चण्डीगढ़, 22.05.26- : भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवतम् या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य वर्ण्य विषय भक्ति योग है, जिसमें कृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरुपण भी किया गया है। परंपरागत तौर पर इस पुराण के रचयिता वेद व्यास को माना जाता है। ये कहना था कथावाचक श्री बांके बिहारी पचौरी जी महाराज का, जो श्री प्राचीन शिव मंदिर, सेक्टर 23-डी में श्रीमद् भागवत कथा कहते हुए इसकी व्याख्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि है। भगवान शुकदेव द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाया गया भक्तिमार्ग तो मानो सोपान ही है।

मंदिर सभा के प्रधान रजनीश कालिया और महासचिव नरिन्दर सिंह डडवाल ने बताया कि मंदिर में वार्षिक मूर्ति स्थापना के अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा रखी गई थी। आज अंतिम दिन को सुबह ध्वजारोहण व हवन-यज्ञ हुआ तथा श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ जी की चौकी का भी आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनीष धंजल एवं उनकी पार्टी द्वारा भजन संध्या प्रस्तुत की गई। अंत में अटूट भंडारे का आयोजन भी किया गया।