जिला परिषद कांगड़ा के वार्डों के परिसीमन का प्रस्ताव जारी, आपत्तियां 27 फरवरी तक
धर्मशाला, 23 फरवरी: उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने आज यहां जानकारी देते हुए बताया कि जिला परिषद कांगड़ा के वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार के निदेशक एवं विशेष सचिव (पंचायती राज) के निर्देशों के के दृष्टिगत कार्रवाई अमल में लाई गई है।
उपायुक्त ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-89 तथा हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद कांगड़ा के वार्डों के परिसीमन के प्रस्ताव को प्रकाशित किया है।
उपायुक्त ने बताया कि प्रस्तावित परिसीमन के संबंध में यदि किसी व्यक्ति, संस्था अथवा जनप्रतिनिधि को कोई आपत्ति या सुझाव हो तो वह 27 फरवरी 2026 तक, संबंधित खंड विकास अधिकारी के माध्यम से उपायुक्त कार्यालय कांगड़ा को प्रेषित कर सकता है।
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जायका समर्थित कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला 24 से 26 फरवरी तक धर्मशाला में
धर्मशाला, 23 फरवरी: हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना द्वारा ‘सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर जायका सहायता प्राप्त कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 24 से 26 फरवरी तक धर्मशाला में किया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए परियोजना निदेशक डाॅ. सुनील चौहान ने बताया कि कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार कार्यशाला के उद्घाटन करेंगे। कार्यशाला में जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि काउची ताकुरो, जायका इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकमात्सू एइजी, हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि सचिव डाॅ. सी. पाॅल रासू तथा डाॅ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के कुलपति डाॅ. आर. सिंह चंदेल सहित सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय के अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे।
डाॅ. चौहान ने बताया कि इस कार्यशाला में देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रतिभागियों में भारत सरकार एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिकारी, देशभर की विभिन्न जायका सहायता प्राप्त परियोजनाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन, सफल कृषि उद्यमी, एग्री-टेक नवप्रवर्तक, प्रगतिशील किसान एवं अन्य प्रमुख हितधारक शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला सतत कृषि विकास एवं कृषि-व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान-विनिमय, सहयोग और नीतिगत संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगी। कार्यशाला को पाँच मुख्य विषयोंकृ संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियाँ एवं जलवायु-लचीली खेती, जलवायु-लचीली सतत कृषि में तकनीक एवं नवाचार, कृषि-व्यवसाय में सतत मूल्य शृंखला एवं समावेशी बाजार पहुंच का निर्माण, सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप माॅडल तथा कृषि-व्यवसाय स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन पर केंद्रित किया गया है।
भविष्य की योजनाओं में मूल्य संवर्धन हेतु समूह चर्चाएँ भी आयोजित की जाएंगी तथा प्रतिनिधियों के लिए हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना स्थलों का भ्रमण भी प्रस्तावित है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक फसलों से उच्च-मूल्य एवं व्यावसायिक फसलों की ओर संक्रमण पर विचार-विमर्श कर किसानों और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना है। इसके अतिरिक्त सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास की सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, कृषि में प्रासंगिक एवं विस्तार योग्य एग्री-टेक हस्तक्षेपों की पहचान एवं प्रोत्साहन तथा हितधारकों के बीच संस्थागत एवं विपणन संबंधों को मजबूत करना भी प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
उन्होंने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना का द्वितीय चरण 1,010 करोड़ रुपये की लागत से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से जुलाई 2021 से 2029 तक संचालित है और अपनी आधी अवधि पूर्ण कर चुका है। परियोजना के अंतर्गत 296 उप-परियोजनाओं के माध्यम से 8,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई प्रणालियों का निर्माण कर लगभग 30 हजार परिवारों को लाभान्वित करने तथा लगभग 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल विविधीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।