शिमला:09.03.26- आज अपराह्न 4:00 बजे दक्षिण अफ्रीका के भारत में उच्चायुक्त प्रो0 अनिल सूकलाल हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां के साथ शिष्टाचार भेंट करने विधान सभा सचिवालय पहुँचे। इस अवसर पर उनके साथ उनकी धर्मपत्नी डॉ0 नेलिस्तरा सूकलाल सिंह तथा दक्षिण अफ्रीका के उप-उच्चायुक्त सेडरिक सी0 क्राउले भी मौजूद थे।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने उच्चायुक्त प्रो0 अनिल सूकलाल का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें व अन्य अतिथियों को गुलदस्ता, शॉल व टोपी भेंटकर सम्मानित किया। विधान सभा सचिव यशपाल शर्मा भी इस अवसर पर मौजूद थे।
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण विषयों सहित भारत व दक्षिण अफ्रीका के मध्य बेहतरीन कूटनीतिक सम्बन्धों पर भी गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर पठानियां ने स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 1994 में साउथ अफ्रीका में रंगभेद खत्म होने के बाद से रिपब्लिक ऑफ इंडिया तथा रिपब्लिक ऑफ दक्षिण अफ्रीका के बीच आपसी रिश्ते मजबूत हुए हैं तथा तब से दोनों देशों ने करीबी रणनीतिक, सांस्कृतिक, कूटनीतिक तथा व्यवसायिक रिश्ते बनाए हैं। दोनों ही पहले ब्रिटिश कॉलोनी थे और अब रिपब्लिक के तौर पर कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के पूरे सदस्य हैं।
पठानियां ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद खत्म करने मे भारत तथा महात्मा गांधी की भूमिका अग्रणी तथा अविस्मरणीय रही। महात्मा गांधी ने भारतीय समुदायों के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में दक्षिण अफ्रीका में अपना पॉलिटिकल-लीगल करियर शुरू किया था। भारत के दक्षिण अफ्रीका के साथ क्रिकेट तथा अन्य खेलों में गहरे सम्बन्ध हैं तथा दोनों देशों के बीच क्रिकेट मैंचों की द्विपक्षीय श्रृखंला समय – समय पर आयोजित की जाती है।
विधान सभा अध्यक्ष के साथ अपनी हिमाचल यात्रा का अनुभव सांझा करते हुए उच्चायुक्त ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक बेहतरीन तथा खूबसूरत प्रदेश है। यहाँ प्राकृति का अनोख नजारा उन्हें देखने को मिला है। यह शांत प्रदेश है तथा उन्हें हैरानी है की इस प्रदेश ने पर्वतों को काटकर कैसे सड़को का निर्माण किया है। यहाँ हर जगह की अपनी खूबसूरती है तथा हर क्षेत्र रमणीय है। उन्होने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में हर भवन हैरिटेज लगता है तथा इसका अदभुत तरीके से रख- रखाब किया गया है जो अकल्पनीय है। उन्होने कहा कि वह और उनके साथी देवभूमि की खूबसूरती से अधिक प्रभावित हैं।
बैठक उपरान्त विधान सभा अध्यक्ष उच्चायुक्त तथा उनकी पत्नी व उप- उच्चायुक्त को सदन भी ले गए जहाँ उन्होने सदन की संरचना तथा इसकी पृष्ठभूमि पर जानकारी दी। पठानियां ने कहा है कि यह इमारत 100 वर्ष पुरानी है तथा इसका निर्माण 1920 में शुरू हुआ तथा 1925 में बनकर तैयार हुई तथा 10 लाख रूपये इस पर लागत थी। पठानियां ने कहा कि विठ्ठलभाई पटेल 1925 में प्रथम अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय असैम्बली के निर्वाचित चेयरमैन चुने गए। उन्होने ब्रिटिश प्रतिद्वन्द्वी को 2 मतों से पराजित किया था। महिलाओं के मताधिकार तथा भारत छोड़ा का प्रस्ताव भी इसी सदन में पारित किया गया था। शिमला तब देश की समर कैपीटल थी। पठानियां ने कहा है कि सदन में वह जिस आसन पर बैठते हैं वह कुर्सी 1925 में वर्मा सरकार द्वारा बर्तानिया सरकार को उपहार स्वरूप भेंट की गई थी। यह तब से अब तक ज्यों की त्यों है।
पठानियां ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा की वर्ष 1972 में परिसिमन के बाद सदस्यों की संख्या 68 तय की गई थी तथा प्रदेश में 12 जिले विद्यमान हैं। पठानियां ने कहा कि हमारे प्रदेश में आर्थिकी मुख्य रूप से बागवानी, कृषि, हाईडल प्रोजेक्ट तथा पर्यटन पर निर्भर है तथा अस्तित्व में आने के बाद इस प्रदेश ने बहुत तरक्की की है तथा यहाँ के गॉव आज आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस हैं। इस अवसर दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त ने पठानियां को दक्षिण अफ्रीका आने का न्यौता दिया तथा दोनों देशों के कूटनीतिक सम्बन्ध में प्रगाढ़ता लाने पर बल दिया। पठानियां ने कहा कि वह इस वर्ष के अन्त में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने दक्षिण अफ्रीका जाएंगे तथा वहाँ की भौगोलिक, राजनितिक तथा पर्यटन स्थिती से रूबरू होंगे।