घुमारवीं (बिलासपुर), 25 फरवरी: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में निरंतर प्रयासों एवं अनुशासन में रहकर निर्धारित लक्ष्यों को हासिल कर सकते है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी जीवन में अनुशासन और निरंतर प्रयास को अपना लेते हैं, उनकी सफलता की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर लगातार कार्य करने की प्रेरणा दी। राजेश धर्माणी आज स्वामी विवेकानंद राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय घुमारवीं के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहना चाहिए। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के बिना कोई भी व्यक्ति जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में योग, व्यायाम और संतुलित आहार को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन स्वयं को तैयार करने और आत्मविकास का सर्वश्रेष्ठ दौर होता है। ऐसे में विद्यार्थियों को चाहिए कि वह स्वयं को शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनें ताकि उनमें विभिन्न क्षमताओं से युक्त व्यक्तित्व का निर्माण हो सके।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्येक बच्चे में अलग-अलग प्रतिभा और क्षमता होती है। ऐसे शिक्षकों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की विशेष क्षमताओं को पहचान कर उन्हें निखारना भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाना चाहिए ताकि वह जीवन में आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकें।
उन्होंने कहा कि जीवन का अर्थ केवल समय व्यतीत करना नहीं, बल्कि कुछ कर दिखाने का जुनून होना चाहिए। विद्यार्थी असफलता के लिए दूसरों को दोष देने के बजाए असफलता के कारणों पर आत्ममंथन करते हुए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प मज़बूत करें। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतरता होगी तो दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें सफल होने से नहीं रोक सकती।
राजेश धर्माणी ने कहा कि घुमारवीं में कौशल विकास केन्द्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी कक्षाएं आगामी शैक्षणिक सत्र में प्रारंभ हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में भाषा कौशल, डिजिटल कौशल सहित विभिन्न व्यावसायिक कौशलों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को मजबूत और सशक्त बनाना है।
उन्होंने शिक्षकों से आहवान किया कि पढ़ाई केवल कक्षा तक सीमित न होकर प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाए, ताकि विद्यार्थी नवाचार के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी अर्जित कर सके।
श्री धर्माणी ने विभिन्न शैक्षणिक, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी तथा जो विद्यार्थी इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने से वंचित रहे उन्हें भविष्य में अधिक मेहनत कर अगले वर्ष बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी।
इससे पहले महाविद्यालय के प्रो. प्रीतम लाल ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा काॅलेज की वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में महाविद्यालय में कुल 2293 विद्यार्थी अध्ययनरत् हैं, जिनमें 1422 छात्राएं तथा 871 छात्र शामिल हैं। उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री की धर्मपत्नी सोनिका धर्माणी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर कॉलेज पीटीए प्रधान शशि भूषण ठाकुर, निवर्तमान नगर परिषद अध्यक्षा रीता सहगल, पार्षद राकेश कुमार, सतीश शर्मा, युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष अरविंद कालिया, अध्यापक, अभिभावक एवं काॅलेज विद्यार्थियों सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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आईटीआई में बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी तकनीक में एक वर्षीय पाठ्यकम शुरू: राजेश धर्माणी
कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा, स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त होंगे युवा
बिलासपुर, 25 फरवरी: नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के 6 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी तकनीक पर आधरित एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स को प्रदेश सरकार ने शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास आधारित यह पाठ्यक्रम युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त बनाने में अहम कड़ी साबित होंगे। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के चयनित 6 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रारम्भ करने का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में व्यावहारिक, रोजगारोन्मुखी तथा उद्योग-उपयुक्त कौशल प्रदान करना है, ताकि वह स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में सशक्त हो सकें।
उन्होंने कहा कि आईटीआई घुमारवीं, जुब्बल तथा रिकांगपिओ में बागवानी, आईटीआई रैल तथा ठियोग में नैचुरल/ऑर्गेनिक फार्मिंग जबकि आईटीआई शाहपुर में डेयरी टेक्नोलॉजी का एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक संस्थान में प्रति बैच 30 प्रशिक्षुओं की प्रवेश क्षमता निर्धारित की गई है, ताकि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभागों के विषय-विशेषज्ञ अतिथि संकाय के रूप में नियुक्त किए जाएंगे, ताकि प्रशिक्षणार्थियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि नाॅन सब्सिडाइज्ड़ कोर्स की वार्षिक फीस 15 हजार 970 रुपये निर्धारित की गई है, जिसे राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा अनुमोदित किया गया है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, प्राकृतिक खेती तथा डेयरी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना राज्य की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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