चंडीगढ़, 7 अप्रैल: इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर बीजेपी सरकार द्वारा 2025-26 के बजट में भारी कुप्रबंधन और प्रदेश की जनता से साथ विश्वासघात करने के गंभीर आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2 मार्च को बजट अभिभाषण में कहा था बीते वर्ष के बजट का 98 फीसदी खर्च किया गया है। संपत सिंह ने कहा बजट खर्च के मेरे पास 25 फरवरी 2026 तक के आंकड़े उपलब्ध है। 2025-26 के बजट में सरकार ने कुल 729 घोषणाएं की थी। करीब 300 घोषणाओं पर 7500 करोड़ खर्च होना था लेकिन उन पर 31 मार्च 2026 तक जीरो खर्च हुआ।

उन्होंने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में सब्सिडी वाली कृषि आधारभूत संरचना के लिए 406.12 करोड़ रूपए आवंटित किए गए, खर्च शून्य हुआ। इसी तरह, पंचायती राज एवं विकास विभाग ने ग्रामीण विकास के लिए राज्य वित्त आयोग के तहत आवंटित 890 करोड़ रूपए में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 248 करोड़ रूपए और करनाल स्मार्ट सिटी के लिए 73 करोड़ रूपए का भी उपयोग नहीं हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम कार्यक्रम के लिए आवंटित 357 करोड़ रूपए भी खर्च नहीं किए गए। शिक्षा विभाग में स्कूल आधारभूत संरचना, मॉडल स्कूलों और प्रमुख विज्ञान परियोजनाओं के लिए 310 करोड़ रूपए के बजट में खर्च शून्य हुआ। प्रमुख शिक्षा योजनाओं के लिए आवंटित 1,415 करोड़ रूपए में से केवल 240 करोड़ रूपए ही खर्च किए गए। अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 306 करोड़ रूपए की योजनाओं पर कोई खर्च नहीं हुआ। सभी शहरी आवास योजनाओं के तहत 1,339.90 करोड़ रूपए खर्च नहीं किए गए, जबकि ग्रामीण आवास के 1,540 करोड़ रूपए में से केवल 205 करोड़ रूपए ही खर्च हुए। सूक्ष्म सिंचाई और संबंधित योजनाओं के लिए 1,129 करोड़ रूपए में से कोई खर्च नहीं हुआ। पेयजल आपूर्ति और क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के लिए आवंटित 865 करोड़ रूपए पर खर्च शून्य। ग्रामीण विकास विभाग में 300 करोड़ रूपए की योजनाओं पर शून्य खर्च हुआ। कुल विभागीय खर्च केवल 18 प्रतिशत तक सीमित रहा। मनरेगा के तहत 446 करोड़ रूपए में से केवल 99 करोड़ रूपए ही खर्च किए गए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 591 करोड़ रूपए खर्च शून्य। महिला एवं बाल विकास विभाग में 221 करोड़ रूपए की योजनाओं पर कोई खर्च नहीं हुआ, जबकि पोषण कार्यक्रमों के लिए 90 करोड़ रूपए में से केवल 6 करोड़ रूपए ही खर्च हुए। ड्रोन दीदी और ‘संकल्प’ योजना सहित कौशल विकास और रोजगार योजनाओं के लिए आवंटित 151 करोड़ रूपए में से खर्च शून्य। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ पर 22 फीसदी खर्च किया गया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बजट आवंटन निगरानी एवं विश्लेषण प्रणाली से आंकड़े एकत्रित किए हैं। संपत सिंह ने कहा मैं इस मामले की प्रिंसिपल अकाउंट जरनल, सेंटर फाइनेंस कमीशन और राज्यपाल को शिकायत करूँगा।

इन योजनाओं पर एक भी पैसा खर्च न किया जाना बीजेपी सरकार का वित्तीय कुप्रबंधन है। बीजेपी कहती कुछ है और करती कुछ है। सरकार प्रदेश में सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट का काम कर रही है। बीजेपी सरकार ने घी, दूध, लस्सी यहां तक कि बच्चों की किताबों पर इतना टैक्स लगा दिया है कि सरकार के पास रेवेन्यू की कोई कमी नहीं है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि सत्ता पाने के लिए उन पैसों को लोगों में मुफ्त में रेवडिय़ां बांटने के लिए दुरूपयोग किया जाता है। प्रदेश के लोगों को भीख नहीं रोजगार चाहिए। प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा पर खर्च होना चाहिए लेकिन सरकार इनको निजी हाथों में सौंप रही है। सरकार में बैंकों के फ्रॉड के मामले लगातार सामने आ रहें है। विभागों के अधिकारी 5-6 फीसदी पर एफडी करवाते हैं जबकि सरकार 10-12 फीसदी पर कर्ज ले रही है। संपत सिंह ने कहा मंडियों में आज किसानों को फसल बेचने में दिक्कतें आ रही है। जो किसान हल और कस्सी चलाता है उसके बायोमेट्रिक की मांग की जा रही है। अगर किसी किसान की जमीन माँ के नाम है तो क्या वो मंडी में फसल बेचने जाएगी।