चंडीगढ़, 28 सितंबर 2026: वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष एवं भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य संजय टंडन ने आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की लगातार चुनावी हार पर आत्ममंथन करने के बजाय वे चुनाव आयोग और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाते रहते हैं।

संजय टंडन ने यह बात मेयर सौरभ जोशी के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी रवि रावत और प्रवक्ता गुरप्रीत ढिल्लों भी मौजूद रहे। पार्षद राजिंदर शर्मा और कंवर राणा ने भी प्रेस वार्ता में भाग लिया।

टंडन ने कहा कि राहुल गांधी के रवैये पर कहावत “नाच न जाने, आंगन टेढ़ा” पूरी तरह सटीक बैठती है। उन्होंने कहा, “जब भी कांग्रेस के खराब चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठते हैं, राहुल गांधी मुद्दे को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया की ओर मोड़ देते हैं। कांग्रेस को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि वह बार-बार मतदाताओं का विश्वास क्यों खो रही है।”

उन्होंने कहा कि यही चुनावी व्यवस्था अलग-अलग विपक्षी दलों को जीत दिलाती रही है। टंडन ने कहा, “कांग्रेस कर्नाटक, केरल और हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीत चुकी है, जबकि आम आदमी पार्टी ने पंजाब और दिल्ली में जीत हासिल की है तथा टीएमसी लगातार पश्चिम बंगाल में जीतती रही है। जब राजनीतिक दल जीतते हैं तो ईवीएम और चुनावी व्यवस्था स्वीकार्य होती है, लेकिन हारने पर सवाल उठाए जाते हैं। इस दोहरे रवैये को खत्म करने की जरूरत है।”

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एस आई आर) पर टंडन ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सही और विश्वसनीय मतदाता सूची बनाए रखना है। उन्होंने कहा, “एस आई आर अलग-अलग समय पर किया जाता रहा है। पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के उद्देश्य से की जा रही प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय कांग्रेस को इसमें रचनात्मक रूप से भाग लेना चाहिए।”

टंडन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने देश और विदेश के मंचों पर भारत की चुनावी और संसदीय संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “राजनीतिक दलों को सरकार पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जाने वाले आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बार-बार संदेह पैदा करने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता।”

राहुल गांधी की 2019 की “चौकीदार चोर है” टिप्पणी का जिक्र करते हुए टंडन ने कहा कि बाद में गांधी ने इस बयान को सुप्रीम कोर्ट से जोड़ने पर खेद व्यक्त किया था। उन्होंने कहा, “गंभीर आरोप लगाने और बाद में उन्हें वापस लेने या उनमें स्पष्टीकरण देने का यह तरीका एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता से अपेक्षित जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।”

टंडन ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार के लिए व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराने के बजाय संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं से दोबारा जुड़ने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “संसद तर्कपूर्ण बहस, साक्ष्य और नीतिगत विकल्पों के लिए है, न कि दिखावे के लिए। जब राजनीतिक परिणाम अनुकूल न हों, तब संस्थाओं पर सवाल उठाना आत्ममंथन का विकल्प नहीं हो सकता।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भारतीय लोकतंत्र के बदलते स्वरूप को भी समझना होगा। टंडन ने कहा, “सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं का उभरना यह दर्शाता है कि भारत में राजनीतिक शक्ति किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है। कांग्रेस को इस लोकतांत्रिक वास्तविकता को स्वीकार करते हुए जनता का विश्वास जीतने पर ध्यान देना चाहिए।”

मेयर सौरभ जोशी ने कहा, “एस आई आर को लेकर कांग्रेस बार-बार सवाल उठाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है, जबकि चंडीगढ़ में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में 4,50,282 मतदाता थे, जो अंतिम सूची में बढ़कर 4,60,209 हो गए। इससे स्पष्ट है कि एस आई आर के बाद मतदाताओं की संख्या कम नहीं, बल्कि बढ़ी है।

जोशी ने कहा, "चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को तथ्यों और आंकड़ों को देखना चाहिए। साथ ही, कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ की जनता से किए गए अपने गारंटी कार्ड के वादों का भी जवाब देना चाहिए। बार-बार किसी बात को दोहराने से वह सच नहीं बन जाती। चंडीगढ़ की जनता जागरूक है और वह राजनीतिक दलों के वादों और उनके काम का हिसाब जानती है।”