रोहतक-9 फरवरी 2026, -दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा), रोहतक में सोमवार को चार दिवसीय ‘भारंगम’ व ‘सारंग’ महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भोजपुरी गायक एवं सांसद मनोज तिवारी ने अपने लोकप्रिय गीतों से समां बांध दिया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ ‘सारंग’ महोत्सव शाम 5 बजे तक चला, जिसमें यूनिवर्सिटी के एफटीवी विभाग स्थित कोर्ट यार्ड में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। ‘भारंगम’ का आयोजन मिनी ऑडिटोरियम में शुरू हुआ, जिसे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा करा रहा है। इसके तहत शाम के समय थियेटर ‘उम्मीद : मनुष्य जिंदा है’ का मंचन किया गया। मनोज तिवारी ने अपने गीतों में डीएलसीसुपवा का उल्लेख करते हुए कुलगुरु डॉ. अमित आर्य से उन्हें बार-बार विश्वविद्यालय में आमंत्रित करने का आग्रह भी किया।

*‘भारंगम’ व ‘सारंग’ महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए सुबह से ही अतिथियों का आगमन शुरू हो गया था। कुलगुरू डॉ अमित आर्य ने अपनी टीम के साथ अतिथियों का स्वागत किया। सबसे पहले अतिथियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में स्थापित सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद ‘भारंगम’, ‘सारंग’ महोत्सव व यूनिवर्सिटी के झंडे फहराए और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान सांसद मनोज तिवारी के साथ प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा, ओलंपिक पदक विजेता रेसलर योगेश्वर दत्त, पहलवान व मॉडल संग्राम सिंह, एनएसडी के वरिष्ठ रंगकर्मी विद्यानिधि, रोहतक के डीसी सचिन गुप्ता, फिल्म निर्माता अतुल गंगवार, हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया व समाजसेवी सुभाष आहुजा मुख्य रूप से मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने यूनिवर्सिटी गैलरी में लगी फोटो प्रदर्शनी का जायजा लिया। मनोज तिवारी वहां पर बनी रंगोली को देखकर काफी प्रभावित हुए और उसका निर्माण करने वाली टीम को बधाई दी। यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा ने मंच से अतिथियों का सभी से परिचय कराया। कुलगुरू डॉ अमित आर्य ने अपनी टीम के साथ सभी अतिथियों को शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

*सौभाग्यशाली हैं सुपवा के छात्र : मनोज तिवारी
सांसद मनोज तिवारी ने अपने संबोधन के दौरान कई भोजपुरी गीतों की लाइनें प्रस्तुत की, जिस पर दर्शक व छात्र झूमने पर मजबूर हो गए। उन्होंने कहा कि पंचायत वेब सीरीज का गीत 'हे राजा जी एकरे त रहल जरूरत मुहूर्त खूबसूरत हो' बिहार की माटी से निकला हुआ गीत है। जिस तरह हरियाणा में दादा लख्मी चंद की लेखनी व उनके लोकगीत प्रसिद्ध हैं, उसी तरह बिहार में भी बहुत से पुराने लोकगीत आज दुनिया भर में ट्रेंड कर रहे हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी जड़ों व मिट्टी से मिली सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक कला के साथ जोड़कर प्रस्तुत करने की जरूरत है। जब हम संघर्ष कर रहे थे तो उस समय लगता था कि कोई हमें गायन, अभिनय व नृत्य की बारीकियां सिखाए, लेकिन उस समय इतने साधन नहीं थे। आप लोग सौभाग्यशाली हैं कि डीएलसीसुपवा जैसे संस्थान के छात्र हैं, जहां पर सीख कर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इस दौरान उन्होंने ‘ही ही ही हंस देले रिंकिया के पापा’ और छठी मैया से संबंधित गीत प्रस्तुत किया, जिसमें सुपवा शब्द को जोड़ा। इस गीत के माध्यम से उन्होंने यूनिवर्सिटी में बार-बार आमंत्रित करते रहने का आग्रह कुलगुरू डॉ अमित आर्य से किया। उन्होंने कहा कि “अमित बाबू से सुपवा में ई निवेदन बा कि मनोजवा फिर-फिर बार-बार आवे से बतूनिया।” उन्होंने विश्व के सबसे बड़े थियेटर फेस्टिवल ‘भारंगम’ और ‘सारंग’ महोत्सव के आयोजन के लिए यूनिवर्सिटी को बधाई दी।

*देश के कई बड़े संस्थानों से बेहतर है सुपवा : यशपाल शर्मा

अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि डीएलसीसुपवा में इतना बड़ा इंटरनेशनल थियेटर फेस्टिवल ‘भारंगम’ हो रहा है, जो एक बड़ी बात है। 9 फरवरी का दिन यूनिवर्सिटी के इतिहास में जरूर लिखा जाएगा। कुलपति डॉ अमित आर्य ने सुपवा को फिर से जिंदा कर दिया है। यहां की रौनक अब फिर से लौट आई है। मुझे लगता है कि सुपवा पुणे स्थित एफटीआईआई से भी बेहतर है। यहां की सुविधाओं का फायदा छात्रों को उठाना चाहिए। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पर वाइस चांसलर व अन्य स्टाफ हमेशा छात्रों के बीच ही रहते हैं। छात्रों को अपनी परेशानियों के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने छात्रों को क्रिएटिविटी व अच्छी सोच के साथ करने की सलाह दी। पहलवान संग्राम सिंह ने छात्रों को कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी व कलाकारों को बेहतर बनने के लिए क्रेजी बनाने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि अगर इतने बेहतर संस्थान में आकर भी कुछ नहीं सीखा तो उसके बाद सीखने के लिए कुछ मिलेगा भी नहीं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए संस्थान को बधाई दी।

*कथक व यूनिवर्सिटी के ‘रंग-संगीत’ ने बांधा समां

सारंग की पहली प्रस्तुति डीएलसीसुपवा की छात्रा निष्ठा ने दी, उन्होंने वंदे मातरम गीत पर शास्त्रीय नृत्य कथक प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। वहीं, यूनिवर्सिटी के 14 छात्रों ने पिछले एक सप्ताह में देवेंद्र अहिरवार के निर्देशन में तैयार किए गए ‘रंग-संगीत’ को प्रस्तुत पर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। इस गीत को छात्रों ने आपसी बातचीत व संवाद के माध्यम से खुद तैयार किया। सुर, आवाज व गति के समावेश गीतों का शानदार फ्यूजन दर्शकों को सुनने के लिए मिला। छात्रों ने बीच-बीच में गीतों व कविताओं की प्रस्तुति भी दी।

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