धर्मशाला, 26 फरवरी-डॉ. सी. पॉलरासु, सचिव (कृषि), हिमाचल प्रदेश सरकार, ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि की स्थिरता के लिए सही दिशा तय करने हेतु सामूहिक, नवाचारी और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। वह बुधवार देर शाम धर्मशाला के धौलाधार हाइट्स रिजॉर्ट्स में आयोजित ‘सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
डॉ. पॉलरासु ने कहा कि स्थिरता एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें किसान, संस्थान, निजी क्षेत्र और समुदाय सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि के भविष्य को सही दिशा देने के लिए तकनीक, स्मार्ट प्रथाओं और नए व्यावसायिक मॉडलों में नवाचार आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज के सभी वर्गों—महिलाओं, छोटे किसानों, युवाओं और कमजोर समुदायों—को इस परिवर्तन के केंद्र में शामिल करना अनिवार्य है।
डॉ. पॉलरासु ने हिमाचल प्रदेश जायका कृषि परियोजना की प्रगति की सराहना की, जिसने जुलाई 2021 से अब तक अपनी आधी अवधि पूरी कर ली है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-2 द्वारा आयोजित इस कार्यशाला के सफल आयोजन की भी प्रशंसा की, जो भारत में जायका समर्थित परियोजनाओं के अंतर्गत संचालित है।
परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने अपने स्वागत भाषण में राज्य सरकार और जायका इंडिया के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि परियोजना के अपेक्षित परिणामों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी। 1010 करोड़ रुपये की इस चरण-2 परियोजना के तहत 296 उप-परियोजनाओं के माध्यम से 8000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे 30,000 परिवारों को लाभ मिलेगा तथा लगभग 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल विविधीकरण किया जाएगा।
जायका-इंडिया के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकामात्सु एइजी और विकास विशेषज्ञ निश्ता वेंगुर्लेकर सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल थे, जो समापन सत्र में उपस्थित रहे।
कार्यशाला के प्रतिनिधियों ने चेतरू स्थित एफपीओ कंसोर्टियम का दौरा किया, जहां उन्हें एफपीओ गठन, कंसोर्टियम मॉडल, संग्रहण, ग्रेडिंग और ब्रांडिंग प्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। दावड़ उप-परियोजना क्षेत्र में प्रतिनिधियों ने खेतों का भ्रमण किया और एसएचईपी प्रदर्शन देखा तथा जमानाबाद स्थित रिलायंस इंडिया स्टोर के साथ बाजार संपर्क का प्रदर्शन भी देखा।
प्रतिनिधियों ने भट्ठू स्थित सब्ज़ी फार्म का भी दौरा किया और संरक्षित खेती प्रथाओं व खेत स्तर पर किए गए प्रदर्शनों को देखा। इसके अलावा, उन्होंने भट्ठू स्थित परियोजना के कलेक्शन सेंटर और रिटेल आउटलेट का अवलोकन किया, जहां हल्दी प्रसंस्करण इकाई के प्रदर्शन, प्रत्यक्ष खुदरा विपणन मॉडल के बारे में जानकारी प्राप्त की और भवारना एफपीसी के सदस्यों से संवाद भी किया। इस दौरान परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान, जेआईसीए-इंडिया प्रतिनिधि और परियोजना के वरिष्ठ सलाहकार श्री बलजीत संधू भी उपस्थित रहे।