घुमारवीं (बिलासपुर), 03 अप्रैल: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह घुमारवीं में जन समस्याएं सुनीं तथा अधिकतर का मौके पर ही निपटारा कर दिया। उन्होंने लंबित समस्याएं को समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित बनाने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किये।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में किसानों, बागवानों, पशुपालकों, मछुआरों की आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं।
मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि बजट में गाय के दूध का क्रय मूल्य को 51 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 61 रूपये जबकि भैंस के दूध का क्रय मूल्य 61 रूपये से बढ़ाकर 71 रूपये प्रति लीटर किया है। सरकार के इस कदम से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि पैसा सीधे किसानों के हाथ में जाएगा।
इसी तरह प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित हल्दी, गेहूं, मक्का, जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि अब गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रूपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 80 रूपये, मक्का 40 रूपये से बढ़ाकर 50 रूपये, पांगी घाटी के जौ को 60 रूपये से बढ़ाकर 80 रूपये तथा हल्दी के एमएसपी को भी 90 रूपये से बढ़ाकर 150 रूपये प्रति किलोग्राम करने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने पहली बार अदरक के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रूपये प्रति किलोग्राम निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के इस कदम से राज्य में लगभग 2 लाख 23 हजार ऐसे किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे जो लगभग 38 हजार 455 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में प्रदेश के मछुआरों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर राॅयल्टी की दर को जहां पहले 15 प्रतिशत से घटाकर साढ़े सात प्रतिशत किया था, जिसे अब चालू वित्तीय वर्ष में घटाकर एक प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस अहम कदम से राज्य के लगभग 6 हजार जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों की मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की भी घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को सुनने, उनके हितों की रक्षा करने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य किसान आयोग अधिनियम के माध्यम से हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग के गठन की भी बजट में घोषणा की है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश के लाखों किसान लाभान्वित होंगे।