों को अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिजली और डीजल पर निर्भरता से मुक्त करना, सिंचाई की लागत को कम करना तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। सौर ऊर्जा से संचालित पंप न केवल कम खर्चीले हैं, बल्कि लंबे समय तक निरंतर सिंचाई की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
कुलदीप धीमान ने बताया कि सौर सिंचाई योजना के अंतर्गत किसानों को खेतों में पानी संग्रहण के लिए टैंक निर्माण, टैंक को पक्का करने तथा जल संप्रेषण के लिए पाइपलाइन बिछाने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इससे पहाड़ी और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी सिंचाई की पहुंच संभव हो पाई है।
जहां पहले पानी की कमी के कारण भूमि असिंचित पड़ी रहती थी, अब वहां सब्जियों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। इससे न केवल कृषि क्षेत्र का विस्तार हुआ है, बल्कि भूमि की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में दो से चार किसानों ने सामूहिक रूप से सौर सिंचाई योजना को अपनाया है। सामूहिक प्रयासों से बड़े क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है, जिससे सब्जी उत्पादन का दायरा बढ़ा है।
इन किसानों द्वारा सब्जियों की खेती की जा रही है और बिना अतिरिक्त बिजली या डीजल खर्च किए नियमित सिंचाई संभव हो पा रही है। इससे उत्पादन लागत कम हुई है और लाभांश में वृद्धि हुई है।
उप निदेशक कृषि ने कहा कि सब्जी फसलें ऐसी फसलें हैं जो किसान को निरंतर और स्थायी आय प्रदान करती हैं। सौर सिंचाई योजना के माध्यम से अब किसान मौसम की अनिश्चितताओं और बिजली कटौती से काफी हद तक मुक्त हो गए हैं।
सब्जी उत्पादन से किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
उप निदेशक ने कहा कि यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा देती है।
सौर सिंचाई योजना के माध्यम से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया गया है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना, जल संसाधनों का संरक्षण करना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है।
कृषि योजनाओं का लाभ प्राप्त करने वाले जिला कांगड़ा की नंदेड पंचायत के बल्ला सहोडा के प्रगतिशील किसान राम कृष्ण सैनी, सुनील कुमार, करतार चंद तथा प्रेम सिंह बताते हैं कि कृषि विभाग द्वारा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से सिंचाई एवं संरक्षित खेती से जुड़े महत्वपूर्ण लाभ प्रदान किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बहाव सिंचाई योजना के अंतर्गत उनके खेतों में सिंचाई सुविधा सुदृढ़ करने के लिए शैलो बोरवेल का निर्माण करवाया गया। इस कार्य पर कुल 2 लाख 20 हजार रुपये की राशि व्यय की गई, जिसमें से 1 लाख 10 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इस सुविधा से उन्हें वर्षभर सिंचाई की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित हुई है, जिससे फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इसके अलावा सौर सिंचाई योजना के तहत सिंचाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 5 हॉर्स पावर की मोटर उपलब्ध करवाई गई है। इस मोटर की कुल लागत 4 लाख 23 हजार 500 रुपये रही, जिसमें से 3 लाख 81 हजार 150 रुपये अनुदान के रूप में मिले। इससे कम समय में अधिक क्षेत्र में सिंचाई संभव हो पाई है और श्रम व लागत दोनों में कमी आई है।
उन्होंने आगे बताया कि जल से कृषि को बल योजना के अंतर्गत जल भंडारण को बढ़ावा देने के उन्हें 100 प्रतिशत अनुदान मिला है। इसी कड़ी में कृषि विभाग द्वारा 1 लाख 25 हजार लीटर क्षमता का एक जल भंडारण टैंक निर्मित किया गया, जिसकी कुल लागत 4 लाख 92 हजार रुपये रही। यह पूरी राशि अनुदान के रूप में प्रदान की गई है। इस टैंक के निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण संभव हुआ है और सूखे के समय भी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
वहीं सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत जल के समुचित एवं नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए जल परिवहन पाइप लाइन की स्थापना की गई। इस पर कुल 1 लाख 7 हजार 740 रुपये की राशि व्यय की गई, जिसमें से 86 हजार 192 रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से जल की बचत के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
इसके साथ ही विभाग द्वारा 105 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के पॉलीहाउस का निर्माण भी करवाया गया। इस पॉलीहाउस के निर्माण पर कुल 1 लाख 58 हजार 730 रुपये खर्च किए गए, जिस पर 1 लाख 34 हजार 920 रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई है। पॉलीहाउस के माध्यम से मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सब्जियों एवं नकदी फसलों का उत्पादन सम्भव हुआ है, जिससे उनकी आमदनी में निरंतर वृद्धि हो रही है।
उन्होंने कहा कि इन सभी योजनाओं का लाभ मिलने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि क्षेत्र में जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई तकनीक और संरक्षित खेती को भी बढ़ावा मिला है।