डीसी बिलासपुर की महत्वाकांक्षी पहल मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का विधिवत आगाज
जिले में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की होगी आंखों की होगी स्क्रीनिंग, समय पर मिलेगा उपचार
प्राथमिक पाठशाला रौड़ा में एडीसी रुपिंदर कौर ने किया अभियान का विधिवत शुभारंभ, पहले दिन 50 बच्चों की आंखों की जांच, 2 में मिला दृष्टि दोष

बिलासपुर, 01 सितंबर: बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ का आज राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा में विधिवत शुभारंभ किया गया। अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर रुपिंदर कौर ने अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के शुभारंभ अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला रौड़ा और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के कुल 50 बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों की स्क्रीनिंग में किसी भी बच्चे में दृष्टि संबंधी दोष नहीं पाया गया, जबकि प्राथमिक पाठशाला के 38 बच्चों की जांच में 2 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष सामने आए।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कम उम्र में बच्चों की आंखों में होने वाली दृष्टि संबंधी समस्या की समय पर पहचान न होने से इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, सीखने की क्षमता और समग्र विकास पर पड़ सकता है। छोटे बच्चे अक्सर अपनी दृष्टि संबंधी परेशानी को स्वयं पहचान या स्पष्ट रूप से बता नहीं पाते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से आंखों की समस्या का शुरुआती स्तर पर पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर आवश्यक उपचार और चश्मे के माध्यम से बच्चे की दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ के तहत 1 सितंबर 2026 से जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 8 वर्ष के बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की जाएगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की आंखों की समय पर जांच कर दृष्टि संबंधी कमियों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान करना और आवश्यकता के अनुसार उन्हें उचित उपचार उपलब्ध करवाना है, ताकि आंखों की समस्या उनकी पढ़ाई और भविष्य में बाधा न बने।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि स्क्रीनिंग की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सबसे पहले बच्चों का स्नेलन चार्ट के माध्यम से विजन टेस्ट किया जाएगा। यदि प्रारंभिक जांच में दृष्टि संबंधी दोष पाया जाता है, तो बच्चे की आगे की जांच ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन के माध्यम से की जाएगी। इस उपकरण से बच्चे की आंखों में रिफ्रैक्टिव एरर तथा चश्मे के संभावित नंबर का आकलन किया जाएगा। जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या पाई जाएगी, उन्हें आगे ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट/आई स्पेशलिस्ट के पास भेजा जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक की जांच के बाद यदि बच्चे को चश्मे की आवश्यकता होगी, तो चश्मे का नंबर निर्धारित किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार चश्मा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी।
अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों को इसमें शामिल किया गया है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में की टीमें कार्यरत हैं। कई ब्लॉकों में दो-दो टीमें हैं, जबकि नैना देवी ब्लॉक में एक टीम उपलब्ध है। ये टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी।
अन्य बताया कि वर्तमान में विभाग के पास एक ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन उपलब्ध है। अभियान को जिलेभर में प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रशासन द्वारा अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है और इनकी खरीद प्रक्रिया जारी है। अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध होने के बाद प्रत्येक ब्लॉक को एक-एक मशीन उपलब्ध करवाने की योजना है।
जब तक सभी मशीनें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक उपलब्ध मशीन को 15-15 दिन की शिफ्ट के आधार पर विभिन्न ब्लॉकों में भेजकर स्क्रीनिंग की जाएगी। संबंधित ब्लॉक की आरकेबीएस टीमें स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। मशीन उपलब्ध होने से पहले संबंधित टीमों को इसके संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सदर ब्लॉक की आरकेबीएस टीम को ऑटो-रिफ्रैक्टर मशीन के संचालन के लिए पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। टीम को मशीन के उपयोग और स्क्रीनिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अन्य ब्लॉकों की टीमों को भी मशीन उपलब्ध करवाने से पहले आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बच्चों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रभावी ढंग से की जा सके।
उन्होंने बताया कि मिशन दृष्टि के पायलट चरण में प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र और डीएवी स्कूल चंगर में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। डियारा में जांच किए गए 52 बच्चों में 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए, जबकि डीएवी स्कूल चंगर में करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग में लगभग 20 बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या अथवा रिफ्रैक्टिव एरर के संकेत मिले। पायलट चरण के इन परिणामों ने कम उम्र में नियमित नेत्र स्क्रीनिंग की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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सितंबर में बिलासपुर जिले में होंगे महत्वपूर्ण आंकड़ा संकलन
बिलासपुर 01 सितंबर: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के उप क्षेत्रीय कार्यालय हमीरपुर द्वारा सितंबर 2026 के दौरान बिलासपुर जिले के चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण सांख्यिकीय सर्वेक्षण किए जाएंगे। इन सर्वेक्षणों का उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी निर्माण और मूल्यांकन के लिए विश्वसनीय सांख्यिकीय आंकड़े एकत्रित करना है। यह जानकारी सहायक निदेशक रूपेश जालवाल ने दी।
उन्होंने बताया कि सितंबर माह में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण, प्रवासन सर्वेक्षण, ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण, स्थिति आकलन सर्वेक्षण तथा अनिगमित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का वार्षिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न विषयों से संबंधित सूचनाएं एकत्रित की जाएंगी। इन सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग देश और प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने तथा भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में किया जाता है।
सर्वेक्षण कार्य के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अधिकृत कनिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी, सर्वे प्रगणक एवं सर्वे पर्यवेक्षक चयनित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। अधिकारी एवं कर्मचारी वैज्ञानिक प्रतिदर्श पद्धति के आधार पर चयनित परिवारों एवं प्रतिष्ठानों से निर्धारित प्रश्नावली के माध्यम से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेंगे।
बिलासपुर जिले में सितंबर 2026 के दौरान उप मुहाल खैरियां लुहनु, टिहरी और हटवाड़ में सर्वेक्षण कार्य किया जाएगा। सहायक निदेशक ने लोगों से सर्वेक्षण दलों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाकर सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण के दौरान परिवारों एवं प्रतिष्ठानों से प्राप्त जानकारी को पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

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बिलासपुर में लोक अदालत का आयोजन 12 सितम्बर को
बिलासपुर, 01 सितम्बर: जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, बिलासपुर के सचिव प्रतीक गुप्ता ने जानकारी दी कि बिलासपुर जिला के विभिन्न न्यायालय परिसरों में आगामी 12 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी। यह लोक अदालत जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर बिलासपुर, घुमारवीं तथा झंडूता न्यायालय परिसरों में एक साथ आयोजित होगी।
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में पूर्व मुकदमेबाजी और लंबित मामलों को लिया जाएगा। इनमें बैंक से संबंधित विवाद, श्रम विवाद, बिजली एवं पानी के बिल, वैवाहिक विवाद तथा मोटर वाहन चालान से जुड़े मामले शामिल रहेंगे। मोटर व्हीकल चालान के मामलों को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से डिजिटल रूप से अथवा न्यायालय में आकर लोक अदालत से पूर्व भी निपटाया जा सकता है।
सचिव ने बताया कि जिन व्यक्तियों के उपरोक्त श्रेणियों में मामले न्यायालय में लंबित हैं, वे अपने मामलों को लोक अदालत में लगवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कोई भी इच्छुक व्यक्ति जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन नहीं है, वह भी आवेदन प्रस्तुत कर आपसी समझौते के आधार पर विवाद निपटान हेतु लोक अदालत में अपना मामला लगवा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति मुफ्त कानूनी सहायता या सलाह प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकता है टोल फ्री नंबर 15100 (हि. प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, शिमला), जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, बिलासपुर का नंबर 01978-221452, उपमंडलीय विधिक सेवा समिति, बिलासपुर का नंबर 01978-224887 तथा उपमंडलीय विधिक सेवा समिति, घुमारवीं का नंबर 01978-254080 है।
इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या ई-मेल Secy-dlsa-bil-hp@gov.inपर भेज सकता है या राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण, नई दिल्ली की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।
अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-221452 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।