राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर आयोजित हो रही वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता
प्रतियोगिता में 20 प्रतिभागी ले रहे भाग, 10 विभिन्न स्थानों पर तैयार कर रहे हैं कलाकृतियां
बिलासपुर, 22 मार्च: राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में कुल 20 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो 10 विभिन्न स्थानों पर अपनी कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं।

प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों को समाज एवं क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषय दिए गए हैं, जिनमें बिलासपुर का विस्थापन, एंटी चिट्टा (नशा विरोधी अभियान) तथा पर्यटन प्रमुख हैं। इन विषयों के माध्यम से कलाकार अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस संबंध में उपायुक्त राहुल कुमार का कहना है कि नलवाड़ी मेला के माध्यम से वाॅल पेंटिंग प्रतियोगिता को आयोजित करने का प्रमुख उद्देश्य युवाओं में कला के प्रति रुचि बढ़ाना, सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ मेला में आने वाले लोगों को इन आकर्षक वॉल पेंटिंग्स के माध्यम से जागरूकता का संदेश भी देना है।

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जलमग्न ऐतिहासिक पुल भंजवणी औहर की कलाकृति बनी है आकर्षण का केंद्र
बिलासपुर के हीरापुर कसेह निवासी मूर्तिकार प्रेम सिंह ने तैया की है यह कलाकृति
बिलासपुर, 22 मार्च: राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर जलमग्न ऐतिहासिक पुल भंजवाणी औहर की कलाकृति विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत इस जलमग्न ऐतिहासिक पुल की कलाकृति को प्रसिद्ध स्थानीय मूर्तिकार प्रेम सिंह ने तैयार किया है। प्रेम सिंह, ग्राम कसेह, पंचायत हीरापुर (जिला बिलासपुर) के निवासी हैं, जो अपनी उत्कृष्ट कला के लिए क्षेत्र में जाने जाते हैं।
उन्होंने इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन ऐतिहासिक धरोहरों और संसाधनों को जीवंत करने का प्रयास किया है, जो विस्थापन के कारण समय के साथ लुप्त हो गए हैं। उनका उद्देश्य भावी पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना है।
मूर्तिकार प्रेम सिंह ने बताया कि इस पुल की कलाकृति को तैयार करने में उन्हें काफी समय लगा है। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने अतीत की यादों को ताजा करने का अवसर भी मिला। इस ऐतिहासिक पुल का उस समय के जनजीवन में महत्वपूर्ण स्थान था। उन्होंने बताया कि पुल पर चैकीदार नाथूराम तैनात रहते थे, जो हरी झंडी दिखाकर आवागमन को नियंत्रित करते थे, और उनका विश्राम स्थल भी पुल के समीप स्थित था।
इतिहास के अनुसार, बिलासपुर राज्य की रानी अपने मायके जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करती थीं, वहीं राजा औहर की ओर शिकार खेलने के लिए इसी मार्ग से जाया करते थे। उस समय बिलासपुर की बसें भी इसी पुल से गुजरती थीं। आम जनता पैदल आवागमन और पशुओं को ले जाने के लिए भी इसी पुल का उपयोग करती थी।
यह प्रदर्शनी न केवल ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है। मेले में आने वाले दर्शक इस कलाकृति की सराहना कर रहे हैं और इसे विशेष आकर्षण के रूप में देख रहे हैं।

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राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला में कुश्ती प्रतियोगिता के तीसरे दिन पहलवानों ने दिखाया दमखम
हिमबाला में प्रेरणा प्रथम, खुशी दूसरे तथा अनीता तीसरे स्थान पर रहीं
बिलासपुर, 22 मार्च: राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अवसर पर आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता के तीन दिन भी रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। इस दौरान हिमबाला वर्ग में कुल 30 कुश्ती मुकाबले संपन्न हुए, जिनमें पहलवानों ने दमखम और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। हिमबाला में प्रेरणा प्रथम, खुशी दूसरे तथा अनीता तीसरे स्थान पर रहीं।
इसी तरह हिम कुमार वर्ग में लगभग 110 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जबकि सामान्य कुश्ती वर्ग में करीब 150 पहलवानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
तीसरे दिन के मुकाबलों में दर्शकों ने भरपूर मनोरंजन किया। खेल आयोजन समिति ने सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए आगामी फाइनल मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं दीं।