चंडीगढ़, 10 जुलाई : सरकार द्वारा अपने चहेतों को बचाने के लिए दवा खरीद घोटाले में की गई प्रारम्भिक जांच में जम कर लीपा-पोती की गई। उनके अपनों पर किसी प्रकार की आंच न आए इसके लिए जांच कमेटी ने बड़ी ही चतुराई से जांच रिपोर्ट पेश की। जिला स्तर की जांच कमेटियों द्वारा की गई इस लीपा-पोती की एक-एक परत सांसद दुष्यंत चौटाला ने सबूतों के साथ यहां प्रेस कांफ्रेंस में खोली। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में दुष्यंत चौटाला ने आरटीआई के मिले आंकड़ों के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के प्रदेश में लगभग 40 करोड़ खरीद का मुंह तोड़ जवाब भी दिया।
सांसद चौटाला ने कहा कि यह घोटाला मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की नाक के नीचे हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश मेंं तीन वर्षों के दौरान नेशनल हेल्थ मिशन के तहत दवा खरीद और अन्य उपकरणों की खरीद के लिए 21 जिलों में 808 करोड़ रूपये की खरीद की गई है। इतना ही नहीं दुष्यंत ने हिसार जांच कमेटी की उस रिपोर्ट का पोस्टमार्टम किया जिसमें जांच कमेटी में कहा गया था कि हिसार में कोई भी ड्रग हिसार के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अनधिकृत कंपनी से नहीं खरीदे गए। उन्होंने वह दवा भी सैंपल के तौर पर दिखाई और स्वास्थ्य विभाग के बिल भी दिखाए जिसमें यह दवा डेंटल विभाग द्वारा बिना लाइसेंस वाली कंपनी जीके ट्रेडिंग व रिद्धि-सिद्धी से खरीदे गए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उसी दावे पर अडिग है कि स्वास्थ्य विभाग में 100 से 300 करोड़ का दवा और उपकरण खरीद घोटाला हुआ है।
इनेलो सांसद ने जांच कमेटी द्वारा फर्जी बताई गई कंपनियों के बिल, टेंडर व चैंक की लिखाई की करवाई गई फोरेसिंक जांच भी दिखाई। जांच कमेटी ने कृष्णा इंटरप्राइजिस को दवा विक्रे ता कंपनी माना था परन्तु जीके व सालासर कंपनी को फर्जी और बिना अस्तित्व वाली कंपनी बताया था। फोरेंसिक जांच के दौरान हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कृष्णा एंटरप्राइजिज और जीके ट्रेडिग़ कंपनी के बिल, टेंडर एक ही व्यक्ति कनिष्क द्वारा तैयार किए गए हैं जोकि हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन सोहनलाल कंसल का बेटा कनिष्क है। यानी कि ये कंपनियां भी कनिष्क द्वारा संचालित की जा रही थी। जीके कंपनी से हिसार के स्वास्थ्य विभाग के सिविज सर्जन स्टोर ने डेढ़ वर्ष के दौरान 55 लाख रूपये से अधिक राशि की दवाइयां व उपकरण खरीदे गए हैं।
सांसद चौटाला ने कहा कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की न तो कोई जांच करवाई गई और न ही उन कंपनियों के खिलाफ कोई कारवाई कि गई जो बिना ड्रग लाइसेंस के दवाइयां और मेडिकल उपकरण बेचने का काम कर रहे थे। सांसद ने कहा कि अकेले हिसार जिला में लगभग साढ़े पांच करोड़ की खरीद हुई है और जिन कंपनियों से यह खरीद हुई है उनमें जीके, कृष्णा इंटरप्राइजिस और सालासर नाम की कंपनी है। सरकार ने केवल खानापूर्ति के लिए एक कमेटी का गठन किया था जिसने हिसार में खरीद घोटाले में शामिल सालासर और जीके कंपनियों से खरीद तो दूर की बात उन कंपनियों के होने की बात भी नहीं स्वीकारी। वहीं रेवाड़ी में कमेटी की जांच के बाद की गई मामला दर्ज करने की सिफारिश के बाद भी सरकार ने शगुन ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ एफआइआर की अनुमति नहीं दी गई।
सांसद दुष्यंत चौटाला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग में हुई दवाइयों और उपकरणों के खरीद का कैग से ऑडिट करवाए और इस घोटाले की सीबीआई जांच भी हो। उन्होंने कहा कि यह नहीं हो सकता कि स्वास्थ्य मंत्री को इस बात का ज्ञान न हो की उनके विभाग में क्या चल रहा है। उन्होंने इस खरीद घोटाले में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की साठगांठ होने का भी आरोप लगाया। पे्रसवार्ता में विधायक हरिचंद मिड्ढा, आरएस चौधरी, बीडी ढालिया, अशोक शेरवाल व नच्छत्र सिंह मल्हान भी मौजूद थे।