चंडीगढ़, 14 अगस्त 2026: भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ प्रदेश कार्यालय ‘कमलम’, सेक्टर-33 में आज विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर 14 अगस्त 1947 को भारत के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लाखों निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि दी गई तथा विभाजन का दंश झेलने वाले परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और विस्थापन को याद किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी संजय टंडन, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू तथा प्रदेश महामंत्री रामवीर भट्टी ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने 14 अगस्त 1947 के विभाजन के समय की भयावह, दुखद और दर्दनाक परिस्थितियों को जीवंत कर दिया। नाटक के माध्यम से विस्थापन, अपनों से बिछड़ने, घर-बार उजड़ने और विभाजन की हिंसा का दंश झेलने वाले लोगों की पीड़ा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और विभाजन की त्रासदी की भयावह स्मृतियों को सामने ला दिया।
जतिंदर पाल मल्होत्रा ने कहा—
14 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब विभाजन की घोषणा के साथ देश ने ऐसी भीषण त्रासदी देखी, जिसकी पीड़ा आज भी करोड़ों परिवारों की स्मृतियों में जीवित है। तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की सत्ता और प्रधानमंत्री पद को लेकर राजनीतिक महत्वाकांक्षा तथा सत्ता हस्तांतरण की जल्दबाजी ने देश को ऐसी परिस्थितियों में पहुंचा दिया, जिनका सबसे भयावह परिणाम विभाजन के रूप में सामने आया।
उन्होंने कहा कि सत्ता प्राप्त करने की जल्दबाजी में राष्ट्रीय हितों और सामाजिक परिस्थितियों की गंभीरता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप लाखों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और करोड़ों लोग अपने घर, जमीन-जायदाद और मातृभूमि से विस्थापित होने को मजबूर हुए।
विभाजन की हिंसा में मृतकों की संख्या के अलग-अलग ऐतिहासिक अनुमान हैं, जिनमें लगभग 10 से 15 लाख लोगों के मारे जाने का उल्लेख मिलता है। यह आंकड़ा उस भयावह मानवीय त्रासदी की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस इतिहास को राजनीतिक सुविधा के अनुसार भुलाने का नहीं, बल्कि उससे सबक लेकर भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत करने का दिन है।
संजय टंडन ने कहा—
विभाजन केवल देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, परिवारों और भावनाओं के बिखरने की त्रासदी थी। तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व की सत्ता-केंद्रित सोच और जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों की कीमत आम जनता को अपने खून और आंसुओं से चुकानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि लाखों परिवार अपने घर-बार, जमीन-जायदाद और अपनों को छोड़कर शरणार्थी बनने को मजबूर हुए। इसके बावजूद विस्थापित परिवारों ने अदम्य साहस, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के साथ नए सिरे से अपना जीवन खड़ा किया तथा भारत के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित किसी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर होना चाहिए और भारत की एकता एवं अखंडता से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
सतनाम सिंह संधू ने कहा—
विभाजन की विभीषिका को याद करना किसी समुदाय के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास के उस कड़वे सत्य को स्वीकार करना है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका थी, के राजनीतिक निर्णयों और सत्ता हस्तांतरण की जल्दबाजी का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा। विभाजन के कारण लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए और करोड़ों लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य को सुरक्षित करना है। नई पीढ़ी को विभाजन की वास्तविक पीड़ा और विस्थापित परिवारों के संघर्ष से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता सदैव सर्वोच्च बनी रहे।
रामवीर भट्टी ने कहा—
विभाजन विभीषिका दिवस उन अनगिनत परिवारों के त्याग, पीड़ा और संघर्ष को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने इतिहास की सबसे कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की सत्ता की राजनीति तथा प्रधानमंत्री पद को लेकर दिखाई गई जल्दबाजी का खामियाजा आम भारतीयों को भुगतना पड़ा।
उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद विस्थापित परिवारों ने शून्य से अपना जीवन शुरू किया और अपने परिश्रम से देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखने का उद्देश्य किसी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में राजनीतिक स्वार्थ कभी भी राष्ट्रहित से बड़ा न हो। भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत रखना ही विभाजन के पीड़ितों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के दौरान 14 अगस्त 1947 की विभाजन त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई तथा विस्थापित परिवारों के संघर्ष, त्याग और योगदान को नमन किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, प्रदेश उपाध्यक्ष दविंदर सिंह बबला, भारत कुमार, इंदिरा सिंह सहित अन्य प्रदेश पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश ने इस अवसर पर देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत बनाने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प दोहराया।