धर्मशाला, 16 जनवरी : आज डीआरडीए के सभागार में जिला की वर्ष 2025-26 की वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत सितंबर 2025 तक की उपलब्धियों एवं प्रगति की समीक्षा हेतु जिला स्तरीय सलाहकार समिति, जिला समन्वय समिति तथा जिला स्तरीय समीक्षा समिति की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिले में कार्यरत सभी बैंकों द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार की गरीबी उन्मूलन योजनाओं के अंतर्गत की गई प्रगति तथा वार्षिक ऋण योजना 2025-26 के तहत सितंबर 2025 तक निर्धारित लक्ष्यों एवं उपलब्धियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने की।
अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी बैंकों को ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने तथा शिक्षा ऋण और कृषि ऋण के वितरण में वृद्धि के निर्देश दिए। विनय कुमार कहा कि कि बैंक जिले के आर्थिक विकास में अपनी भूमिका को समझते हुए प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में ऋण प्रवाह को और अधिक बढ़ाएं, जिससे आम जनता का आर्थिक स्तर सुदृढ़ हो सके। उन्होंने बैंकों, विभागों एवं अन्य हितधारकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आपसी समन्वय से बुनियादी ढांचे की कमी को दूर कर वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है, जिससे जिले के समग्र विकास को गति मिलेगी।
इस अवसवर पंजाब नेशनल बैंक के अग्रणी जिला प्रबंधक काँगड़ा पृथ्वी रणवीर ने बताया कि जिला काँगड़ा के लिए वार्षिक ऋण योजना 2025-26 (01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के अंतर्गत 8945.20 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष सितंबर तिमाही के अंत तक बैंकों द्वारा 4474.68 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया, जो लक्ष्य का 50.02 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 तक जिले में सभी बैंकों द्वारा कुल 47,978.92 करोड़ रुपये की जमा राशि एकत्र की गई है, जबकि 12,183.31 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। इस प्रकार जिले का ऋण-जमा अनुपात 25.39 प्रतिशत रहा है। ऋण-जमा अनुपात में सुधार हेतु सभी बैंकों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में सितंबर 2025 तक प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में बैंकों ने 36.67 प्रतिशत, जबकि गैर-प्राथमिकता क्षेत्र में 162.04 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है।
बैठक में बताया गया कि सितंबर 2025 तक कृषि क्षेत्र में 1718.21 करोड़ रुपये तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में 3577.17 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। जिले की शेष पात्र कृषक आबादी को भी केसीसी जारी करने हेतु सभी बैंक शाखाओं को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
इस अवसर पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक हिमांशु साहू ने किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों के लिए ऋण प्रवाह सुदुढ़ करने हेतु ई-नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद, ई-किसान उपज निधि तथा एनबीएफसी/एफपीओ के लिए क्रेडिट गारंटी योजना जैसी पोस्ट-हार्वेस्ट एवं डिजिटल ऋण पहलों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि के तहत उपलब्ध अवसरों की जानकारी देते हुए कोल्ड चेन एवं भंडारण सुविधाओं सहित मजबूत अवसंरचना विकसित करने के लिए सभी हितधारकों से सहयोग का आहवान किया।
आरसेटी के निदेशक मदन लाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी तथा स्वरोजगार एवं कौशल विकास में इनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
बैठक में उप मंडल प्रमुख पीएनबी धर्मशाला भरत कैलाश चंद्र ठाकुर, भारतीय रिज़र्व बैंक शिमला से आशीष सांगरा, सभी विभागाध्यक्ष, सरकारी अधिकारी, निगमों एवं विकास प्राधिकरणों के प्रतिनिधि, प्रेस प्रतिनिधि तथा विभिन्न बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।