*संगठन की ताकत केवल बैठकों में नहीं, जनता के बीच सक्रिय संघर्ष और जनसमस्याओं के समाधान में दिखाई देनी चाहिए : डॉ. बिंदल**
**कुल्लू।** भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कुल्लू में आयोजित संगठनात्मक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पूरी ऊर्जा, समर्पण और सक्रियता के साथ जनता के बीच कार्य करे। उन्होंने कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति केवल बैठकों और कार्यालयों तक सीमित रहने में नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में भागीदार बनने, जनसमस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए संघर्ष करने में है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए समय तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रत्येक दिन संगठन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब केवल इनडोर बैठकें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं को गांव, पंचायत, मंडल और बूथ स्तर पर जनता के बीच जाकर कांग्रेस सरकार की विफलताओं को उजागर करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक मंडल में हर महीने कम से कम एक प्रभावी जनप्रदर्शन आयोजित किया जाए तथा पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी नियमित रूप से जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता टूटी सड़कों, बंद होते शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की कमी, बिजली के भारी बिलों तथा मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान है। इन समस्याओं को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं को स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पंचायत में सड़क खराब है, कहीं स्कूल बंद हुआ है, कहीं स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं है तो इन समस्याओं को लेकर संबंधित क्षेत्र में जनआंदोलन खड़ा किया जाना चाहिए।
डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रत्येक मंडल को आगामी तीन जनप्रदर्शनों की रूपरेखा पहले से तैयार करनी चाहिए। प्रदर्शन केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें स्थानीय जनता की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, जनजातीय मोर्चा और अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा सहित सभी संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय करने पर जोर दिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन के डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि आज सोशल मीडिया जनसंवाद का अत्यंत प्रभावी माध्यम बन चुका है। प्रत्येक बूथ पर आईटी कार्यकर्ता की सक्रियता सुनिश्चित की जाए तथा बूथ स्तर के व्हाट्सएप समूहों को नियमित रूप से संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों पर प्रकाशित सामग्री को प्रत्येक कार्यकर्ता अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाए। इसके साथ स्थानीय जनसमस्याओं, विकास कार्यों और जनहित के विषयों पर तथ्यात्मक वीडियो, रील और अन्य डिजिटल सामग्री भी तैयार की जाए।
डॉ. बिंदल ने कहा कि संगठनात्मक कार्यों में नियमितता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक महीने के प्रथम सप्ताह में जिला बैठक, दूसरे सप्ताह में मंडल बैठक, तीसरे सप्ताह में ग्राम केंद्र बैठक तथा चौथे सप्ताह के अंतिम रविवार को बूथ बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि बूथ बैठकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' को सामूहिक रूप से सुना जाए तथा इसके बाद स्थानीय राजनीतिक और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की जाए।
उन्होंने कुल्लू में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे एवं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के प्रस्तावित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने सभी मंडलों और विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारियों से कार्यक्रम में व्यापक कार्यकर्ता भागीदारी सुनिश्चित करने तथा निर्धारित संगठनात्मक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने का आह्वान किया।
डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार हुआ है, प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले हैं तथा एम्स बिलासपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान ने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी प्रत्येक घर तक पहुंचाना कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने प्रदेश की जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज जनता स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, दूध खरीद की गारंटी तथा अन्य चुनावी घोषणाओं को लेकर सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दिसंबर 2022 में सत्ता संभाली थी और महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये देने का वादा किया था। इस हिसाब से 48 महीनों में प्रत्येक पात्र महिला के लिए 72,000 रुपये की राशि बनती है, जबकि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला और कितनी महिलाएं आज भी इससे वंचित हैं।
डॉ. बिंदल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के अंतर्गत उपचार एवं भुगतान संबंधी समस्याओं से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की उपलब्धता तथा मरीजों के उपचार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली के बढ़ते बिलों, शिक्षण संस्थानों के बंद होने, सरकारी सेवाओं में कटौती और बढ़ते कर्ज को लेकर जनता में असंतोष है। कांग्रेस सरकार को अपनी गारंटियों और प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
डॉ. बिंदल ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के भविष्य और विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर होगा। भाजपा को प्रत्येक बूथ पर मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ताओं और व्यापक जनसंपर्क के माध्यम से विजय का लक्ष्य प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनें, केंद्र सरकार की उपलब्धियों को सामने रखें और कांग्रेस सरकार से उसके चुनावी वादों का हिसाब मांगें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यकर्ताओं की मेहनत, संगठन की एकजुटता और जनता के सहयोग से भाजपा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में विजय प्राप्त कर हिमाचल प्रदेश को पुनः विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
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कुल्लू भाजपा संगठन: जन-प्रदर्शन, डिजिटल नेटवर्क और चुनावी लक्ष्य
यह बैठक संगठन को सक्रिय करने, नियमित जन-प्रदर्शन और डिजिटल प्रचार बढ़ाने, तथा आगामी चुनाव के लिए कार्यकर्ता-संगठन व समर्थन जुटाने के लक्ष्यों पर केंद्रित थी।
नियमित जन-प्रदर्शन और स्थानीय मुद्दे
जिले या मंडल में 150–300 लोगों का दो घंटे का प्रदर्शन, नारेबाज़ी और उसके बाद मीडिया तथा सोशल मीडिया प्रचार प्रभाव पैदा कर सकता है; बदलाव केवल संगठनात्मक बैठकों से नहीं आएगा।
चुनाव घोषित होने में लगभग 10 महीने शेष होने की बात कही गई; इस अवधि में सार्वजनिक कार्यक्रमों के बजाय केवल इनडोर बैठकें करना पर्याप्त नहीं होगा।
हर मंडल में हर महीने एक प्रदर्शन और संयुक्त मोर्चों का भी हर महीने एक प्रदर्शन कराने का निर्देश दिया गया।
प्रदर्शन स्थानीय समस्याओं पर हों—जैसे टूटी सड़क, बंद स्कूल, डॉक्टर या दवाइयों की कमी, पशु-चिकित्सा सेवा का अभाव या अन्य जन-मांगें। एक मंडल की 10 पंचायतों में 10 महीनों में अलग-अलग प्रदर्शन करने का उदाहरण दिया गया।
कार्यक्रम को औपचारिकता न बनाकर प्रभावी ढंग से आयोजित करने पर जोर था: कार्यकर्ता और प्रभावित स्थानीय लोग शामिल हों, जनता अपनी आवाज़ उठाए और कार्यक्रम के बाद रील/सोशल मीडिया सामग्री बने।
अगले तीन प्रदर्शनों की योजना पहले से तय करने और पंचायत-स्तर के स्थानीय नेताओं को तैयारी की जिम्मेदारी देने को कहा गया। प्रदर्शन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में घुमाए जाएँ।
मोर्चों की सक्रियता कम बताई गई; युवा, महिला, किसान, SC, Tribal और OBC मोर्चों तथा मंडल स्तर के प्रकोष्ठों को मजबूत करने की बात कही गई। अगला प्रदर्शन किसान मोर्चे के नेतृत्व में होना था।
IT और सोशल मीडिया की संगठनात्मक जिम्मेदारी
IT संयोजक से अपने मंडल के 54 पोलिंग बूथों के IT कार्यकर्ताओं को जोड़ने, उनके साथ तकनीक पर बैठक करने और बूथ-स्तर के WhatsApp समूहों की सक्रियता जाँचने को कहा गया।
प्रत्येक बूथ पर एक IT कार्यकर्ता सुनिश्चित करने और सभी WhatsApp समूहों में जुड़े लोगों के नंबर सक्रिय होने की पुष्टि करने का निर्देश था। चुनाव से ठीक पहले संदेश बूथ कार्यकर्ताओं तक न पहुँचना प्रचार-प्रसार को विफल कर सकता है।
जिला अध्यक्ष से IT कार्य की निगरानी के लिए एक पदाधिकारी नियुक्त करने को कहा गया; प्रदेश कार्य समिति के सदस्यों से अभियानों में प्रतिनिधि के रूप में सहयोग अपेक्षित बताया गया।
रात 8:30 बजे मिले फोन के बाद शिमला में महिला मोर्चे के प्रदर्शन की तैयारी का उदाहरण दिया गया: 9:30 बजे सोलन, शिमला और महासू जिलों की VC बैठक हुई, गाड़ियाँ तय हुईं और जिला अध्यक्षों तथा महिला मोर्चा अध्यक्ष से उपस्थिति की निगरानी की गई। प्रदर्शन के लिए 300–400 महिलाओं की संख्या का उल्लेख हुआ।
पार्टी के आधिकारिक पेजों के साथ स्थानीय और third-party पेजों का उपयोग हो सकता है, लेकिन पार्टी पेजों पर निर्भरता और सहभागिता जरूरी बताई गई। हिमाचल प्रदेश भाजपा पेज को हर कार्यकर्ता से like और share करने को कहा गया।
पार्टी पेज पर रोज़ 9–10 पोस्ट आने की बात कही गई: 3 केंद्र से जुड़ी सामग्री, 3–4 प्रदेश नेताओं की पोस्ट और 2–3 अन्य पोस्ट। कार्यकर्ताओं और नेताओं से पोस्ट को like, share और comment करने की अपेक्षा रखी गई।
स्थानीय मुद्दों पर खुद सामग्री बनाने पर जोर था: टूटी सड़क या गड्ढों की वीडियो, प्रभावित व्यक्ति का बयान और लाभार्थियों की रीलें। कम शुरुआती views या likes से निराश न होकर Instagram, Facebook या अन्य उपलब्ध प्लेटफॉर्म पर सामग्री डालने को कहा गया।
बैठक-चक्र और कार्यक्रमों की जवाबदेही
मासिक संगठनात्मक क्रम तय किया गया:
पहले सप्ताह में जिला बैठक
दूसरे सप्ताह में मंडल बैठक
तीसरे सप्ताह में ग्राम केंद्र बैठक
चौथे सप्ताह के अंतिम रविवार को बूथ बैठक
बूथ बैठक के साथ मन की बात सुनने और आधा घंटा राजनीतिक चर्चा करने की बात कही गई; दोनों गतिविधियों को अलग-अलग upload करना था।
मंडल और जिला स्तर पर हर अभियान में सहयोग तथा सोशल मीडिया के लिए कार्यकर्ता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बताई गई—सिर्फ सोशल मीडिया टीम की नहीं।
कुल्लू में राष्ट्रीय नेता के कार्यक्रम के लिए उपस्थिति लक्ष्य
कुल्लू में अगले दिन जे. पी. नड्डा के संबोधन को जिले के कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा और संगठन को सक्रिय करने का अवसर बताया गया। संख्या के लक्ष्य वास्तविक रूप से तय करने और पहुँच की गिनती करने पर जोर था।
कुल्लू विधानसभा के तीन मंडलों के लिए कुल 1,000 लोगों का लक्ष्य रखा गया; एक मंडल का लक्ष्य 200 से बढ़ाकर 300 करने को कहा गया।
बंजार विधानसभा के चार मंडलों के लिए 500 लोगों का लक्ष्य तय किया गया और सहप्रभारी से संख्या की रिपोर्ट माँगी गई।
आनी विधानसभा का लक्ष्य 220 बताया गया। इसकी गणना में तीन मंडलों के 75 पदाधिकारी, मोर्चों के पदाधिकारी, जिला/प्रदेश स्तर के लोग और विधायक की ओर से आने वाले लोगों को शामिल किया गया; माने बिहारी से गणना जाँचने को कहा गया।
कुल्लू के लिए 1,000, बंजार के लिए 500 और आनी के लिए 220 का जोड़ 1,720 हुआ; मनाली का लक्ष्य अलग से तय होने की बात कही गई।
अकेले कार्यक्रम में जाने के बजाय नेताओं से अपने साथ लोगों को लाने की अपेक्षा रखी गई। वाहन और टीमों की व्यवस्था कर निर्धारित संख्या पूरी करने को कहा गया।
चुनावी संदेश और सरकारी योजनाओं पर उठाए गए मुद्दे
जीत के लिए केवल दूसरे स्थान पर आना पर्याप्त नहीं—चुनाव को जीत या हार के रूप में पेश किया गया। 51% मतों के बिना जीत की उम्मीद न करने और बैठक में पहले बताए गए 55% लक्ष्य का उल्लेख हुआ।
हिमाचल में सड़क-संपर्क और बुनियादी ढाँचे को भाजपा सरकार के काम के रूप में प्रचारित करने की बात हुई। वक्ता ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कुल 45,000 किलोमीटर सड़कों और 20,000 किलोमीटर के एक अन्य उल्लेख का दावा किया; साथ ही 1,12,000 पक्के मकान, अलग-अलग क्षेत्रों में 1,200 और 1,450 मकानों तथा एक सड़क के लिए ₹464 करोड़ का जिक्र किया।
AIIMS बिलासपुर को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के उदाहरण के रूप में पेश किया गया। इसके विपरीत मेडिकल कॉलेजों के अधूरे काम और हिम केयर कार्ड बंद होने की आलोचना की गई।
हिम केयर और आयुष्मान कार्ड, सहारा योजना तथा इलाज के खर्च को घर-घर तक पहुँचाने योग्य मुद्दे बताया गया। PGI ICU में भर्ती 12 साल के बच्चे के लिए रोज़ ₹18,000 के injection का उदाहरण दिया गया।
बिजली बिल, सरकारी सेवाओं, स्कूलों/कॉलेजों/PHC के बंद होने और डॉक्टरों की कमी को स्थानीय मुद्दों के रूप में उठाने को कहा गया; ₹1,06,500 के बिजली बिल का उदाहरण भी दिया गया।
महिलाओं को दिसंबर 2022 से मिलने का वादा किए गए ₹1,500 प्रति माह का मुद्दा उठाने को कहा गया। वक्ता ने 48 महीनों के हिसाब से ₹72,000 और अगले वर्ष ₹90,000 का दावा रखते हुए इसे महिलाओं का हक बताकर प्रचारित करने का निर्देश दिया।
चुनावी वादों में ₹100 लीटर दूध, 300 यूनिट बिजली, सरकारी नौकरियाँ और पेंशन का उल्लेख हुआ। कांग्रेस सरकार पर वादे पूरे न करने, ₹45,000 करोड़ का कर्ज लेने और सार्वजनिक सेवाओं में कमी के आरोप लगाए गए।
कार्यकर्ताओं से इन दावों और स्थानीय मुद्दों को बूथ तथा घर-घर तक पहुँचाने और संगठन के सभी मोर्चों, प्रकोष्ठों व बूथ टीमों को सक्रिय रखने का आह्वान किया गया।