जिले में निजी कोचिंग केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य, नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करें अधिकारी–उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल

चंबा, अक्तूबर 15-उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने कहा कि जिले में संचालित निजी कोचिंग केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पंजीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित बनाने तथा निर्धारित नियमों की अनुपालना को लेकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

उपायुक्त आज हिमाचल प्रदेश निजी कोचिंग सेंटर पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026 के अंतर्गत जिला स्तरीय समिति की उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
मुकेश रेपस्वाल ने कहा कि निजी कोचिंग केंद्रों के संचालन को व्यवस्थित बनाने तथा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उपायुक्त ने सभी उपमंडल दंडाधिकारियों (एसडीएम) तथा पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) को इस संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है। इस दिशा में सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना सुनिश्चित बनाएं।
उन्होंने यह भी बताया कि 50 से अधिक विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, शैक्षणिक सहायता अथवा स्कूली, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई के लिए कोचिंग देने वाले निजी केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य है। इसमें परामर्श, खेलकूद, नृत्य, रंगमंच एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों वाले निजी संस्थान शामिल नहीं हैं।
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार सकलानी, उपनिदेशक उच्च स्कूल शिक्षा विकास महाजन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे एस भारद्वाज, प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चंबा राकेश राठौर, प्रधानाचार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा विपिन शर्मा तथा कनिष्ठ अभियंता नगर परिषद नीतिका ठाकुर भी बैठक में उपस्थित रहीं ।
===============================================
वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को दी जाए प्राथमिकता– उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल
जल संचय जन भागीदारी कैच द रेन–2026 अभियान के तहत बैठक आयोजित
चंबा, अक्तूबर 15-उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल की अध्यक्षता में आज जल संचय जन भागीदारी कैच द रेन–2026 अभियान के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में बैठक का आयोजन किया गया।
उपायुक्त ने जिले में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने को लेकर सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि अभियान 31 मई 2027 तक संचालित रहेगा तथा जल शक्ति मंत्रालय की इस पहल के अंतर्गत एकत्रित आंकड़ों और पोर्टल पर दर्ज सत्यापित कार्यों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन का आकलन होगा।
मुकेश रेपस्वाल ने जिले में प्रभावी गतिविधियां सुनिश्चित बनाने को लेकर
ग्रामीण विकास विभाग, जल शक्ति विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों को वर्षा जल संचयन, रिचार्ज पिट, सोक पिट, कुओं एवं अन्य जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण, मरम्मत और नवीनीकरण से संबंधित कार्यों में प्राथमिकता रखने को कहा।
उन्होंने साथ में यह भी निर्देश दिए कि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन (रिजुवनेशन) कार्यों को भी शामिल किया जाए तथा निर्माणाधीन विभिन्न विभागीय भवनों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था भी सुनिश्चित बनाई जाए।
उपायुक्त ने अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित बनाने को लेकर जन भागीदारी एवं हितधारकों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने सभी विभागों को पूर्ण किए गए कार्यों का विवरण निर्धारित पोर्टल पर समयबद्ध अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईडी संबंधी समस्या आने पर संबंधित विभाग कार्यों का विवरण जिला विकास अधिकारी को उपलब्ध करवाएं ताकि जिला विकास अधिकारी की आईडी के माध्यम से कार्यों की प्रविष्टि सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में ग्रामीण विकास विभाग, जल शक्ति विभाग तथा वन विभाग के विभिन्न अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े।
जिला विकास अधिकारी तेवेंद्र चनोरिया, खंड विकास अधिकारी मैहला डॉ. बशीर खान, भरमौर संजय वर्मा, अर्थशास्त्री जिला विकास कार्यालय विनोद कुमार बैठक में उपस्थित रहे ।