मिशन दृष्टि बिलासपुर का पायलट चरण शुरू, 1 सितंबर से पूरे जिले में होगा व्यापक स्क्रीनिंग अभियान
डियारा में 52 बच्चों की हुई आंखों की जांच, 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या मिली
बिलासपुर, 18 अगस्त: बच्चों में आंखों से संबंधित समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन बिलासपुर की पहल ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का आज पायलट चरण शुरू किया गया। पायलट के तहत प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। इस अवसर पर उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार उपस्थित रहे।
‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ अपनी तरह का हिमाचल प्रदेश का पहला व्यापक प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से बच्चों की आंखों की समय पर स्क्रीनिंग, दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान और आवश्यक उपचार एवं फॉलो-अप सुनिश्चित करना है।
पायलट चरण के दौरान कुल 52 बच्चों की जांच की गई। स्क्रीनिंग में 11 बच्चों में आंखों से संबंधित दोष पाए गए, जो कुल जांच किए गए बच्चों का लगभग 20 प्रतिशत है। इनमें 2 बच्चों में एस्टिग्मेटिज्म पाया गया। चिन्हित बच्चों का आगे फॉलो-अप किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध करवाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा और आई स्पेशलिस्ट ईशानी ने बच्चों की स्क्रीनिंग की। आधुनिक ऑटो रिफ्रैक्टोमीटर के माध्यम से बच्चों की प्रारंभिक जांच की गई, जिससे दृष्टि संबंधी समस्याओं और रिफ्रैक्टिव एरर की पहचान में सहायता मिली।
स्क्रीनिंग का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जिनमें दृष्टि संबंधी समस्या होने के बावजूद वे स्वयं इसकी शिकायत नहीं कर पाते। कई बार बच्चों में दृष्टि संबंधी परेशानी पढ़ाई में ध्यान न लगने, फोकस करने में कठिनाई, बोर्ड पर लिखी सामग्री स्पष्ट न दिखाई देने अथवा सिरदर्द के रूप में सामने आती है। समय पर जांच से ऐसी समस्याओं की शुरुआती अवस्था में पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
1 सितंबर से पूरे जिले में शुरू होगा मिशन
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि पायलट चरण के अनुभव के आधार पर ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ को 1 सितंबर से पूरे जिले में व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा। प्रथम चरण में 8 वर्ष तक की आयु के बच्चों की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ-साथ सरकारी और निजी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा।
पहचान किए गए मामलों का रिकॉर्ड तैयार कर उनका नियमित फॉलो-अप किया जाएगा। जिन बच्चों को चश्मे, विशेषज्ञ परामर्श अथवा अन्य उपचार की आवश्यकता होगी, उन्हें समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
मिशन दृष्टि का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी दृष्टि संबंधी समस्याएं, जिनकी समय पर पहचान और उपचार संभव है, किसी बच्चे की शिक्षा और भविष्य में बाधा न बनें। प्रारंभिक स्क्रीनिंग, समयबद्ध फॉलो-अप और आवश्यक उपचार के माध्यम से बच्चों की दृष्टि को सुरक्षित रखने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।