कुपोषित बच्चों के सही पोषण के लिए भोरंज में विशेष अभियान
छोटे बच्चों को दिए जाएंगे पौष्टिक गुणों से भरपूर रागी के लड्डू
डीसी गंधर्वा राठौड़ ने लदरौर और मुंडखर में महिलाओं को किया जागरुक
भोरंज 04 जून। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा है कि किसी भी बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन यानि गर्भ से लेकर उसके दूसरे जन्मदिन तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान उसके मस्तिष्क एवं शरीर का सर्वाधिक विकास होता है। अगर इस दौरान बच्चे का सही पोषण सुनिश्चित किया जाए तो वह भविष्य में स्वस्थ जीवन जी सकता है।
वीरवार को भोरंज उपमंडल की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लदरौर और मुंडखर में पोषण अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित जागरुकता कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं, आंगनवाड़ी और आशा वर्करों को संबोधित करते हुए गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि बच्चे के सही पोषण के लिए मां का जागरुक होना बहुत जरूरी है। छह माह तक बच्चे को केवल मां का दूध देना और छह माह के बाद मां के दूध के साथ-साथ बच्चे को अन्य पौष्टिक आहार देने के बारे में मां को सही जानकारी होनी चाहिए।
उपायुक्त ने बताया कि हमारे कई पारंपरिक व्यंजन एवं मोटे अनाज आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हें दैनिक आहार में शामिल करके बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भोरंज उपमंडल में लगभग 454 बच्चे कम वजन वाले तथा कुपोषित पाए गए हैं। भोरंज उपमंडल में कुपोषण को रोकने और बच्चों का सही पोषण सुनिश्चित करने के लिए पायलट आधार पर न्यूट्रिशनल इंटरवेंशन (पोषण हस्तक्षेप) कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत छोटे बच्चों को पौष्टिक गुणों से भरपूर रागी के लड्डू दिए जाएंगे। उपायुक्त ने रागी के लड्डुओं के वितरण एवं इनके पौष्टिक गुणों के बारे में भी महिलाओं के साथ व्यापक चर्चा की।
इस अवसर पर एडीसी अभिषेक गर्ग, सीएमओ डॉ. अजय अत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग के डीपीओ अनिल कुमार, सीडीपीओ सुनील कुमार ने भी महिलाओं का मार्गदर्शन किया। सिद्धबाड़ी, धर्मशाला की स्वयंसेवी संस्था चिन्मय ग्रामीण विकास संगठन (कॉर्ड) के विशेषज्ञों अनिता ठाकुर और सुनील कुमार ने रागी के लड्डुओं तथा अन्य पौष्टिक व्यंजनों की जानकारी दी।