PANCHKULA, 29.08.26-उन्होंने कहा कि जो चीनी कुछ समय पहले ₹ 35–40 प्रति किलो मिल रही थी, वह देखते ही देखते करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई। आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ रहा है, लेकिन सरकार से सवाल पूछने पर जनता को वास्तविक जवाब देने के बजाय तरह-तरह के तर्क सुनने को मिल रहे हैं।
तलविंदर सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा , “जब जनता BJP के नेताओं से महंगी चीनी और महंगे पेट्रोल का हिसाब मांगती है, तो कुछ नेता जवाब देने के बजाय कहते हैं कि पान मसाला ₹25 में 4 ग्राम मिलता है, उससे किसी को परेशानी नहीं होती! कोई कहता है चीनी से शुगर बढ़ती है, इसलिए कम खाओ। जनता महंगाई पूछ रही है और साहब ज्ञान बांट रहे हैं!”
उन्होंने कहा कि महंगाई का सवाल किसी व्यक्ति की पसंद या खान-पान का सवाल नहीं है, बल्कि आम परिवार के घरेलू बजट का सवाल है। अगर कोई व्यक्ति चीनी खरीदता है तो सरकार को यह बताना चाहिए कि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार क्यों बढ़ रही हैं।
एथेनॉल पर सवाल उठाते हुए तलविंदर सिंह ने कहा, “जब एथेनॉल ब्लेंडिंग की बात शुरू हुई थी, तब पेट्रोल सस्ता होने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। ₹25 प्रति लीटर तक पेट्रोल पहुंचने जैसी बातें जनता ने सुनी थीं। आज जनता पेट्रोल की कीमत खुद अपनी जेब से चुका रही है—तो वह सस्ता पेट्रोल वाला सपना आखिर कहां गया?”
उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ E20 को बढ़ावा दिया जा रहा है, दूसरी तरफ चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और चीनी आयात की नौबत तक चर्चा में है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन नीतियों का वास्तविक लाभ किसान और उपभोक्ता तक किस तरह पहुंच रहा है।
तलविंदर सिंह ने तीखे शब्दों में कहा, “जनता को भाषण नहीं, राहत चाहिए। पान मसाले और चीनी की तुलना करके महंगाई के सवाल को टालना जवाब नहीं है। जनता इतनी भी भोली नहीं कि हर सवाल का जवाब ऐसे हास्यास्पद तर्कों से मान ले।”
उन्होंने कहा, “जो सरकार जनता के हितों, उसकी रसोई और उसकी जेब का ध्यान नहीं रख सकती, उसे सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए सत्ता से चिपके रहने का कोई औचित्य नहीं है। लोकतंत्र में कुर्सी जनता देती है और जनता ही समय आने पर हिसाब भी लेती है।”