चंडीगढ़, 24 अक्टूबर। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने एचईआरसी द्वारा प्राइवेट कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार। दो दिन बिजली न मिलने के कारण हजारों करोड़ रुपयों का नुकसान हो गया, दो दिन तक घरों में बिजली न मिलने और पानी न मिलने से जनता कितनी परेशान हुई, किसान कितने परेशान हुए, बिजली कर्मचारियों को जेल में डाला गया, नॉन टेक्निकल पटवारी और अध्यापकों की ड्यूटी बिजली व्यवस्था को संभालने के लिए लगा कर उनकी जान जोखिम में डाली गई, इन सबकी जिम्मेवारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री कहते हैं कि वे निजीकरण के खिलाफ हैं तो दो दिन तक प्रदेश में अफरा तफरी का माहौल क्यों पैदा किया गया? एचईआरसी के फैसले को तुरंत धारा 108 के तहत रद्द क्यों नहीं किया गया? यह निजीकरण करने का फैसला किसका था? और अगर किसी और का निर्णय था तो मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वो डमी साबित हुए हैं। बीजेपी बड़े उद्योगपतियों के लिए काम करती है, आम जनता से इनका कोई लेना देना नहीं है। जिस प्राइवेट कंपनी को यह लाइसेंस दिया गया वो केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का बेहद करीबी व्यक्ति है। मनोहर लाल खट्टर ने ही इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर लाइसेंस दिलवाया था।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जिस दिन प्राइवेट कंपनी ने समानांतर लाइसेंस लेने के लिए आवेदन किया और उसपर हुई सुनवाई तक हमारी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने स्वयं उपस्थित होकर कड़ी आपत्ति दर्ज की और तथ्यों के साथ पुरजोर विरोध किया। उसके बाद भी यह लाइसेंस दिया गया।
कितना संगीन मामला था, प्रदेश के लोगों का भविष्य खतरे में था और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के नेता पूरी तरह मौन रहे। कांग्रेस का कोई नुमाइंदा एक बार भी एचईआरसी में विरोध करने नहीं आया। इससे एक बार फिर से बीजेपी और कांग्रेस की मिलीभगत सामने आ गई है। एक भी नेता का विरोध न जताना बड़े शर्म की बात है। प्रदेश को इतना बड़ा नुकसान हो गया इसके लिए बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस पूरी तरह से जिम्मेदार है।
बीजेपी सरकार तुरंंत बिजली कर्मचारियों पर लगाए गए मुकदमे वापिस ले, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को बहाल करे और जेल में बंद कर्मचारियों को रिहा करे।