• मंडी, 3 अप्रैल। राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां संस्कृति सदन में वन अधिकार अधिनियम, 2006 (एफआरए) के विभिन्न पहलुओं पर आयोजित जागरूकता कार्यशाला की अध्यक्षता की। जनजातीय विकास विभाग के सौजन्य से आयोजित इस एक दिवसीय मंडल स्तरीय कार्याशाला में मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर तथा लाहौल-स्पिति जिला के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में मंडी मंडल के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों से विधायक अनिल शर्मा, चंद्रशेखर, राकेश जमवाल, इंद्र सिंह, सुरेंद्र शौरी, भुवनेश्वर गौड़, पूर्णचंद ठाकुर व दिलीप ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 जिसे आम तौर पर एफआरए कहा जाता है, वनों पर आजीविका के लिए आश्रित वर्गों को कई अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पूर्व वन भूमि पर लगातार तीन पीढ़ियों से जो अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं, ऐसे व्यक्ति ग्राम सभा के माध्यम से अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं। उनको इसका तय समय सीमा के भीतर अधिकार मान्यता पत्र देकर लाभान्वित किया जाएगा। प्राप्त वन अधिकार पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में जाएंगे हालांकि यह अधिकार किसी को बेचे या हस्तांतरित नहीं किए जा सकते।

बैठक में मंत्री ने स्वयं वन अधिकार अधिनियम की बारीकियों से अधिकारियों को अवगत करवाया। उन्होंने उपमंडलाधिकारियों (ना.) से वन अधिकार अधिनियम को लेकर उनके द्वारा किए गए कार्यों की भी जानकारी प्राप्त की। राजस्व मंत्री ने इस दौरान बताया कि वन अधिकार कानून के अंतर्गत वन भूमि पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने के लिए निर्धारित फार्म पर अभी भी दावा किया जा सकता है। शर्त यह है कि दावेदार उस भूमि पर 13 दिसंबर, 2005 से पहले तीन पुश्तों से खेती कर रहा हो, आवास कर रह रहा हो, उस भूमि से घास ले रहा हो या भेड़ बकरी का पालन कर रहा हो, तो वह मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकता है।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह कानून वन भूमि पर अवैध कब्जे के लिए नहीं बल्कि वन भूमि में गुजारा कर रहे पात्र लोगों को उस भूमि की वन अधिकार मान्यता पत्र देने के लिए है। उन्होंने इस दौरान सभी एसडीएम जो उपमंडल स्तरीय समिति के अध्यक्ष भी हैं, को उनके क्षेत्राधिकार में सभी ग्राम सभा एवं वन अधिकार समितियों (एफआरसी) के साथ 31 मई से पहले बैठक करने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। राजस्व मंत्री ने कहा कि सभी पंचायतों में वन अधिकार समितियां गठित करना अनिवार्य है। समितियों को इस अधिनियम की जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष प्रचार अभियान चलाया जाएगा।

उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करेगी दावों का निपटारा

ग्राम सभा सभी अनुमोदित मामले सत्यापन के लिए उपमंडल स्तरीय समिति को भेजेगी। उपमंडल स्तरीय समिति सभी मामलों के सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति दावों का निपटारा और दस्तावेजीकरण कर स्वीकृति देगी जिसके बाद दावेदार को वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया जाएगा।

धर्मपुर से विधायक चंद्रशेखर ने प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस कानून के बेहतर क्रियान्वयन से वंचित वर्गों के लोगों को राहत मिलेगी और वन भूमि से उनकी बेदखली की चिंता समाप्त होगी। उन्होंने इस तरह की कार्यशालाएं उपमंडल स्तर भी आयोजित करने तथा इनमें खंड विकास अधिकारियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया।

गैर सरकारी संगठनों के पदाधिकारियों ने भी सरकार की इस पहल को उत्कृष्ट करार देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह क्रांतिकारी कदम उठाकर एक ऐतिहासिक कार्य कर रही है। उन्होंने वन अधिकार समितियों एवं गैर सरकारी संगठनों में और बेहतर समन्वय का भी सुझाव दिया।

इससे पूर्व उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने राजस्व मंत्री सहित सभी उपस्थित जनों का स्वागत किया।

इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य चंपा ठाकुर, एचपीएमसी निदेशक मंडल के जोगेंद्र गुलेरिया, राज्य सहकारी समिति के निदेशक मंडल के सदस्य लाल सिंह कौशल, पूर्व प्रत्याशी नरेश चौहान, सराज से कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, उपायुक्त कुल्लू तोरुल रविश, उपायुक्त हमीरपुर अमरजीत सिंह, जनजातीय विकास विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. विक्रम सिंह नेगी एवं संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान सहित संबंधित जिलों से एसडीएम, वन मंडलाधिकारी, राजस्व विभाग के अधिकारी, वन अधिकार की जिला स्तरीय समिति और उपमंडल स्तरीय समिति के सदस्य उपस्थित थे।