चण्डीगढ़, 31.01.26- : दर्शनशास्त्र विभाग एवं राजनीति विज्ञान विभाग, स्नातकोत्तर सरकारी महाविद्यालय, सेक्टर-46 द्वारा नीति एवं न्याय पर भारतीय ज्ञान विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का संयुक्त रूप से आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के प्रायोजन से विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित की गई।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निशा अग्रवाल ने अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा विद्यार्थियों में नैतिक चेतना, आलोचनात्मक चिंतन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास में दर्शनशास्त्र की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा नीति एवं न्याय से संबंधित गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, जो एक न्यायपूर्ण, समावेशी एवं मूल्य-आधारित समाज के निर्माण हेतु अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य वक्तव्य प्रो. शिवानी शर्मा, दर्शनशास्त्र विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने आधुनिक शासन व्यवस्था एवं न्याय प्रणाली में भारतीय नीति एवं न्याय की अवधारणाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. आर.सी. सिन्हा, राष्ट्रीय फेलो, भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला द्वारा की गई। इस अवसर पर “मेटाफिलॉसफी” (मानविकी एवं सामाजिक विज्ञानों की पत्रिका) के प्रथम अंक तथा सुश्री दीपाली राउत द्वारा लिखित पुस्तक “महात्मा गांधी का दर्शन” का विमोचन किया गया। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. जी.सी. सेठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रतिष्ठित शिक्षाविदों—प्रो. आशुतोष कुमार, प्रो. आर.के. देसवाल, डॉ. आशुतोष अंगिरास, श्री लल्लन सिंह बघेल, डॉ. मोना अरोड़ा तथा डॉ. अंबुज शर्मा—द्वारा की गई। चार सत्रों में विभिन्न संस्थानों से आए विद्वानों एवं शिक्षकों द्वारा कुल 15 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया।
समापन सत्र में महाविद्यालय के डीन प्रो. स्नेह हर्षिंदर शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. देशराज सिरसवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। डॉ. राजेश कुमार (उप-प्राचार्य) तथा सुश्री ज्योति (समन्वयक) भी विशिष्ट अतिथियों में सम्मिलित थे।