नई दिल्ली, 26.10.26-: नई दिल्ली के संसद भवन में भारत की संसद की मेजवानी में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को सम्बाधित करते हुए हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा कि जन केन्द्रित विकास का मार्ग संवाद, सहयोग और सांझा जिम्मेदारी से होकर गुजरता है। गौरतलब है कि इस अन्तर्राष्ट्रीय मंच का उदघाटन लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया तथा इस अवसर पर राज्य सभा उपसभापति डॉ0 हरिवंश विशेष रूप से मौजूद थे।

इस ऐतिहासिक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों तथा 10 सहयोगी देशों की संसदो के पीठासीन अधिकारी और संसदीय शिष्टमण्डल ने भाग लिया। सम्मेलन के शुभारम्भ उपरान्त देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, 10 सहयोगी देशों के सांसदों, राज्यों के पीठासीन अधिकारियों तथा संसदीय शिष्टमण्डल के सदस्यों से संसद के संविधान सदन में मुलाकात की।

अपने सम्बोधन के दौरान पठानियां ने जोर देकर कहा कि जनकेन्द्रित संसद के लिए पारदर्शिता अत्यन्त आवश्यक है। नागरिकों का यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके प्रतिनिधि किन मुद्दों को उठा रहे हैं, सार्वजनिक धन का उपयोग किस ओर हो रहा है और संसदीय सिफारिशों पर क्या कार्यवाही की जा रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी का जिर्क करते हुए पठानियां ने कहा कि समावेशी विकास के लिए संसदों में महिलाओं और युवाओं की पर्याप्त और प्रभावी भागीदारी महत्पूर्ण है। महिलाएं समाज की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है और उनके अनुभव शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार तथा सामाजिक कल्याण जैसे विषयों को नीति -निर्माण में अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान कर सकते हैं।

अपने सम्बोधन के दौरान हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए पठानियां ने कहा कि हमारा राज्य उँचे पर्वतों, गहरी घाटियों और दुर्गम बस्तियों वाला प्रदेश है। यहाँ के लोग कठिन भौगोलिक परिस्थितियों मे जीवन जीते हैं। फिर भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सूचकांकों में हिमाचल ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की है इसका श्रेय हमारे परिश्रमी लोगों के साथ- साथ उसके प्रतिनिधित्व को भी जाता है जिसने सदन में हर दूरस्थ गाँव की समस्या को स्वर दिया।

पठानियां ने कहा कि हमारे प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं ने जमीनी लोकतंत्र को सशक्त बनाया है। ग्राम सभा में बैठ कर लोग स्वयं तय करते हैं कि गाँव में सड़क बनेगी। पेयजल योजना बनेगी या स्कूल का भवन सुधरेगा। महिलाओं के लिए आरक्षण ने पंचायतों में उनकी भागीदारी को नया आत्मविश्वास दिया है। जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्त्रीयाँ बरावर से सम्मिलित होती हैं तो नीतियॉ अधिक सम्बेदनशील और परिणामोंन्मुखी बनती हैं यही जनकेन्द्रित विकास की वास्तविक आत्मा है। अपने सम्बोधन के अन्त में पठानियां ने कहा कि जनकेन्द्रित विकास के लिए मजबूत, उत्तरदायी और प्रभावी संसद आवश्यक है। संसद केवल कानून बनाने की संस्था नहीं है बल्कि जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों सम्बन्धी आवश्यकताओं का प्रतिनिधि मंच है।

संसदों को अधिक पारदर्शी, सहभागी, तकनीकि – सक्षम और समावेशी बनाकर लोकतंत्र में नागरिकों के और करीब लाया जा सकता है। मजबूत संसदीय समितियाँ, प्रभावी निगरानी, गुणवतापूर्वक कानून निर्माण, डिजिटल तकनीक का उपयोग, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी नागरिक संवाद तथा सार्वजनिक हित पर प्रभावी नियंत्रण इसके प्रमुख आधार हैं। उन्होने कहा कि जब नागरिकों की आवाज निति निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल होगी संसदें सरकार को जवाबदेह बनाएंगी और विकास के लाभ समाज में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगें तभी लोकतंत्र वास्तव में सार्थक और विकास में समोवेशी बन सकेगा। इस अवसर पर देश के अधिकतर राज्यों के विधान मण्डलों के पीठासीन अधिकारी, राज्य सभा के उपसभापति, 10 सहयोगी देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी तथा संसदीय शिष्टमण्डल भी शामिल थे। इसके अतिरिक्त इस सम्मेलन में लोक सभा तथा राज्य सभा के महासचिव भी शामिल थे।