रोहतक, 17 अप्रैल। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की प्रोफेसर सुमेधा धनी ने गत दिवस दिल्ली में संसद भवन के सामने श्रीमती सुमन सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘डॉ. अंबेडकर का चिंतन-सामाजिक राजनीतिक एवं आर्थिक’ का विमोचन किया। यह जानकारी देते हुए प्रो. सुमेधा धनी ने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर का 127वें जन्मोत्सव इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक सप्ताह तक मनाया जा रहा है। विश्व के 127 देशों में बाबा साहेब अम्बेडकर पूजनीय हैं व अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि अगर बाबा साहब हमारे देश में जन्म लेते तो हम उन्हें सूर्य कहते। युनाईटिड नेशन्स ने बाबा साहब के जन्मदिवस को विश्व ज्ञान दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया है, जोकि हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि बाबा साहेब का कार्य ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ पर आधारित है।
सुमेधा धनी ने कहा कि यह पुस्तक डॉ. अंबेडकर के जीवन व चिंतन पर गहरे शोध के बाद लिखी गई है। पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद होना भी बेहद जरूरी है ताकि वह विश्व के अहिंदी भाषियों तक भी पहुंच सके। यह सर्वविदित है कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के विभिन्न वर्ग जिनमें गरीब मजदूर, महिलायें व समाज के हाशिये पर रहने वाले देश के करोड़ों व्यक्तियों जोकि विभिन्न धर्म व मतों में विश्वास रखते हैं उन्हें एक आधुनिक समाज में रहने के उच्च स्तर पर लाने के लिए आजीवन अथक प्रयास किया। मजदूरों की 8 घंटे की नौकरी तथा महिलाओं की प्रसव छुट्टियां व अपनी पसंद से वर चुनने का अधिकार व अन्तरजातीय विवाह को कानूनी बनाने का कार्य किया। बीबीसी की एक रिर्पोट के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा गुलाम पाये जाते हैं व यूएन की एक रिर्पोट के अनुसार हर 18वें मिनट एक दलित का उत्पीडऩ होता है। ऐसा अक्सर ग्रामीण आंचल में देखने को मिलता है। 
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के चिंतन को जितना हम अपने जीवन में उतारेंगे उतने ही स्मृद्ध होते जायेंगे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के दिखाये हुए रास्तों पर चलकर स्त्री शिक्षा, दलित उद्धार आदि में अपना योगदान देना ही बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि है। 
इस अवसर पर कृषि मंत्रालय के निदेशक के.पी. वासनिक, शिक्षा निदेशक श्रीमती ऊषा कुमारी, लेखिका सुमन सिंह, दिप्ती सिंह, डॉ. रूपचंद गौतम व नागपुर से पहुंचे भंते रावत दीक्षाभूमि आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।