(सफलता की कहानी)
बिलासपुर के ओयल निवासी शुभम के लिए सहारा बनी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना
योजना के माध्यम से शुरू किया हेयर सैलून का काम, लिख रहे हैं स्वावलंबन की कहानी

बिलासपुर, 04 जून: जिला बिलासपुर के गांव ओयल निवासी शुभम के लिए प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री सुख आश्रय योजना सहारा बनकर खड़ी हुई है। इस योजना के सहयोग से शुभम न केवल अपने पांव पर खड़े हुए हैं बल्कि कभी बेसहारों सा जीवन जीने को मजबूर शुभम अब जीवन का एक नया अध्याय भी लिख रहे हैं।
बिलासपुर सदर तहसील के गांव ओयल में वर्ष 2001 में जब शुभम का जन्म हुआ तो कुछ समय बाद ही मां-बाप को खो दिया। ऐसे में शुभम के सिर पर न तो मां की ममता रही, न ही पिता का मजबूत हाथ। शुभम के जीवन की डोर अब दादा-दादी के सहारे तक की सिमट गई। तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद दादा-दादी ने शुभम को न केवल पाल-पोसकर बड़ा करने लगे बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी हिम्मत दी।
लेकिन इस बीच किस्मत ने एक और इम्तिहान लिया तथा दादा का भी देहांत हो गया। घर में आमदनी का कोई साधन नहीं बचा। हालात ऐसे विकट हो गए कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया। शुभम कहते हैं कि सपने आँखों में थे, लेकिन जेब खाली थी। बावजूद शुभम ने हिम्मत नहीं हारी तथा जीवन की कठिनाईयों से जूझते हुए 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई को पूरा किया। इसके बाद रोजी रोटी के जुगाड़ के लिए हेयर ड्रेसर का काम सीखना शुरू किया। लेकिन यहां भी मेहनत तो थी लेकिन शुरुआत करना आसान नहीं था। ऐसे में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुभम के जीवन में उम्मीद की रोशनी बनकर सामने आई।
इस योजना के माध्यम से उन्हें प्रतिमाह 4 हजार रुपये की राहत राशि मिलने लगी। प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली यह केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि उन जैसे हजारों अनाथ बच्चों को हौंसला देती है कि प्रदेश सरकार विकट परिस्थितियों में उनके साथ खड़ी है। इसी योजना के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने के लिए सरकार ने उन्हें 2 लाख रूपये की आर्थिक मदद की जिसकी बदौलत वह हेयर डैसर का अपना कारोबार स्थापित कर पाए। आज शुभम बिलासपुर शहर में शुभ आर्टिस्टिक नामक सैलून को बेहतर तरीके से चला रहे हैं।
बड़े भावुक मन से शुभम कहते हैं कि वह न केवल खुद कमा रहे हैं बल्कि सम्मान के साथ जीवन की डोर को आगे बढ़ा रहे हैं। कहते हैं कि अगर मुख्यमंत्री सुख-आश्रय जैसी योजना न होती, तो शायद मैं भी जिंदगी की भीड़ में खो जाता तथा दो वक्त की रोटी के लिए कहीं संघर्षरत होता। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सुख आश्रय योजना के माध्यम से न केवल उन जैसे हजारों बच्चों और युवाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया है बल्कि जीवन जीने एवं आगे बढ़ने का हौंसला भी दिया है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश के हजारों बेसहारा व अनाथ बच्चों और युवाओं के जीवन को न केवल संवार रही है बल्कि जीवन का एक मुकाम भी उपलब्ध करवा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर नरेंद्र कुमार का कहना है कि जिला बिलासपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मुख्य मंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कुल 154 पात्रों को लाभान्वित कर विभिन्न घटकों के अंतर्गत लगभग 1.69 करोड़ रूपये की राशि व्यय की है। जिनमें 154 पात्र बच्चों को सामाजिक सुरक्षा पर लगभग 83 लाख रूपये, 15 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के तहत 30 लाख, गृह निर्माण के लिए 16 पात्रों को 29 लाख रूपये तथा 12 बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग साढ़े सात लाख रूपये की राशि शामिल है।
इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा के 5 मामलों पर लगभग 88 हजार, स्र्टाटअप शुरू करने के लिए 6 मामलों में 7.40 लाख रूपये की राशि भी व्यय की गई है। जिला के 22 बच्चों को एक्सपोजर विजिट भी करवाया गया है तथा अन्य सुविधाओं पर भी धनराशि व्यय की है।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके माध्यम से जहां पात्र बच्चों को लाभान्वित किया जा रहा है तो वहीं विभिन्न घटकों के माध्यम से बच्चों को आर्थिक मदद भी प्रदान की जा रही है। जिला प्रशासन का पूरा प्रयास है कि सरकार की योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्रों को समयबद्ध लाभान्वित किया जा सके।

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सफलता की कहानी 04 जून 2026

कामगार कल्याण बोर्ड ने की मदद, धूमधाम से हुई अक्षय की शादी
श्रमिकों के लिए 13 कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बोर्ड ने मंजूर किया है 211.47 करोड़ रुपये का बजट: नरदेव सिंह कंवर

हमीरपुर 04 जून। एक आम श्रमिक के रूप में कार्य करने वाले गरीब परिवार के बेटे को आज के दौर में अपनी शादी के खर्चे का प्रबंध काफी मुश्किल होता है। ऐसे परिवारों से संबंध रखने वाले युवा श्रमिक और उनके परिजनों को शादी के प्रबंधों को लेकर काफी कठिन आर्थिक परिस्थितियों से जूझना पड़ता है। लेकिन, ऐसे युवा या उनके माता-पिता अगर हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हों तो उनकी यह चिंता काफी हद तक दूर हो जाती है, क्योंकि बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों या उनके बच्चों की शादी के लिए भी आर्थिक मदद का प्रावधान है। बोर्ड की ओर से दी जाने वाली यह आर्थिक मदद किसी परिवार के लिए कितना बड़ा सहारा साबित हो सकती है, इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिल रहा है जिला हमीरपुर के सुजानपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत दाड़ला के गांव मयाणा में।
जी हां, इस गांव के एक युवा श्रमिक अक्षय कुमार के लिए भी भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की विवाह अनुदान योजना काफी मददगार साबित हुई है।
दरअसल, अक्षय कुमार सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) की निर्माणाधीन धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना में कार्य कर रहा था। इस परियोजना में कार्य करते-करते अक्षय कुमार को लगभग चार वर्ष हो गए थे और उनकी शादी की बात भी चल रही थी। इस दौरान अक्षय कुमार को शादी के खर्च की काफी चिंता हो रही थी, क्योंकि उनके घर में आय का कोई अन्य बड़ा साधन ही नहीं था। अक्षय की माता का देहांत हो चुका था और पिता गगन सिंह अपनी थोड़ी सी पुश्तैनी जमीन पर खेती-बाड़ी करके जैसे-तैसे गुजर-बसर करते थे। इन परिस्थितियों में अक्षय की शादी को धूमधाम से करना काफी मुश्किल लग रहा था।
लेकिन, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण अक्षय कुमार के लिए एक बार फिर काफी मददगार साबित हुआ। बोर्ड की विवाह अनुदान योजना की जानकारी मिलने पर अक्षय कुमार और उनके परिजनों ने उसकी शादी धूमधाम से करने का निर्णय लिया। अक्षय की शादी काफी धूमधाम से की गई और उन्हें बोर्ड की ओर से 51 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। कोमल के साथ परिणय सूत्र में बंधने के बाद अक्षय कुमार की जिंदगी की गाड़ी खुशी-खुशी चल रही है।
प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए अक्षय कुमार ने बताया कि बोर्ड की 13 कल्याणकारी योजनाएं श्रमिकों तथा उनके परिजनों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। यह बोर्ड श्रमिकों को मकान निर्माण, चिकित्सा सहायता, बच्चे के जन्म से लेकर, शिक्षा और विवाह के लिए आर्थिक सहायता, पेंशन, दिव्यांगता पेंशन, श्रमिक की मृत्यु पर आर्थिक मदद और कई अन्य सुविधाओं के अलावा श्रमिक के अपने विवाह के लिए भी वित्तीय मदद प्रदान करता है।
चाहे श्रमिक के बच्चे का जन्म हो या उसकी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण या विवाह, मकान निर्माण हो या बीमारी का इलाज, अथवा जीवन में कोई अन्य आपात परिस्थिति, इन सभी कार्यों के लिए कामगार कल्याण बोर्ड भरपूर आर्थिक मदद प्रदान करता है।
उधर, बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह ठाकुर ने बताया कि गत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिला में बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कामगारों को कुल 7,47,57,793 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
उन्होंने बताया कि बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश भर के कामगारों के लिए 211.47 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट मंजूर किया है, जिससे हजारों पात्र एवं जरुरतमंद कामगार लाभान्वित होंगे।